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North Korea ICBM : अमेरिका और उसके सहयोगी पहले से ही यूक्रेन और वेस्ट एशिया में उलझे हुए हैं. ऐसे में अगर नॉर्थ कोरिया के मिसाइल प्रोग्राम ने पूरी क्षमता हासिल कर ली, तो यह वाशिंगटन के लिए नया सिरदर्द बनेगा.
सियोल की सख्त वार्निंग: वाशिंगटन की छाती पर सवार होने को बेताब नॉर्थ कोरिया. (File Photo : Reuters)North Korea ICBM: नॉर्थ कोरिया का तानाशाह किम जोंग-उन सीधे अमेरिका तक मार करने की ताकत चाहता है. ताजा खुलासों ने साफ कर दिया है कि प्योंगयांग अब ऐसे इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) बनाने के अंतिम चरण में है, जो सीधे अमेरिका तक वार कर सकती हैं. सियोल से आई चेतावनी ने वाइट हाउस और ट्रंप प्रशासन की नींद उड़ा दी है. दक्षिण कोरिया के यूनिफिकेशन मंत्री चुंग डोंग-यंग ने खुलासा किया कि नॉर्थ कोरिया चार यूरेनियम एनरिचमेंट फैसिलिटी चला रहा है. इनमें सबसे चर्चित योंगब्योन प्लांट भी शामिल है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यहां हर रोज़ सेंट्रीफ्यूज मशीनें चल रही हैं और 2000 किलोग्राम तक हाईली एनरिच्ड यूरेनियम जमा हो चुका है. इतनी मात्रा से दर्जनों न्यूक्लियर हथियार तैयार हो सकते हैं.
पिछले साल नॉर्थ कोरिया ने ह्वासोंग-19 नाम का ICBM टेस्ट किया था, जो धरती के वायुमंडल से बाहर तक गया. माना जा रहा है कि यह मिसाइल अमेरिका के किसी भी हिस्से को टारगेट कर सकती है. अब चुनौती बस ‘री-एंट्री टेक्नोलॉजी’ की है, यानी वायुमंडल में दोबारा प्रवेश के वक्त मिसाइल को सुरक्षित रखना. सियोल का कहना है कि किम इस टेक्नोलॉजी के भी बेहद करीब है.
ट्रंप ही हैं किम के लिए ‘सिंगल नेगोशिएटर’
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे मयुंग ने न्यूयॉर्क में कहा कि किम जोंग-उन अभी भी ट्रंप को ही एकमात्र बातचीत का पार्टनर मानते हैं. खुद किम ने हाल ही में कहा था कि वो केवल ट्रंप से ही बात करेंगे, लेकिन शर्त ये होगी कि अमेरिका ‘डी-न्यूक्लियराइजेशन’ की मांग छोड़ दे. यह साफ इशारा है कि प्योंगयांग न्यूक्लियर हथियारों को कभी भी बातचीत की मेज पर रखने के लिए तैयार नहीं है.
क्यों खतरनाक है नॉर्थ कोरिया का न्यूक्लियर जखीरा
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने 2018 में अनुमान लगाया था कि नॉर्थ कोरिया के पास पहले ही 25–30 न्यूक्लियर डिवाइस बनाने लायक यूरेनियम है. अब सियोल की ताजा रिपोर्ट बताती है कि स्टॉकपाइल कहीं बड़ा हो चुका है. कुछ एक्सपर्ट्स का दावा है कि प्योंगयांग के पास 100 से ज्यादा न्यूक्लियर हथियार हो सकते हैं.
यूरेनियम एनरिचमेंट प्लांट छोटे और सीक्रेट लोकेशन पर भी चलाए जा सकते हैं. यही वजह है कि नॉर्थ के पास कितने गुप्त प्लांट हैं, इसका पता लगाना तकरीबन नामुमकिन है.
2019 के बाद से डिप्लोमेसी ठप
2019 में किम और ट्रंप के बीच हाई-प्रोफाइल समिट्स हुईं, लेकिन कोई डील नहीं हो सकी. किम ने योंगब्योन प्लांट बंद करने का ऑफर दिया था, लेकिन इसके बदले उन्होंने बड़े पैमाने पर प्रतिबंध हटाने की मांग की. अमेरिका ने इसे रिजेक्ट कर दिया. तब से बातचीत पूरी तरह ठप है और नॉर्थ कोरिया लगातार अपना न्यूक्लियर आर्सेनल बढ़ा रहा है.

Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak’s journey began with print media and soon transitioned towards digital. He…और पढ़ें
Deepak Verma is a journalist currently employed as Deputy News Editor in News18 Hindi (Digital). Born and brought up in Lucknow, Deepak’s journey began with print media and soon transitioned towards digital. He… और पढ़ें
September 26, 2025, 16:16 IST





