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North Korea Succession News | North Korea Kim Jong Un | Kim Jong Un Daughter with Next Dictator | बहन और बेटी के बीच उलझा दुनिया का सबसे खूंखार तानाशाह, नॉर्थ कोरिया का गेम ऑफ थ्रोन्स देखिए

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बहन-बेटी के बीच उलझा दुनिया का सबसे खूंखार तानाशाह, रियल गेम ऑफ थ्रोन्स देखिए

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North Korea Politics News: दुनिया का सबसे रहस्यमयी देश उत्तर कोरिया इन दिनों एक ऐसे सियासी ड्रामे में उलझा हुआ है. किसी हॉलीवुड थ्रिलर या मशहूर वेब सीरीज गेम्स ऑफ थ्रोन्स से कम नहीं है. यह ड्रामा ओटीटी नहीं, बल्कि प्योंगयांग के सत्ता के गलियारों में चल रहा है. इस ‘गेम ऑफ थ्रोंस’ के केंद्र में देश के सर्वोच्च नेता किम जोंग उन नहीं, बल्कि उनके परिवार की दो महिलाएं हैं. एक तरफ किम जोंग उन की महज 13 साल की बेटी किम जू ए (Kim Ju Ae) हैं, जिन्हें दुनिया के सामने भावी उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया जा रहा है, तो दूसरी तरफ किम जोंग उन की बेहद ताकतवर और क्रूर मानी जाने वाली बहन किम यो-जोंग (Kim Yo-jong) हैं. सबकी धड़कनें बढ़ी हुईं हैं कि उत्तर कोरिया की अगली कमान किसके हाथ में होगी? वंशवाद को आगे बढ़ाने वाली एक किशोरी या सत्ता के खेल में माहिर एक अनुभवी राजनेता?

पहले यह समझना जरूरी है कि उत्तर कोरिया में सत्ता का इतिहास क्या रहा है? यह पूरी तरह किम परिवार के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है. 1948 में देश की स्थापना के बाद से Kim Il Sung ने शासन की नींव रखी, जिसके बाद उनके बेटे Kim Jong Il और फिर वर्तमान नेता Kim Jong Un ने सत्ता संभाली.

किम जोंग सत्ता संभालते समय मात्र 26 साल के थे. उन्हें 2010 में औपचारिक रूप से उत्तराधिकारी घोषित किया गया था. उनके पिता को स्ट्रोक आने के बाद जल्दबाजी में यह प्रक्रिया पूरी की गई. दिसंबर 2011 में पिता की मृत्यु के बाद किम जोंग उन अचानक सत्ता के शिखर पर पहुंच गए. एक्सपर्ट्स का मानना है कि शायद अपने इसी अनुभव के कारण वे अपनी बेटी को पहले से सार्वजनिक रूप से पेश कर रहे हैं. ताकि सत्ता हस्तांतरण अधिक व्यवस्थित ढंग से हो सके.

दक्षिण कोरिया की राष्ट्रीय खुफिया सेवा (NIS) ने हाल ही में सांसदों को क्लोज डोर ब्रीफिंग में बताया कि किम जोंग उन की बेटी को उत्तराधिकारी-नामित चरण (successor-designate stage) में है. यह शब्दावली उत्तराधिकारी प्रशिक्षण से एक कदम आगे मानी जा रही है. दरअसल, आगामी लीडर वर्कर्स पार्टी कांग्रेस में यदि वह हजारों प्रतिनिधियों के सामने दिखाई देता हैं, तो इसे औपचारिक संकेत माना जा सकता है.

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किम जू ऐ पहली बार नवंबर 2022 में एक लंबी दूरी की मिसाइल परीक्षण के दौरान सार्वजनिक रूप से दिखीं थीं. उसके बाद से वह लगातार सैन्य परेड, हथियार परीक्षण, फैक्ट्री उद्घाटन और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यक्रमों में अपने पिता के साथ नजर आई हैं. इतना ही नहीं, पिछले साल सितंबर में वह अपने पिता के साथ बीजिंग भी गई थीं, जहां किम जोंग उन ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ शिखर सम्मेलन में भाग लिया था. एक किशोरी का इतने हाई-प्रोफाइल मिलिट्री और डिप्लोमेटिक इवेंट्स में शामिल होना सामान्य बात नहीं है.

