उन्होंने कहा कि केवल सैनिक लड़कर देश को आजाद नहीं करा सकते. समाज को भी जागरूक होना होगा. चरखा चलाने से लेकर सशस्त्र संघर्ष तक, कई धाराओं ने स्वतंत्रता की राह दिखाई. लेकिन आजादी मिलने के बाद जैसी चेतना पैदा होनी चाहिए थी, वैसी नहीं हुई.
भागवत ने कहा कि समाज अंधविश्वासों से भरा था. सुधार आंदोलन चले और उनका असर भी हुआ. लेकिन सब कुछ पूरी तरह ठीक नहीं हुआ. विवेकानंद ने समाज को मूल पर लौटाने का प्रयास किया. उनका प्रभाव आज भी भारत की हर गतिविधि में दिखता है.
उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार ने भी चारों धाराओं में काम किया. उनके भीतर बचपन से ही देशभक्ति की भावना थी. यही वजह है कि उन्होंने संघ की स्थापना की.
भागवत ने कहा कि संघ को लेकर बहुत चर्चाएं होती हैं. अक्सर ये चर्चाएं धारणाओं पर आधारित होती हैं, तथ्यों पर नहीं. 2018 में इसी सभागार में संवाद हुआ था. उद्देश्य किसी को कन्विंस करना नहीं, बल्कि तथ्य सामने रखना था. वही प्रयास अब फिर से हो रहा है.
भारत का वैश्विक योगदान
मंगलवार को कार्यक्रम में भाजपा सांसद मनोज तिवारी भी पहुंचे. उन्होंने कहा, मोहन भागवत को सुनना हमारे लिए गर्व की बात है.’ समारोह में बाबा रामदेव मौजूद रहे. केंद्रीय मंत्री एसपी सिंह बघेल भी पहुंचे. अभिनेत्री कंगना रनौत और अनुप्रिया पटेल शामिल हुईं. रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू भी नजर आए. कार्यक्रम में पूर्व सीजेआई रंजन गोगोई की मौजूदगी खास रही. भवन में बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और बुद्धिजीवी जुटे.
भाजपा सांसद कंगना रनौत ने कहा, ‘आरएसएस एक बड़ी संस्था है जो देश के विकास और लोगों की प्रगति के लिए काम कर रही है. आज मोहन भागवत से मिलना और इस समारोह में शामिल होना हमारे लिए गर्व की बात है.’





