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How India Become 3r Largest Economy : भारत जल्द ही तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश बन जाएगा. आरबीआई गवर्नर के इस दावे के बाद यह जानना जरूरी है कि इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए क्या करना होगा और अभी …और पढ़ें
भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार अभी करीब 4.3 ट्रिलियन डॉलर है. उद्योग संगठन फिक्की और इंडियन बैंक एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में आरबीआई प्रमुख ने कहा कि वैसे तो भारतीय अर्थव्यवस्था ने पिछले कुछ समय से काफी कुछ हासिल किया है, लेकिन आत्मनिर्भर बनने की दिशा में अभी बहुत कुछ बाकी है. उन्होंने कहा कि हमारी इकनॉमी पिछले 4 साल में 8 फीसदी सीएजीआर के हिसाब से बढ़ रही है, जबकि महंगाई दर पिछले एक दशक में 4.9 फीसदी की औसत दर पर बनी हुई है. सेवा निर्यात और विदेश से धन भेजे जाने की वजह से देश में विदेशी मुद्रा का भी प्रवाह बढ़ा है. फिलहाल हम वित्तीय स्थिति को स्थिर बनाए रखने पर जोर दे रहे हैं.
गवर्नर की मानें तो अभी देश के विदेशी मुद्रा भंडार 695 अरब डॉलर का है, जो किसी आपात स्थिति में 11 महीने के आयात खर्च को चलाने के लिए काफी है. देश में चालू खाते का घाटा इस समय जीडीपी के महज 0.6 फीसदी के बराबर है, जो हमारी मजबूत आर्थिक स्थिति को दर्शाता है. यह स्थिति सही नीतिगत फैसलों और ढांचागत सुधारों की वजह से आई है, जिसका फायदा पूरी अर्थव्यवस्था को मिल रहा है. उन्होंने कहा कि हमारा फोकस ग्राहकों की सुरक्षा के साथ ग्रोथ करने पर है और इस बैलेंस को बनाना ही सबसे मुश्किल काम है.
अभी कहां खड़ा है भारत
भारत अभी दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था वाला देश है और जीडीपी का आकार करीब 4.3 ट्रिलियन डॉलर का है. अनुमान है कि यह साल 2030 से पहले ही जर्मनी को पीछे छोड़कर तीसरी सबसे बड़ी इकनॉमी बन जाएगा. इस बारे में आरबीआई गवर्नर के दावे से पहले ही ग्लोबल फर्म मॉर्गन स्टेनली ने दावा कर दिया था कि भारत साल 2027-28 तक यह लक्ष्य हासिल कर सकता है. हालांकि, एसएंडपी का मानना है कि भारत को इस लक्ष्य तक पहुंचने में 2030 तक का समय लग सकता है, जिसके लिए उसे अपनी इकनॉमी का आकार दोगुना बढ़ाकर 7 से 10 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना होगा. यह लक्ष्य 6 से 7 फीसदी विकास से हासिल हो जाएगा.
भारत में तीसरी बड़ी इकनॉमी बनने के लिए सभी जरूरी क्षमताएं हैं. उसकी ग्लोबल इकनॉमी में हिस्सेदारी बढ़कर 20 फीसदी से भी ज्यादा पहुंच गई है. भारत की विकास दर अभी दुनिया में सबसे ज्यादा है, जिसे महंगाई में नरमी, बेहतर कैश इनफ्लो और रूरल इकनॉमी की वृद्धि से भी समर्थन मिल रहा है. इसके अलावा दुनिया की सबसे बड़ी आबादी होने के कारण भारत एक बड़ा घरेलू बाजार भी है. इससे उपभोग बढ़गा और मैन्युफैक्चरिंग में उछाल आने से जीडीपी का आकार भी बढ़ता जाएगा. अभी जीडीपी में विनिर्माण क्षेत्र का 15.6 फीसदी हिस्सा है, जो अगले कुछ साल में 21 फीसदी से ज्यादा हो जाएगा.
किन चुनौतियों को पार करना जरूरी
भारतीय इकनॉमी भले ही काफी मजबूत स्थिति में दिख रही है, लेकिन तीसरी अर्थव्यवस्था बनने के लिए चुनौतियों को पार करना जरूरी होगा. इसमें कुछ सेक्टर्स हैं, जिन पर ध्यान देना सबसे आवश्यक है.
- इन्फ्रा का विकास : भारत को तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के लिए एक्सप्रेसवे, हवाईअड्डे, मेट्रो सिस्टम, बंदरगाहों का विकास करना जरूरी होगा. पीएम गतिशक्ति, भारतमाला, सागरमाला और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं पर भी जोर देना पड़ेगा.
- डिजिटलीकरण को बढ़ावा : भारत सरकार को डिजिटल इकनॉमी को बढ़ाने पर जोर देना होगा. इससे क्रेडिट आसान हो जाएगा, जो अभी जीडीपी के अनुपात में 57 फीसदी है और जल्द ही यह 100 फीसदी पहुंच जाएगा.
- मैन्युफैक्चरिंग : देश में विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए टैक्स कटौती, निवेश प्रोत्साहन, इन्फ्रा खर्च आदि पर जोर देना पड़ेगा, जिससे 1.1 करोड़ से ज्यादा नौकरियां आएंगी.
- एनर्जी और लेबर : सरकार को ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के साथ लेबर मार्केट को मजबूत बनाने भी जोर देना होगा.
- एग्री सेक्टर पर जोर : भारत आज भी गांवों में बसता है और सिंचाई, भंडारण और सप्लाई चेन को मजबूत बनाकर यूपी, महाराष्ट्र और तमिलनाडु जैसे राज्यों को 1 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी वाला स्टेट बनाना होगा.
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि… और पढ़ें
New Delhi,Delhi
August 26, 2025, 09:09 IST





