जयशंकर ने दो-दिवसीय यात्रा पर दिल्ली पहुंचने के तुरंत बाद चीनी विदेश मंत्री के साथ व्यापक वार्ता की. वांग की यह यात्रा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के वार्षिक शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए चीन की प्रस्तावित यात्रा से कुछ दिन पहले हो रही है. साल 2020 में गलवान घाटी में घातक संघर्ष के बाद भारत-चीन के रिश्तों में गंभीर तनाव आ गया था. इसके मद्देनजर चीनी विदेश मंत्री की यात्रा को मोटे तौर पर दोनों पड़ोसी देशों द्वारा संबंधों के सुधारने के प्रयासों के हिस्से के रूप में देखा जा रहा है.

अपनी टिप्पणी में जयशंकर ने आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को एक अन्य ‘प्रमुख प्राथमिकता’ बताया तथा उन ‘विशेष चिंताओं’ का भी जिक्र किया, जिन्हें उन्होंने पिछले महीने बीजिंग यात्रा के दौरान उठाया था. उन्होंने कहा, “हमारे संबंधों में एक कठिन दौर देखने के बाद, अब दोनों देश आगे बढ़ना चाहते हैं. इसके लिए दोनों पक्षों की ओर से एक स्पष्ट और रचनात्मक दृष्टिकोण की आवश्यकता है.”

विदेश मंत्री ने अंतरराष्ट्रीय स्थिति पर भी चर्चा के पर्याप्त संकेत दिए. उन्होंने कहा, “हम एक निष्पक्ष, संतुलित और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था चाहते हैं, जिसमें बहुध्रुवीय एशिया भी शामिल हो. सुधारात्मक बहुपक्षवाद भी आज की आवश्यकता है. वर्तमान परिवेश में वैश्विक अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनाए रखना और उसे बढ़ाना भी स्पष्ट रूप से आवश्यक है.”

उन्होंने कहा, “आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के विरुद्ध लड़ाई हमारी एक और प्रमुख प्राथमिकता है. मैं विचारों के आदान-प्रदान की आशा करता हूं.” जयशंकर ने कहा कि भारत को उम्मीद है कि यह चर्चा भारत और चीन के बीच एक स्थिर, सहयोगात्मक और दूरदर्शी संबंध बनाने में योगदान देगी- ‘जो हमारे हितों की पूर्ति करेगा और हमारी चिंताओं का समाधान करेगा’.





