एडवांस टिकट की बुकिंग 60 दिन पहले होती है. ठीक 60 दिन पहले सुबह 8 बजे ऑफलाइन और ऑनलाइन टिकटों की बुकिंग शुरू होती है. साइट खुलते ही ट्रेनों में कंफर्म सीटें दिखती हैं, यह देखकर लोग झट से पेमेंट कर देते हैं. लेकिन जब टिकट बनकर सामने आता है तो वेटिंग होता है.
अमित ( बदला हुआ नाम) ने 2 सितंबर की सुबह कंफर्म सीट देखकर साइट खुलते ही पैसेंजर की डिटेल भर दी और दो मिनट के अंदर यानी 8.02 पेमेंट भी कर दिया. यह सोचकर मन ही मन खुश होने लगे कि अब तो कंफर्म टिकट मिल ही जाएगा. लेकिन टिकट बनने में थोड़ा समय लगा. यह देख थोड़ी धड़कन भी बढ़ गयी कि पेमेंट तो हो गया,पर टिकट में समय क्यों लगा रहा है. लेकिन चार मिनट बाद यानी 8.06 मिनट पर टिकट मिला. लेकिन टिकट देखकर वो परेशान हो गए. क्योंकि वेटिंग था. उनकी समझ में नहीं आया कि जब पेमेंट समय पर हो गया तो टिकट बनने में इतना समय क्यों लगा. यह मामला केवल अमित का नहीं है, रोजाना हजारों यात्री इसी तरह की समस्या से रूबरू हो रहे हैं.
लोगों का कहना है कि साइट खुलते ही शुरुआती 5 से 10 मिनट तक यह समस्या रहती है. पहले तो पेमेंट होने में काफी समय लग जाता है और इस दौरान सीटें फुल हो जाती हैं. अगर आपका पेमेंट भी तुरंत हो गया तो टिकट बनने में इतना समय लगता है कि वेटिंग टिकट मिलती हैं. सवाल यह उठता है कि पैसा तभी कटता है, पैसेंजर की सारी डिटेल भरकर ओके करते हैं. यह आईआरसीटीसी के सर्वर में होता है. तो टिकट बनने में भले ही समय लगे लेकिन पैसेंजर को कंफर्म टिकट क्यों नहीं मिलता है?

60 दिन पहले होती है टिकटों की बुकिंग.
हाल की खबरों के अनुसार फेस्टिवल सीजन के टिकटों की कालाबाजारी खूब हुई है. दलाल ब्लैक टाइगर, रियल मांगो और एन्कस बैक जैसे अवैध सॉफ्टवेयर का उपयोग कर टिकट बुक कर लेते हैं. ये सॉफ्टवेयर इतने तेजी से काम करते हैं कि टिकट बुकिंग शुरू होने के महज 50 सेकेंड में 85 फीसदी कंफर्म टिकट बुक लेते हैं और आम लोगों के लिए केवल 15 फीसदी कंफर्म टिकट ही बचते हैं.
टिकटों की कालाबाजारी छठ और दिवाली के आसपास खूब होती है. इस दौरान दिल्ली, पंजाब, महाराष्ट्र, गुजरात से बिहार और उत्तर प्रदेश के कई शहरों के लिए कंफर्म टिकटों की भारी मांग होती है. दलाल इन टिकटों को 250 रुपये से लेकर 4,000 रुपये तक की अतिरिक्त कीमत पर बेचते हैं. यह कीमत मांग पर निर्भर करती है.

लोगों ने कहा-दलाल अतिरिक्त पैसे लेकर दिला देते हैं कंफर्म सीट.
इस संबंध में रेलवे बोर्ड के एग्जक्यूटिव डायरेक्टर इनफार्मेशन एंड पब्लिसिटी दिलीप कुमार के अनुसार रेलवे ने फेस्टिवल सीजन में मांग को देखते हुए रेलवे ने 13000 से अधिक ट्रेनें बिहार और उत्तर प्रदेश की ओर चला रहा है. वहीं, आम लोगों को ही टिकट मिले, इसके लिए आरपीएफ लगातार दलालों पर कार्रवाई कर रहा है. पूर्व में ऐसे साफ्टवेयर को निष्क्रिय कर कई लोगों की गिरफ्तारी की गयी है.
आईआरसीटीसी के कॉरपोरेट एंड कम्यूनिकेशन के जीएम अनिल कुमार गुप्ता का कहना है कि त्यौहारी सीजन में घर जाने के लिए एक साथ सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना अधिक लोग टिकट बुक करते हैं. इस वजह से पेमेंट में या टिकट बनने में समय लग सकता है. आईआरसीटीसी के सर्वर की क्षमता पहले की तुलना में बढ़ी है. इसका परिणाम है दिवाली के लिए रिकार्ड 24 घंटे में 18.74 लाख टिकट बुकिंग हुई है. इसलिए सर्वर या साफ्टवेयर में किसी भी तरह की कोई कमी नहीं है. आधार लिंक शुरू होने के बाद से आईआरसीटीसी के अधिकृत एजेंट को सुबह 8 बजे और तत्काल के शुरुआती समय में बुकिंग का अधिकार नहीं हेाता है. इसलिए जो टिकट बुक हो रहे हैं तो आम जनता के हैं.





