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India Japan Relations : अमेरिका को बाय-बाय… भारत खेलने लगा पत्‍ते, एनर्जी पर अब सिर्फ भरोसेमंद दोस्तों से कर रहा डील

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एक तरफ अमेरिका से बढ़ती दूरियां, दूसरी तरफ रूस-चीन का नया गठजोड़. इन हालात में भारत ने जापान जैसे भरोसेमंद दोस्त के साथ मिलकर दिखा दिया कि वह किसी ब्लॉक का पिछलग्गू नहीं बनेगा. एनर्जी सिक्‍योरिटी और टेक्नोलॉजी …और पढ़ें

अमेरिका को बाय-बाय... एनर्जी पर अब सिर्फ भरोसेमंद दोस्तों से डील कर रहा भारतप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा (Photo-PTI)
दुनिया की राजनीति इस समय एक बड़े मोड़ पर खड़ी है. अमेरिका की एकतरफा नीतियां, चीन की आक्रामक विदेश रणनीति और रूस की वापसी, इन तीनों ने मिलकर वर्ल्ड ऑर्डर को नया आकार देना शुरू कर दिया है. इसी बीच भारत भी अपने कार्ड नए अंदाज में खेल रहा है. भारत और जापान के बीच हुई ‘इंडिया-जापान एनर्जी डायलॉग’ इसका ताजा उदाहरण है. इस डायलॉग में दोनों देशों ने कार्बन कैप्चर, ग्रीन केमिकल्स, बायोफ्यूल्स, क्लीन हाइड्रोजन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजीज पर मिलकर काम करने का समझौता किया. सुनने में यह महज एक तकनीकी करार लगता है, लेकिन इसकी राजनीतिक और रणनीतिक गूंज काफी दूर तक जाती है.

पिछले एक दशक से भारत ने अमेरिका के साथ गहरी सामरिक साझेदारी की थी. डिफेंस एग्रीमेंट्स, 2+2 डायलॉग, क्वाड और इंडो-पैसिफिक स्ट्रेटेजी, ये सब वॉशिंगटन और दिल्ली के बीच भरोसे का माहौल बनाने के प्रतीक थे. मगर हाल के दिनों में कई मसलों पर रिश्तों में खिंचाव साफ दिख रहा है. ट्रंप के टैर‍िफ ने सारा गेम पलट दिया है. इसके बाद भारत ने अपनी रणनीति बदलनी शुरू कर दी है. भारत अब पड़ोस‍ियों और भरोसेमंद दोस्‍तों से नजदीकी बढ़ा रहा है. एनर्जी सिक्‍योरिटी और टेक्नोलॉजी ट्रांजिशन जैसे अहम मामलों में अमेरिका पर निर्भर रहने की बजाय भरोसेमंद दोस्तों यानी जापान, रूस और यूरोपिय देशों से सीधा सहयोग बढ़ा रहा है.

5.95 लाख करोड़ इन्‍वेस्‍टमेंट 
पीएम मोदी 30 अगस्‍त को जापान जाने वाले हैं, जहां उनकी जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा से मुलाकात होने वाली है. कहा जा रहा है क‍ि इस दौरान जापान की ओर से भारत में करीब 5.95 लाख करोड़ रुपये के इन्‍वेस्‍टमेंट की घोषणा की जा सकती है, जो अगले एक दशक में किया जा सकता है. यह दोनों देशों के बेहतर होते रिश्तों का एक सबूत है.

जापान क्यों अहम?

  • भारत के लिए जापान सिर्फ टेक्नोलॉजी का सोर्स नहीं है, बल्कि यह साझेदारी राजनीतिक संदेश भी देती है.
  • चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच जापान वही देश है जो भारत के साथ मिलकर इंडो-पैसिफिक में बैलेंस बना सकता है.
  • कार्बन कैप्चर से लेकर क्लीन हाइड्रोजन तक, जापान इस समय दुनिया की अग्रणी टेक्नोलॉजी लेकर चल रहा है.
  • जापान लंबे समय से भारत के इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर प्रोजेक्‍ट में सबसे बड़ा इन्‍वेस्‍टर है. दिल्ली मेट्रो, मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन ये सिर्फ दो उदाहरण हैं.
  • अमेरिका की तरह अचानक पाबंदियां लगाने या शर्तें थोपने की आदत जापान में नहीं है. यही वजह है कि भारत-जापान डील्स अपेक्षाकृत स्थिर रहती हैं.
क्या तय हुआ बैठक में?

मंत्रीस्तरीय बैठक में भारत और जापान ने मिलकर कुछ ठोस क्षेत्रों की पहचान की है. कार्बन कैप्चर, यूटिलाइजेशन एंड स्टोरेज, ग्रीन केमिकल्स और बायोफ्यूल्स, क्लीन हाइड्रोजन और अमोनिया प्रोजेक्ट्स, रिन्यूएबल एनर्जी का विस्तार और एनर्जी एफिशिएंसी प्रोग्राम्स पर मिलकर काम करेंगे.

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