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Sanae Takaichi: जापान की पहली महिला PM, यूनिवर्सिटी की फीस के लिए नहीं थे पैसे, नाम पर मुहर लगते ही रचा इतिहास

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Sanae Takaichi: जापान की लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी की प्रमुख 64 वर्षीय साने ताकाइची जापान की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी हैं. संसद में मुहर लगते ही उन्होंने इतिहास रच दिया.

जापान की पहली महिला PM, कभी यूनिवर्सिटी की फीस के लिए नहीं मिले थे पैसेSanae Takaichi: साने ताकाइची ने जापान की राजनीति में इतिहास रच दिया है
नई दिल्ली (Sanae Takaichi). जापान को अपनी परंपराओं और पुरुष-प्रधान राजनीति के लिए जाना जाता है. 64 वर्षीय अल्ट्रा-कंजर्वेटिव नेता साने ताकाइची ने देश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनकर इतिहास रच दिया है. साने ताकाइची को कभी हेवी मेटल ड्रमर और टीवी एंकर के रूप में जाना जाता था. साने ताकाइची की जीत कोई साधारण राजनीतिक जीत नहीं है. इससे उन्होंने न केवल अपने देश की ‘ग्लास सीलिंग’ को तोड़ा है, बल्कि अपनी कट्टरपंथी राष्ट्रवादी विचारधारा से देश की राजनीति में पोलराइजेशन भी पैदा कर दिया है.
साने ताकाइची ब्रिटिश ‘आयरन लेडी’ मार्गरेट थैचर को अपना आदर्श बताती हैं. उनका राजनीतिक नारा ‘जापान फर्स्ट’ है और उनके विचार काफी आक्रामक हैं. एक तरफ, उनकी जीत को जापान में महिला सशक्तिकरण के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है तो दूसरी तरफ, उनकी युद्धकालीन इतिहास की विवादास्पद व्याख्याएं और चीन-विरोधी कठोर रुख उन्हें एशिया में तनाव का केंद्र बना रहा है. वह सिर्फ जापान की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की कूटनीति का महत्वपूर्ण चेहरा बन गई हैं. जानिए साने ताकाइची कितनी पढ़ी-लिखी हैं.

साने ताकाइची की शिक्षा और शुरुआती करियर

साने ताकाइची का जन्म 7 मार्च 1961 को जापान के नारा प्रांत के यामातोकोरीयामा शहर में हुआ था. उनके पिता दाइक्यु ताकाइची (Daikyū Takaichi) टोयोटा की ऑटोमोटिव कंपनी में काम करते थे. उनकी मां, काजुको ताकाइची (Kazuko Takaichi) नारा प्रान्त की पुलिस बल में कार्यरत थीं. ताकाइची ने नारा प्रांत के उनेबी सीनियर हाईस्कूल से ग्रेजुएशन किया था. उन्होंने टोक्यो की 2 प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी- कियो (Keio) और वासेडा (Waseda) में दाखिले के लिए योग्यता हासिल की थी लेकिन वह वहां जा नहीं पाईं.

पिता ने नहीं दी थी ट्यूशन फीस

उनके माता-पिता ने उन्हें निजी यूनिवर्सिटी या घर से दूर रहकर पढ़ने पर ट्यूशन फीस देने से मना कर दिया था- क्योंकि वह एक लड़की थीं. फिर कोबे यूनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए साने ताकाइची ने रोजाना 6 घंटे का सफर तय किया. ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने मत्सुशिता इंस्टीट्यूट में दाखिला लिया. साने ताकाइची ड्रम्स और पियानो बजाती थीं और उन्हें हेवी मेटल संगीत पसंद था. उन्हें मोटरसाइकिल का भी शौक था और उनके पास कावासाकी Z400 थी. मत्सुशिता इंस्टीट्यूट से स्पॉन्सरशिप मिलने के बाद 1987 में वह संयुक्त राज्य अमेरिका चली गई थीं.

किताबें लिखीं, एंकरिंग की

साने ताकाइची ने यूएसए में डेमोक्रेटिक कांग्रेसवुमन पैट श्रोडर के लिए कांग्रेसनल फेलो के रूप में काम किया. 1989 में जापान लौटने पर उन्होंने अमेरिकी राजनीति के ज्ञान के साथ विधायी विश्लेषक के रूप में काम किया और अपने अमेरिकी अनुभव पर किताबें भी लिखीं. इसके बाद मार्च 1989 में वह टीवी असाही (TV Asahi) चैनल पर न्यूज एंकर बन गईं. वहां उन्होंने रेन्हो (Renhō) के साथ ‘कोडावारी टीवी प्री-स्टेज’ कार्यक्रम को-होस्ट किया. उन्होंने अमेरिकी राजनीति पर भी एक किताब लिखी थी.

1993 में शुरू हुआ पॉलिटिकल सफर

साने ताकाइची ने अपनी राजनीतिक यात्रा 1993 में शुरू की थी. वह एक निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स (संसद) के लिए चुनी गई थीं. बाद में साने ताकाइची लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) में शामिल हो गईं और पूर्व आर्थिक सुरक्षा मंत्री और पूर्व आंतरिक मामलों की मंत्री सहित कई वरिष्ठ सरकारी और पार्टी पदों पर काम किया. साने ताकाइची ऐतिहासिक पदवी और कट्टरपंथी राजनीतिक विचार के कारण अक्सर ग्लोबल सुर्खियों में रहती हैं.

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Deepali Porwal

With over more than 10 years of experience in journalism, I currently specialize in covering education and civil services. From interviewing IAS, IPS, IRS officers to exploring the evolving landscape of academi…और पढ़ें

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