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India Singapore relations| Singapore pm visit: 60 साल पुराना है भारत-सिंगापुर का याराना: कैसे शुरू हुआ रिश्‍ता और क्या-क्या हुआ?

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India-Singapore: सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग 2 सितंबर 2025 से भारत की तीन दिन की यात्रा पर हैं. ये यात्रा खास है क्योंकि इस साल भारत और सिंगापुर के बीच राजनयिक रिश्तों को 60 साल पूरे हो रहे हैं. इस मौके पर दोनों देशों के बीच आर्थिक,रक्षा और सांस्कृतिक रिश्तों को और मजबूत करने की बात हो रही है. आइए जानते हैं कि ये रिश्ता कब शुरू हुआ,अब तक क्या-क्या हुआ और इस बार की यात्रा में क्या खास है?

India Singapore relations: कब और कैसे शुरू हुआ रिश्ता?

भारत और सिंगापुर का रिश्ता 24 अगस्त 1965 को शुरू हुआ जब सिंगापुर को आजादी मिली और भारत उन पहले देशों में था जिसने इसे मान्यता दी. उस समय सिंगापुर को चीन समर्थित कम्युनिस्ट खतरों और पड़ोसी देशों के दबाव का डर था.उस समय भारत को एक मजबूत साझेदार के रूप में देखा गया, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार में मदद कर सकता था.1819 में जब ब्रिटिश अधिकारी सर स्टैमफोर्ड रैफल्स ने सिंगापुर में व्यापारिक केंद्र बनाया तब से भारत के साथ व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते शुरू हो गए थे. उस समय सिंगापुर कोलकाता से शासित होता था और ये रिश्ता ब्रिटिश काल तक चला. 1943 में सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर से आजाद हिंद फौज का गठन किया जो भारत की आजादी की लड़ाई में अहम कदम था.

60 साल में क्या-क्या हुआ?

पिछले 60 सालों में भारत और सिंगापुर के रिश्ते ने कई ऊंचाइयां छुईं. 2005 में दोनों देशों ने कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक कोऑपरेशन एग्रीमेंट (CECA) साइन किया जो भारत का किसी भी देश के साथ पहला ऐसा समझौता था. इससे व्यापार और निवेश को बड़ा बढ़ावा मिला. 2015 में रिश्ते को स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप का दर्जा दिया गया और 2024 में इसे कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप तक बढ़ाया गया.सिंगापुर भारत का सबसे बड़ा निवेशक है. 2000 से सितंबर 2024 तक सिंगापुर से भारत में 167.47 अरब डॉलर का निवेश आया जो भारत में कुल FDI का 24% है.2023-24 में दोनों देशों के बीच व्यापार 35.6 अरब डॉलर का रहा. सिंगापुर भारत का ASEAN में सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है.सिंगापुर की कंपनियां भारत में स्मार्ट सिटी, हवाई अड्डों और इंडस्ट्रियल पार्क जैसे प्रोजेक्ट्स में हिस्सा ले रही हैं.

रक्षा और सुरक्षा में भी साथ-साथ

दोनों देश SIMBEX (नौसेना) और अग्नि वॉरियर (सेना) जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं.2017 में नौसेना सहयोग समझौता हुआ जिसके तहत दोनों देशों की नौसेनाएं एक-दूसरे के बेस पर रिफ्यूलिंग और सप्लाई ले सकती हैं.दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और शांति के लिए मिलकर काम करते हैं.

9% आबादी भारतीय

सिंगापुर में 9% आबादी भारतीय मूल की है जो वहां की संस्कृति और अर्थव्यवस्था में बड़ा योगदान देती है.2024 में थिरुवल्लुवर सांस्कृतिक केंद्र सिंगापुर में खोलने की घोषणा हुई.ISRO ने सिंगापुर के कई सैटेलाइट्स लॉन्च किए.2011 में पहला स्वदेशी माइक्रो-सैटेलाइट यहीं से लॉन्‍च किया गया.UPI-PayNow लिंकेज और RuPay कार्ड की स्वीकृति से दोनों देशों के बीच डिजिटल ट्रांजेक्शन आसान हुआ.

लॉरेंस वोंग की भारत यात्रा: क्या है खास?

सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग 2-4 सितंबर 2025 तक भारत में हैं. ये उनकी पहली भारत यात्रा है और वो अपनी पत्नी और एक हाई-लेवल डेलिगेशन के साथ आए हैं. इस दौरान कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. इसके तहत नौवहन,नागरिक उड्डयन,अंतरिक्ष,डिजिटल टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में नए समझौते होंगे.4 सितंबर को सिंगापुर के पीएम वोंग और पीएम नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में एक कंटेनर टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे. इस प्रोजेक्ट में सिंगापुर की पोर्ट अथॉरिटी ने 1 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है.वोंग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू,विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य मंत्रियों से मिलेंगे. क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होगी.

60 साल का जश्न

इस साल दोनों देश 60वीं सालगिरह मना रहे हैं. जनवरी 2025 में सिंगापुर के राष्ट्रपति थरमन शनमुगरत्नम ने भारत का दौरा किया था जहां दोनों देशों ने एक खास लोगो लॉन्च किया जिसमें भारत का कमल और सिंगापुर का ऑर्किड शामिल था. ये लोगो दोनों देशों की दोस्ती और साझा मूल्यों को दर्शाता है.

क्यों खास है ये रिश्ता?

सिंगापुर भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का अहम हिस्सा है.ये भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत बनाता है.सिंगापुर भारत के लिए ASEAN में एक गेटवे की तरह है. दोनों देश G20, कॉमनवेल्थ और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन जैसे मंचों पर साथ काम करते हैं.

अब आगे क्या होगा?

वोंग की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच नई तकनीक, हरित ऊर्जा, और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में सहयोग बढ़ेगा.सिंगापुर की कंपनियां भारत में और निवेश करेंगी और भारत की कंपनियां सिंगापुर को अपने ग्लोबल ऑपरेशंस का हब बनाएंगी.ये रिश्ता न सिर्फ आर्थिक,बल्कि सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से भी और मजबूत होगा.

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