दक्षिण कोरियाई अधिकारियों ने संदेह जताया था कि किम जू ए को उत्तराधिकारी चुना जा सकता है क्योंकि उत्तर कोरिया रूढ़िवादी समाज और पुरुष नेतृत्व वाला देश है.वहां की पित्रसत्तात्मक व्यवस्था में एक महिला का सर्वोच्च पद पर बैठना कल्पना से परे लगता है. लेकिन पिछले कुछ समय से सरकारी मीडिया में किम जू ए की बढ़ती उपस्थिति ने इन अधिकारियों को अपना आकलन बदलने पर मजबूर कर दिया है. अब यह माना जा रहा है कि जेंडर से ज्यादा ‘पैक्टू ब्लडलाइन’ (Paektu bloodline) यानी किम परिवार का खून मायने रखता है.

किम जू ए के राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें तब और तेज हो गईं जब पिछले महीने नए साल के मौके पर वह अपने माता-पिता के साथ ‘कुमसुसन पैलेस ऑफ द सन’ गईं. यह प्योंगयांग का वह पवित्र मकबरा है जहां किम जू ए के दादा और परदादा (देश के पहले और दूसरे शासक) के संरक्षित शव रखे गए हैं. विशेषज्ञों ने इस यात्रा को अब तक का सबसे स्पष्ट संकेत माना है कि उन्हें अपने 42 वर्षीय पिता के उत्तराधिकारी के रूप में पेश किया जा रहा है.

किम यो-जोंग अपनी तेज-तर्रार और जहरीली बयानबाजी के लिए मशहूर हैं. वह अक्सर अपने भाई और देश के बचाव में अमेरिका और दक्षिण कोरिया के खिलाफ आधिकारिक बयान जारी करती हैं. कूटनीतिक मोर्चे पर भी उनका अनुभव कम नहीं है. 2018 के विंटर ओलंपिक में वह दक्षिण कोरिया जाने वाली किम राजवंश की पहली सदस्य बनी थीं. इसके अलावा, वह अपने भाई के साथ अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई शिखर वार्ताओं में भी साये की तरह मौजूद रहीं. सितंबर 2021 से वह देश की सर्वोच्च कार्यकारी संस्था ‘स्टेट अफेयर्स कमीशन’ (SAC) की सदस्य भी हैं.

इस सत्ता संघर्ष में दूसरा और सबसे मजबूत नाम किम जोंग उन की छोटी बहन किम यो-जोंग का हैं. 38 साल की यो-जोंग को अक्सर उत्तर कोरिया में ‘दूसरा सबसे शक्तिशाली व्यक्ति’ कहा जाता है. वह अपने भाई की प्रमुख सलाहकार हैं. शासन की सार्वजनिक छवि (Public Image) और विदेश नीति की मुख्य वास्तुकार मानी जाती हैं. वह वर्कर्स पार्टी ऑफ कोरिया (WPK) के प्रचार और आंदोलन विभाग की उप निदेशक हैं. साल 2023 में सुंग-यून ली की बायोग्राफी में उन्हें दुनिया की सबसे खतरनाक महिला बताया गया था.

दक्षिण कोरिया के पूर्व राजदूत और सियोल की खुफिया सेवा के पूर्व उप निदेशक राह जोंग-यिल ने द टेलीग्राफ एजेंसी से बात करते हुए बताया कि किम जू ए को अपनी महत्वाकांक्षी और क्रूर बुआ किम यो-जोंग से कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है. उनका मानना है कि अगर किम जोंग उन की मृत्यु हो जाती है या वे अक्षम हो जाते हैं, तो यो-जोंग सत्ता हथियाने की योजना बना सकती हैं.

उत्तर कोरिया के राजवंश में सत्ता के लिए खून बहाना कोई नई बात नहीं है. यह परिवार अपने राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को खत्म करने में कभी संकोच नहीं करता, चाहे वह अपना सगा ही क्यों न हो. इसका सबसे बड़ा उदाहरण खुद किम जोंग उन ने पेश किया था. सत्ता संभालने के दो साल बाद ही, 2013 में उन्होंने अपने सगे फूफा और मेंटर जांग सोंग-थाएक को देशद्रोही करार देकर मरवा दिया था.

फिलहाल, किम जोंग उन अपनी बेटी को आगे बढ़ा रहे हैं. उसे सैन्य और नीतिगत मामलों में शामिल कर रहे हैं. खुफिया एजेंसी एनआईएस के मुताबिक, किम जोंग उन अब कुछ नीतिगत मामलों में अपनी बेटी की राय भी लेने लगे हैं. लेकिन किम यो-जोंग का अनुभव, पार्टी में उनकी पकड़ और उनकी महत्वाकांक्षा उन्हें एक स्वाभाविक दावेदार बनाती है. पैक्टू ब्लडलाइन की सीधी वंशज होने के कारण, अगर किम जोंग उन अचानक सत्ता से हटते हैं, तो यो-जोंग सबसे मजबूत विकल्प हो सकती हैं.

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