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OPINION: अलविदा कहूं भी तो कैसे? जो आवाज अमर हो गई… उस पर लिखूं भी तो कैसे?

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1972 में मेघालय के तुरा में एक असमिया ब्राह्मण परिवार में एक लड़के का जन्म हुआ, जिसकी आवाज ने उसे न केवल भारत में, बल्कि दुनिया भर में एक सशक्त नाम बना दिया. 2006 में उन्होंने सिर्फ एक गाने ‘या अली’ से पूरे बॉलीवुड जगत को मंत्रमुग्ध कर दिया और फिर कई हिट गाने गाए. 2013 में ‘कृष 3’ का उनका गाना ‘दिल तू ही बता’ पिछले 12 सालों से हिट है. मैं बात कर रहा हूं मशहूर प्ले बैक सिंगर जुबिन गर्ग की, जो अब हमारे बीच नहीं हैं.

19 सितंबर को मैं थिएटर में ‘अजय: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ अ योगी’ फिल्म देख रहा था, तभी मुझे खबर मिली कि सिंगापुर में स्कूबा डाइविंग करते समय उसका निधन हो गया. यह मेरे लिए बहुत बड़ा सदमा था. यह 2007 या 2008 की बात होगी, जब मैं झारखंड के जमशेदपुर में पत्रकारिता में ग्रेजुएट की पढ़ाई कर रहा था. ये वो दौर था जब जुबिन ने बॉलीवुड में कदम रखा ही था और उनका गाना ‘या अली’ सिर्फ मेरी ही नहीं, सबकी जुबान पर था.

तभी मुझे पता चला कि जुबिन जमशेदपुर के जुबली पार्क में एक लाइव कॉन्सर्ट करने वाले हैं. मैंने जुबिन को लाइव देखने और सुनने की योजना बनाई थी, लेकिन जब मैं पहुंचा तो हजारों की भीड़ उनका स्वागत करने के लिए पहले से ही मौजूद थी. मैं जुबिन के स्टेज से लगभग 100-150 मीटर दूर कुछ दोस्तों के साथ खड़ा था. मेरी मुलाकात एक पत्रकार से हुई जिसे मैं जानता था और जो जुबिन का शो कवर करने वहां आया था. फिर, मैं और मेरे कुछ दोस्त वीआईपी रो में गए. जुबिन अभी मंच पर नहीं आए थे, लेकिन जैसे ही वे मंच पर आए, पूरा पार्क ‘जुबिन, जुबिन!’ की आवाज से गूंज उठा और जब उन्होंने गाना शुरू किया तो उन्हें अपने सामने गाते देखकर मेरे रोंगटे खड़े हो गए.

लाइव शो खत्म होते ही, जुबिन अपने होटल के लिए निकल रहे थे, तभी मैं उनसे स्टेज के पीछे मिला. वे कुछ पत्रकारों से बातें कर रहे थे और मैं भी उनमें शामिल था. मैं बस उन्हें बोलते हुए देख रहा था. जुबिन बहुत शांत और खुशमिजाज थे, और उनके कार में बैठने से पहले मैं उनसे बमुश्किल एक मिनट ही बात कर पाया. मैं तब से जुबिन के गाने सुन रहा था. मुझे कई बार उनका इंटरव्यू लेने का मौका भी मिला, लेकिन किसी न किसी वजह से वे कैंसिल होते रहे.

खैर, चलिए 19 सितंबर की बात करते हैं. मैं थिएटर में फिल्म देख रहा था और जुबिन के निधन की खबर आई. यह मेरे लिए और बाकियों के लिए भी एक दुखद पल था. मैं जुबिन के बारे में कुछ लिखना चाह रहा था, अपनी भावनाओं के साथ उन्हें अलविदा कहना चाह रहा था, लेकिन मैं अपनी भावनाओं को लैपटॉप पर उतार नहीं पा रहा था. फिर मैंने रविवार को असम के गुवाहाटी का वह दृश्य देखा… जहां जुबिन की अंतिम यात्रा निकाली जा रही थी. इस शवयात्रा में उनके प्रशंसकों की भीड़ उमड़ पड़ी और गायक को अश्रुपूर्ण विदाई दी. सच कहूं तो इस दौरान मेरी आंखें भी नम हो गईं.

मैं इस शवयात्रा को देखकर दंग रह गया. अब तक मुझे लगता था कि लोग जुबिन को भूल गए हैं, लेकिन मैं गलत था. जुबिन की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों को देखकर मुझे श्रीदेवी की अंतिम यात्रा की याद आ गई. यकीन मानिए, इतनी भीड़ तो मैंने ‘सुरों की कोकिला’ लता मंगेशकर की अंतिम यात्रा में भी नहीं देखी थी. यहीं से मुझे लेखन के माध्यम से अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक जरिया मिला. इस लेख को जुबिन को अंतिम विदाई के रूप में ही पढ़ें. जब उनकी अंतिम यात्रा में उनके प्रशंसकों की आंखें नम हो गईं, तो मुझे एहसास हुआ कि वे सिर्फ एक गायक ही नहीं, एक अच्छे इंसान भी थे.

वे एक गायक होने के साथ-साथ एक समाज सेवक भी थे, और कलागुरु आर्टिस्ट फाउंडेशन नामक एक चैरिटी संस्था चलाते थे, जो विभिन्न कार्यों के लिए धन दान करती है. उन्होंने असम में आई विनाशकारी बाढ़ के दौरान लोगों से कपड़े, दवाइयां और अन्य सामान दान करने का आग्रह किया था. वे फुटबॉल के प्रशंसक थे और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए धन जुटाने के लिए मैच खेलते थे. यहां तरक कि मई 2021 में कोविड-19 के मामलों में तेजी के दौरान, जुबिन ने गुवाहाटी स्थित अपने दो मंजिला घर को कोविड केयर सेंटर में बदलने की पेशकश की थी. यह कदम उस समय मरीजों के लिए बिस्तरों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उठाया गया था.

जुबिन भले ही अब इस दुनिया में न हों, लेकिन उनकी आवाज अमर है… और लोग सदियों से उनके गाने सुनते और गुनगुनाते आ रहे हैं. उनके प्रशंसक उन्हें हमेशा अपनी यादों में जिंदा रखेंगे. बता दें, जुबिन ने दुनिया भर में अपनी पहचान बनाई, लेकिन उन्होंने असम से कभी दूरी नहीं बनाई. उन्होंने हमेशा असम की मिट्टी की खुशबू हर जगह फैलाई और यही वजह है कि वहां कि सरकार ने तीन दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा की. जुबिन को मेरी भावभीनी श्रद्धांजलि. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे.

(डिस्क्लेमर: ये लेखक के निजी विचार हैं. लेख में दी गई किसी भी जानकारी की सत्यता/सटीकता के प्रति लेखक स्वयं जवाबदेह है. इसके लिए News18Hindi उत्तरदायी नहीं है.)

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