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what people buy most on diwali by cait पटाखे-मिठाई नहीं दिवाली पर लोग सबसे ज्यादा खरीदते हैं ये चीज, पुराना है कनेक्शन

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Diwali Shopping: जैसे-जैसे देश दीपों का पर्व मनाने की तैयारी कर रहा है, पूरे भारत के बाजारों में खुशियां, उत्साह और उमंग का माहौल लौट आया है. इस त्यौहार पर बाजार इसलिए भी गुलजार रहता है क्योंकि लगभग हर घर त्यौहार की खरीदारी करता है, फिर चाहे 500 रुपये की ही क्यों न करे. हाल ही में कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स ने इस साल दिवाली त्यौहार की बिक्री 4.75 लाख करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया है, जो इस दशक की सबसे ज्यादा बिक्री हो सकती है.

इस बारे में कैट के राष्ट्रीय महामंत्री और चांदनी चौक से सांसद प्रवीन खंडेलवाल ने बताया कि पीएम मोदी द्वारा जीएसटी दरों में की गई कमी और स्वदेशी व वोकल फॉर लोकल का आह्वान देश के व्यापारी समुदाय के लिए एक गेम चेंजर साबित हुआ है. देश के कोने-कोने में फैले पारंपरिक बाजारों से लेकर आधुनिक मॉल तक हर जगह जबरदस्त भीड़ और उपभोक्ताओं का उत्साह देखने को मिल रहा है. इस वर्ष का त्यौहार भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था की वास्तविक ताकत को दर्शा रहा है, जहा हर वर्ग के लोग अपनी क्षमता के अनुसार खरीदारी कर रहे हैं.

जहां एक ओर करोड़ों परिवार दिवाली पर 500 या उससे कम रुपये की खरीदारी कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर लाखों उपभोक्ता हजारों और लाखों रुपये खर्च कर रहे हैं. यही विविधता दिवाली सीजन को देश के रिटेल कारोबार के लिए सबसे महत्वपूर्ण समय बनाती है.

दिवाली पर सबसे ज्यादा खरीदते हैं ये चीज
कैट के अनुसार इस वर्ष दिवाली पर विभिन्न क्षेत्रों में खर्च का अनुमान लगाया गया है जो काफी दिलचस्प है. यह बताता है कि इस बार लोग किस चीज पर कितना पैसा बहाएंगे. कैट के अनुसार सबसे ज्यादा 13 फीसदी खाद्य सामग्री और किराना की खरीदारी पर पैसा खर्च होगा. जबकि फल और ड्राई फ्रूट पर 3 फीसदी,मिठाई और नमकीन पर 4 फीसदी,वस्त्र और परिधान पर 12 फीसदी,इलेक्ट्रिकल सामान पर 4 फीसदी,इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद पर 8 प्रतिशत,3 फीसदी बिल्डर्स हार्डवेयर,3 प्रतिशत होम डेकोर,6 प्रतिशत कॉस्मेटिक्स और पर्सनल केयर,3 फीसदी बर्तन और किचनवेयर,3 परसेंट पूजा सामग्री,2 परसेंट कन्फेक्शनरी और बेकरी उत्पाद,4 परसेंट फर्निशिंग और फर्नीचर, 8 फीसदी गिफ्ट आइटम् और 24 फीसदी विविध वस्तुओं और सेवाओं पर खर्च होगा जिनमें ऑटोमोबाइल, खिलौने, पैकेजिंग, स्टेशनरी, ट्रैवल आदि शामिल हैं.

खंडेलवाल ने कहा की बाजारों में स्वदेशी उत्पादों की बढ़ी मांग है जिसमें आत्मनिर्भर भारत की झलक दिखाई देती है. देशभर के व्यापारियों ने बताया है कि इस बार उपभोक्ता विदेशी वस्तुओं की बजाय स्वदेशी उत्पादों को प्राथमिकता दे रहे हैं.दिवाली के उत्सवों का प्रभाव केवल व्यापार तक सीमित नहीं है. देशभर में हो रहे हजारों कार्यक्रमों, समारोहों और आयोजनों के कारण होटल, रेस्टोरेंट, बैंक्वेट हॉल, कैटरिंग, इवेंट मैनेजमेंट, टैक्सी सेवाएं, डेकोरेटर, संगीतकार और कलाकारों को भी बड़े पैमाने पर काम और कारोबार मिल रहा है.

ऐसे में आंकड़े बता रहे हैं कि सबसे ज्यादा पैसा पुराने समय से चली आ रही परिपाटी के अनुसार खान-पान की चीजों और कपड़ों पर खर्च होगा, जैसा कि पुरानी परंपरा है.

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