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World’s First Plane Hijacking | Plane Hijacking | Aviation News | दुनिया का पहला प्‍लेन हाईजैक, जिसमे पायलट-क्रू को थी शहर घूमने की आजादी, हाईजैकर्स की थी अजीबो-गरीब मांग | February 21 1931 rebels hijacked plane Lima Arequipa Peru political agenda first hijacking incident aviation history

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First Plane Hijacking आज से करीब 91 साल पुरानी इस घटना में अपने राजनैतिक मंसूबों को पूरा करने के लिए प्‍लेन को हाईजैक किया गया था. इस अजीबो-गरीब हाईजैक का ड्रामा करीब दस दिनों तक चला. अंतर्राष्‍ट्रीय हस्‍तक्षेप के बाद प्‍लेन के पायलट और क्रू को सकुशल छोड़ दिया गया, लेकिन इन दिनों के दौरान क्‍या हुआ, जानने के लिए पढ़ें आगे…

दुनिया का ऐसा प्‍लेन हाईजैक, पायलट को थी खास आजादी, हाईजैकर्स की थी यह मांगZoom

World’s First Plane Hijacking: यह घटना आज से ठीक 91 साल पहले 21 फरवरी 1931 की थी. दुनिया अभी आधुनिक हवाई यात्रा की शुरुआत ही देख रही थी. हवाई जहाज लोगों के लिए किसी चमत्कार से कम नहीं थे. लंबी दूरी तय करने का यह नया तरीका रोमांच, जोखिम और साहस से भरा था. लेकिन 21 फरवरी 1931 को पेरू के आसमान में जो हुआ, उसने एविएशन हिस्‍ट्री की दिशा ही बदल दी. यह वह दिन था, जब लैटिन अमेरिका में पहली बार किसी सिविल एयरक्राफ्ट को हाईजैक किया गया और दुनिया ने समझा कि आसमान भी अब पूरी तरह सुरक्षित नहीं रहा.

दरअसल, पेरू की राजधानी लीमा से अरेक्विपा जा रही एक एयरमेल फ्लाइट हर दिन की तरफ उड़ान भरती है. यह फ्लाइट पैन अमेरिकन-ग्रेश एयरवेज ऑपरेट कर रही थी. यह कंपनी अमेरिकी पैन एम और पेरू की ग्रेस शिपिंग कंपनी का ज्‍वाइंट वेंचर थी. उस समय एयरलाइन के फोर्ड ट्राइमोटर प्‍लेन एंडीज पर्वतों के ऊपर से डाक, पैसेंजर्स और जरूरी सामान को ले जाने का काम करते थे. तीन इंजनों वाला यह प्‍लेन बर्फ से ढकी पहाड़ियों के ऊपर लगभग 90 मिनट की उड़ान पूरी कर अरेक्विपा के धूल भरे रनवे पर लैंड कर गया. इस प्‍लेन में अमेरिकी एयरमेल, राजनयिक दस्तावेज और कई जरूरी चिट्ठियां मौजूद थीं.

हथियारबंद लोगों से घिर गया प्‍लेन और फिर…

लीमा से टेकऑफ होने के बाद से लेकर अरेक्विपा में लैंड होने तक सब कुछ सामान्य ही था, लेकिन असली घटना पलेन के लैंड होते ही शुरू हो गई. और फिर इसके बाद…

  1. जैसे ही प्‍लेन रनवे से टर्मिनल की ओर बढ़ा, अचानक 20 से 30 हथियारबंद लोग वहां पहुंच गए. उन्होंने पारंपरिक पोंचो पहन रखे थे और उनके हाथों में राइफलें थीं.
  2. कुछ ही मिनटों में प्‍लेन चारों ओर से घेर लिया गया. ये लोग दक्षिण पेरू के वे विद्रोही थे, जो उस समय अपने देश की राजनीतिक में उथल-पुथल मचाने की कोशिश कर रहे थे.
    उस दौर में पेरू की राजनीति बेहद अस्थिर थी. 1930 में लेफ्टिनेंट कर्नल लुइस मिगुएल सांचेज सेरो ने तख्तापलट कर सत्ता संभाली थी और पूर्व राष्ट्रपति ऑगस्टो लेगुइया को हटा दिया गया था.
  3. लेगुइया के समर्थक देश के कई हिस्सों में विद्रोह कर रहे थे और अरेक्विपा उनका मजबूत गढ़ बन चुका था.
  4. प्‍लेन के कप्तान बायरन डैग रिकर्ड्स एक अनुभवी अमेरिकी पायलट थे. उनके साथ मैकेनिक जॉर्ज हिलमैन और एक अन्य पायलट बिल ग्रे भी मौजूद थे.
  5. विद्रोही प्‍लेन में चढ़ गए और उन्होंने पायलट के सामने एक चौंकाने वाली मांग रखी. उन्होंने कहा कि प्‍लेन को फिर से उड़ाकर लीमा और कुस्को जैसे बड़े शहरों के ऊपर ले जाया जाए.
  6. हाईजैकर्स चाहते थे कि प्‍लेन से लीमा और कुस्‍को जैसे शहरों में सरकार विरोधी पंपलेट गिराए जाएं. इन पंपलेट में राष्ट्रपति सांचेज सेरो के खिलाफ बातें लिखी हुईं थीं.
  7. हाईजैकर्स का मकसद इन पंपलेट के जरिए जनता को भड़काना और मौजूदा सरकार के खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाना था.
  8. हाईजैकर्स को लगा कि प्‍लेन के जरिए अपनी बात जनता तक पहुंचाने से पूरे देश में आंदोलन भड़क सकता है.

