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USS Tripoli Iran Explained: Iran US War News | America Aur Iran Ki Khabar | USS Tripoli USS Gerald Ford- अमेरिका यूएसएस ट्रिपोली को क्यों भेज रहा ईरान

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ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका USS त्रिपोली और करीब 2,500 मरीन पश्चिम एशिया भेज रहा है. इससे सवाल उठा कि क्या अब्राहम लिंकन और जेराल्ड फोर्ड जैसे एयरक्राफ्ट कैरियर कम पड़ गए. असल में त्रिपोली की भूमिका अलग है. यह समुद्र से सैनिक उतारने, तटीय ऑपरेशन, एस्कॉर्ट मिशन और आपात सैन्य कार्रवाई के लिए ज्यादा उपयोगी है.

USS ट्रिपोली को ईरान क्यों भेज रहा अमेरिका, क्या एयरक्राफ्ट कैरियर हुए फेल?Zoom

USS त्रिपोली.

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में ट्रंप ने अब एक नया समुद्री दांव चला है. जापान में तैनात विशाल युद्धपोत USS त्रिपोली (USS Tripoli) को करीब 2,500 मरीन के साथ पश्चिम एशिया भेजा जा रहा है. ऐसे में बड़ा सवाल उठ रहा है कि जब अमेरिका के पास पहले से USS अब्राहम लिंकन और USS जेराल्ड आर फोर्ड जैसे ताकतवर एयरक्राफ्ट कैरियर मौजूद हैं, तो फिर त्रिपोली की जरूरत क्यों पड़ गई? क्या ये जहाज हालात संभालने में कम पड़ रहे हैं, या अमेरिका अब ईरान के खिलाफ नया हमला करने की सोच रहा है?

अब्राहम लिंकन और जेराल्ड फोर्ड क्या फेल हो गए?

यहां सबसे पहले समझना जरूरी है कि यूएसएस त्रिपोली और यूएसएस अब्राहम लिंकन या यूएसएस जेराल्ड आर. फोर्ड एक जैसे जहाज नहीं हैं. अब्राहम लिंकन और जेराल्ड फोर्ड मुख्य रूप से एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. इनका काम फाइटर जेट उड़ाना, हवाई हमले करना, दुश्मन के ठिकानों पर दबाव बनाना और मिसाइल-ड्रोन खतरे के बीच हवा से सुरक्षा देना है. दूसरी तरफ, यूएसएस त्रिपोली ऐसा युद्धपोत है जिसे समुद्र के रास्ते सैनिक, हेलिकॉप्टर, लड़ाकू विमान और भारी सैन्य उपकरण लेकर तट के बेहद करीब तक जाने के लिए बनाया गया है. आसान भाषा में कहें तो यह जहाज उस स्थिति में ज्यादा काम आता है, जब सिर्फ हवाई हमला काफी न हो और समुद्र से सीधे सैनिक उतारने हों.

जेराल्ड फोर्ड.

यही वजह है कि त्रिपोली को भेजे जाने का मतलब यह नहीं है कि अब्राहम लिंकन और जेराल्ड फोर्ड फेल हो गए हैं. असल बात यह है कि अमेरिका अपने सैन्य विकल्प बढ़ा रहा है. पहले से मौजूद एयरक्राफ्ट कैरियर हवाई हमले करके हवा से ताकत दिखा रहे हैं, लेकिन त्रिपोली जैसे जहाज के आने से अमेरिका के पास समुद्र से ईरान में सैनिक उतारने, छोटे द्वीपों या तटीय ठिकानों पर नजर रखने या सीमित जमीनी कार्रवाई के रास्ते खुल जाते हैं. यानी यह किसी जहाज की जगह लेने नहीं, बल्कि लड़ाई के नए तरीके जोड़ने जैसा वाला कदम है.

USS त्रिपोली.

क्या ईरान पर जमीनी हमला करेगा अमेरिका?

USS त्रिपोली की तैनाती से सवाल उठता है कि क्या अमेरिका जमीनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है? फिलहाल ऐसी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं है कि अमेरिका ईरान में बड़े पैमाने पर जमीनी हमला करने जा रहा है. लेकिन त्रिपोली जैसी तैनाती यह जरूर दिखाती है कि ट्रंप अब सिर्फ मिसाइल और एयरस्ट्राइक तक खुद को सीमित नहीं रखना चाहते. अगर होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले बढ़ते हैं, अगर अमेरिकी हितों पर खतरा बढ़ता है, अगर किसी दूतावास या सैन्य ठिकाने से लोगों को निकालना पड़ता है, या अगर किसी तटीय सैन्य ठिकाने पर फौरी दबाव बनाना पड़ता है, तो मरीन सैनिकों के साथ ऐसा जहाज बहुत काम आता है.

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Yogendra Mishra

योगेंद्र मिश्र ने इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म में ग्रेजुएशन किया है. 2017 से वह मीडिया में जुड़े हुए हैं. न्यूज नेशन, टीवी 9 भारतवर्ष और नवभारत टाइम्स में अपनी सेवाएं देने के बाद अब News18 हिंदी के इंटरने…और पढ़ें

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