Agency:एजेंसियां
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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता फोरम के सभी आदेशों को सिविल कोर्ट डिक्री जैसा लागू करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी.
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 18 साल से जारी खामी दूर हो गईजस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि 2002 में उपभोक्ता संरक्षण कानून में किए गए संशोधन ने उपभोक्ता फोरम की ताकत को गलत तरीके से सीमित कर दिया था. दरअसल, उस संशोधन में ‘हर आदेश’ शब्द की जगह ‘अंतरिम आदेश’ लिख दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए भारी नुकसानदेह साबित हुआ और 2019 में संसद की तरफ से सुधार किए जाने तक यह स्थिति बनी रही.
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद पुणे की पाम ग्रोव्स कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी से जुड़ा था. 2007 में जिला उपभोक्ता फोरम ने बिल्डर को सोसायटी के पक्ष में डीड ऑफ कंवेंस निष्पादित करने का आदेश दिया था. लेकिन 2002 संशोधन का हवाला देते हुए ऊपरी फोरम्स ने इस आदेश को खारिज कर दिया. अब सुप्रीम कोर्ट ने उन फैसलों को पलटते हुए साफ कर दिया कि ऐसे आदेश लागू करने योग्य हैं.
आंकड़े बताते हैं उपभोक्ताओं की परेशानी
बढ़ती लंबित याचिकाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC के चेयरमैन को जल्द से जल्द इन मामलों का निपटारा करने के निर्देश दिए. साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता को न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया है ताकि प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत करने पर सुझाव दिए जा सकें.
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें
An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T… और पढ़ें
New Delhi,Delhi
August 24, 2025, 07:28 IST