जब पायलट ने बात मानने से कर दिया साफ इनकार

हाईजैकर्स की गिरफ्त में होने के बावजूद कप्तान रिकर्ड्स ने उनकी बात मानने से इंकार कर दिया. उनका कहना था कि प्‍लेन में मौजूद अमेरिकी एयरमेल अंतरराष्ट्रीय समझौतों के तहत सुरक्षित रखना उनकी जिम्मेदारी है. यदि वे राजनीतिक प्रचार में शामिल होते, तो यह नियमों का गंभीर उल्लंघन होगा और अंतरराष्ट्रीय विवाद खड़ा हो सकता था. उनका यह फैसला विद्रोहियों को पसंद नहीं आया, लेकिन उन्होंने पायलट और क्रू को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाया. नाराज हाइजैकर्स ने पूरे क्रू को बंधक बना लिया और शहर के भीतर निगरानी में रखा.

अजीब तरह की इस कैद में थी क्रू को यह आजादी

रिपोर्ट्स के अनुसार, क्रू को जेल में नहीं रखा गया था. उन्हें शहर के अंदर घूमने की आजादी थी. वे स्थानीय रेस्तरां में खाना खा सकते थे, प्लाजा डी आर्मास में घूम सकते थे, लेकिन उन्‍हें शहर छोड़ने की छूट नहीं थी. हाईजैकर्स हर जगह उन पर कड़ी निगरानी बनाए हुए थे. यह स्थिति बेहद तनावपूर्ण थी. एक तरफ हाईजैकर्स अपना राजनीतिक मकसद को पूरा करना चाहते थे, दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा था. लीमा के अखबारों ने इसे ‘आसमान में डकैती’ बताया, जबकि कुछ स्थानीय अखबार हाईजैकर्स के प्रति सहानुभूति दिखा रहे थे.

दस दिन की कैद के बाद पायलट और क्रू के साथ क्‍या हुआ?

  1. उस समय दुनिया आर्थिक मंदी यानी ग्रेट डिप्रेशन से गुजर रही थी. पेरू भी आर्थिक संकट और राजनीतिक अस्थिरता से जूझ रहा था. ऐसे माहौल में हाईजैकर्स ने प्‍लेन को एक नए हथियार के रूप में देखा था.
  2. करीब दस दिनों तक यह गतिरोध जारी रहा. कप्तान रिकर्ड्स ने शांत रहकर विद्रोहियों से बातचीत जारी रखी. उन्होंने धैर्य और समझदारी से स्थिति संभाली.
  3. आखिरकार 2 मार्च 1931 को क्रू को रिहा कर दिया गया. रिहाई की शर्तें पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं. कुछ रिपोर्टों के अनुसार समझौता हुआ, जबकि कुछ के मुताबिक हाईजैकर्स ने राजनीतिक परिस्थितियों के कारण उन्हें छोड़ दिया.
  4. क्रू ट्रेन से लीमा पहुंचा, जहां कप्तान रिकर्ड्स का हीरो की तरह स्वागत हुआ. अमेरिकी सरकार ने उन्हें एयरमेल की सुरक्षा के लिए सम्मानित किया.

एविएशन हिस्‍ट्री का टर्निंग पॉइंट था यह हाईजैक

1931 का अरेक्विपा हाईजैक एविएशन सिक्‍योरिटी के इतिहास में एक अहम मोड़ माना जाता है. इस घटना ने साबित किया कि तकनीकी प्रगति के साथ नए खतरे भी पैदा होते हैं. उस समय सुरक्षा जांच, एयरपोर्ट कंट्रोल सेंटर या आधुनिक निगरानी व्यवस्था मौजूद नहीं थी. आज जब एयरपोर्ट्स पर सख्त सिक्‍योरिटी, स्कैनर और इंटरनेशनल रूल्‍स लागू हैं, तब भी यह घटना बताती दिलाती है कि एविएशन सिक्‍योरिटी की नींव ऐसे ही बुरे अनुभवों के बाद रखी गई है.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is associated with News18 Digital for the last 6 years and is working on the post of Assistant Editor. He writes on Health, aviation and Defence sector. He also covers development related to …और पढ़ें

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