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समलैंगिकता पर तमाम घटिया बयानबाजी सुनी होगी लेकिन एक मंत्री ने हाल ही में नई थ्योरी निकाल डाली है. डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करके बैठे ‘मंत्री जी’ ने दावा किया है कि लोग दफ्तरों में काम के दबाव की वजह से समलैंगिग हो रहे हैं. उन्होंने ये बयान किसी सोशल मीडिया पर घटिया मजार करते हुए नहीं बल्कि संसद में एक सीरियस बहस के दौरान दिया है. उन्होंने जिस तरह साइंस की धज्जियां उड़ाई हैं उसके बाद पूरे देश में जमकर बवाल हो रहा है.
मलेशिया मिनिस्टर का समलैंगिकता पर बयानकुआलालंपुर: खराब आर्थिक हालत, बेरोजगारी और गिरती विकास दर जैसे मुद्दों को छोड़कर मलेशिया के मंत्री जी एक अनोखा मुद्दा संसद में लेकर चीख पड़े. उन्होंने दावा किया है कि लोग दफ्तरों में काम के दबाव की वजह से समलैंगिग हो रहे हैं. हैरानी की बात ये भी है कि विज्ञान की धज्जियां उड़ावे वाले ये मंत्री असल में डॉक्टरेट की उपाधि हासिल करके बैठे हुए हैं. ये शब्द हैं मलेशिया के धार्मिक मामलों के मंत्री डॉ जुल्किफली हसन के. उन्होंने संसद के भीतर एक ऐसा बयान दिया है, जिसे सुनकर मानवाधिकार कार्यकर्ता और आम जनता अपनी कानों पर यकीन नहीं कर पा रही है.
संसद में एक चर्चा के दौरान जुल्किफली हसन ने दावा किया कि आधुनिक जीवनशैली और ‘काम का बढ़ता दबाव’ लोगों के यौन रुझान को बदल रहा है. उनके अनुसार, वर्कलोड की वजह से लोग समलैंगिकता (Gay) की ओर झुक रहे हैं.
संसद में गूंजा बयान: तनाव बना रहा है समलैंगिक
मंत्री जी का तर्क था कि जब लोग दफ्तरों में ज्यादा तनाव और दबाव महसूस करते हैं, तो वे असामान्य व्यवहार करने लगते हैं. उन्होंने इसे एक सामाजिक समस्या के रूप में पेश किया, लेकिन उनके इस तर्क ने वैज्ञानिक तथ्यों की धज्जियां उड़ा दीं. जैसे ही यह बयान बाहर आया, इंटरनेट पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने मोर्चा खोल दिया.
LGBTQ समुदाय और डॉक्टरों का कहना है कि समलैंगिकता कोई मानसिक बीमारी या तनाव का नतीजा नहीं है, बल्कि यह एक प्राकृतिक पहचान है. कार्यकर्ताओं ने कहा कि इस तरह के बयान से नफरत और भेदभाव को बढ़ावा मिलता है. मलेशिया में समलैंगिकता अभी भी एक संवेदनशील और कानूनी रूप से जटिल मुद्दा है, जहां अक्सर ऐसे रूढ़िवादी बयान सामने आते रहते हैं.
समलैंगिकता पर क्या कहते हैं वैज्ञानिक तथ्य?
दुनिया भर के मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों का मानना है कि यौन रुझान का काम के दबाव या तनाव से कोई लेना-देना नहीं होता. यह एक इंसान की अपनी पहचान होती है जो उसके जन्म और व्यक्तित्व से जुड़ी होती है.
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उत्कर्षा श्रीवास्तव एक अनुभवी डिजिटल पत्रकार हैं, जिन्हें डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव प्राप्त है. वर्तमान में वे न्यूज18 डिजिटल में सीनियर पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. अपने करियर के द…और पढ़ें
January 28, 2026, 19:33 IST





