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List of Nobel Prize Winners: किन तीन अमेरिकी वैज्ञानिकों को मिला नोबेल पुरस्‍कार, दुनिया को दिया बड़ा तोहफा!

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Nobel prize winners 2025: अमेरिका के तीन वैज्ञानिको को फ‍िजिक्‍स का नोबेल पुरस्‍कार दिया गया है. इन तीनों वैज्ञानिकों ने अपने रिसर्च से दुनिया को बड़ा तोहफा दिया है जिसकी वजह से इन्‍हें नोबेल पुरस्‍कार मिला है.

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किन तीन अमेरिकी वैज्ञानिकों को मिला नोबेल पुरस्‍कार, दुनिया को दिया बड़ा तोहफाList of Nobel Prize Winners in Physics, Nobel Prize: फ‍िजिक्‍स में किसे मिला नोबेल पुरस्‍कार?

Nobel Prize winners 2025: आज स्टॉकहोम में रॉयल स्वीडिश एकेडमी ऑफ साइंसेज ने फिजिक्स का नोबेल पुरस्कार घोषित कर दिया.यह पुरस्‍कार अमेरिका के तीन वैज्ञानिक- जॉन क्लार्क, मिशेल एच.डेवोरेट और जॉन एम. मार्टिनिस. ये पुरस्कार उन्हें ‘मैक्रोस्कोपिक क्वांटम मैकेनिकल टनलिंग और इलेक्ट्रिक सर्किट में एनर्जी क्वांटाइजेशन की खोज’ के लिए मिला है. आसान शब्दों में कहें तो इन वैज्ञानिकों ने साबित किया कि क्वांटम की वो अजीबोगरीब दुनिया जो पहले सिर्फ छोटे कणों तक सीमित समझी जाती थी वो बड़े सर्किट्स में भी काम करती है. इससे क्वांटम कंप्यूटर्स, सुपर-सिक्योर क्रिप्टोग्राफी और सेंसर्स जैसे फ्यूचर टेक्नोलॉजी के दरवाजे खुल गए. पुरस्कार में 11 मिलियन स्वीडिश क्रोन (करीब 1.2 मिलियन डॉलर) भी दिया जाएगा.

John Clarke: कैम्ब्रिज में पैदा हुए जॉन क्लार्क

सबसे पहले चर्चा ब्रिटेन के जन्मे जॉन क्लार्क की.जॉन क्लार्क 1942 में कैम्ब्रिज में पैदा हुए. उन्होंने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से 1968 में पीएचडी की और अब यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, बर्कले में प्रोफेसर हैं. 1980 में उन्होंने सुपरकंडक्टर्स से बने इलेक्ट्रॉनिक सर्किट्स पर एक्सपेरिमेंट्स किए जहां जोसेफसन जंक्शन (एक पतली इंसुलेटिंग लेयर से जुड़े सुपरकंडक्टर्स) का इस्तेमाल करके क्वांटम टनलिंग को मैक्रो लेवल पर दिखाया. क्लार्क ने कहा कि उनका ये काम क्वांटम कंप्यूटिंग की बुनियाद है और इसी वजह से आज के सेलफोन भी काम करते हैं. बर्कले की लैब में उन्होंने डेवोरेट और मार्टिनिस के साथ मिलकर वो एक्सपेरिमेंट्स किए, जो क्वांटम को ‘हाथ में पकड़ने लायक’ बना दिए.

Michel Devoret: पेरिस में जन्‍में मिशेल एच.डेवोरेट?

अब बात फ्रेंच वैज्ञानिक मिशेल डेवोरेट की. मिशेल का जन्‍म 1953 में पेरिस में हुआ. 1982 में पेरिस-सुड यूनिवर्सिटी से पीएचडी करने के बाद वह पोस्टडॉक के तौर पर क्लार्क की टीम में शामिल हुए. आज वह येल यूनिवर्सिटी और यूसी सांता बारबरा से जुड़े हैं. डेवोरेट का कमाल ‘सर्किट QED’ में रहा. जहां सुपरकंडक्टिंग सर्किट्स में क्वांटम व्यवहार को कंट्रोल किया. पहले ही उन्हें जॉन बेल पुरस्कार जैसे सम्मान मिल चुके हैं. 1984-85 के एक्सपेरिमेंट्स में उन्होंने दिखाया कि क्वांटम टनलिंग बड़े सर्किट्स में भी हो सकती है, जो क्वांटम इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी को बूस्ट देगा.

John Martinis: कौन हैं जॉन एम.मार्टिनिस?

तीसरे हीरो हैं जॉन मार्टिनिस.वह अमेरिकी वैज्ञानिक हैं.जॉन मार्टिनिस का जन्‍म 1958 में हुआ था.वह यूसी सांता बारबरा के प्रोफेसर हैं. क्लार्क की टीम में पीएचडी स्टूडेंट के तौर पर शामिल हुए और इलेक्ट्रिक सर्किट्स में एनर्जी क्वांटाइजेशन पर फोकस किया. उनके शोध ने क्वांटम सेंसिंग और सुपरकंडक्टिव टेक्नोलॉजी को नई दिशा दी. मार्टिनिस का योगदान वह था जो क्वांटम को प्रैक्टिकल बनाता है.

तीनों ने कैसे किया रिसर्च?

ये तीनों 1984-85 में बर्कले की लैब में सुपरकंडक्टर्स और जोसेफसन जंक्शन से बने सर्किट्स पर एक साथ एक्सपेरिमेंट्स कर रहे थे.पहले क्वांटम सिर्फ छोटे कणों (इलेक्ट्रॉन्स) की बात थी, लेकिन इन्होंने दिखा दिया कि बड़े सिस्टम्स (जो हाथ में पकड़ सकें) में भी ये काम करता है. नोबेल कमिटी के मुताबिक ये खोज क्वांटम कंप्यूटिंग, क्रिप्टो और सेंसर्स के लिए गेम-चेंजर है. पुरस्कार 10 दिसंबर को
दिया जाएगा.

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Dhiraj Raiअसिस्टेंट एडिटर

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. करीब 13 वर्ष से अधिक समय से मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व डिजिटल संस्करण के अलावा कई अन्य संस्थानों में कार्य…और पढ़ें

न्यूज़18 हिंदी (Network 18) डिजिटल में असिस्टेंट एडिटर के तौर पर कार्यरत. करीब 13 वर्ष से अधिक समय से मीडिया में सक्रिय. हिन्दुस्तान, दैनिक भास्कर के प्रिंट व डिजिटल संस्करण के अलावा कई अन्य संस्थानों में कार्य… और पढ़ें

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