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History of Indian Flag: हमारे राष्ट्रीय ध्वज को अस्तित्व में आने में 36 साल का लंबा वक्त लगा था. इसे बनाने की शुरुआत 1921 में की गई थी. इसे स्वतंत्रता सेनानी पिंगली वेंकैया ने डिजाइन किया था. बाद में इसमें बदला…और पढ़ें
22 जुलाई 1947 को संविधान सभा ने ध्वज को अपनाया.कौन थे राष्ट्रीय ध्वज के डिजाइनर पिंगली
आंध्र प्रदेश के एक गांव से ताल्लुक रखने वाले पिंगली वेंकैया बचपन में एक स्वतंत्रता सेनानी और असाधारण रूप से मेधावी छात्र थे. उन्होंने मद्रास में हाई स्कूल की पढ़ाई पूरी की और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई करने के लिए विदेश चले गए. एक सच्चे विद्वान होने के नाते उन्हें भूविज्ञान, शिक्षा, कृषि और भाषाओं में रुचि थी. दक्षिण अफ्रीका में जब वह एंग्लो बोअर युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में सेवारत थे, तब उनकी मुलाकात महात्मा गांधी से हुई. पिंगली गांधी के सिद्धांतों से जुड़े और उनके साथ एक ऐसा रिश्ता बना जो 50 से भी ज्यादा वर्षों तक चला.
ब्रिटिश सैनिक के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें ब्रिटिश ध्वज यूनियन जैक को सलामी देनी पड़ी. जिससे उनकी देशभक्ति की भावनाएं गहराई से आहत हुईं. गांधीजी से बातचीत के बाद उन्हें एक नया विचार आया और वह स्वतंत्रता संग्राम में समर्पित होना चाहते थे. भारत लौटने पर उन्होंने अपना समय एक ऐसे भारतीय ध्वज के निर्माण में समर्पित कर दिया जो पूरे राष्ट्र को एक सूत्र में पिरो सके और सभी समुदायों को उससे जोड़ सके. उन्होंने 1916 में झंडों पर एक पुस्तिका भी प्रकाशित की, जिसमें चौबीस झंडों के डिजाइन शामिल थे.
1907: राष्ट्रीय ध्वज थोड़े-बहुत बदलावों के साथ वैसा ही बना हुआ है. मैडम बीकाजी कामा ने जर्मनी के स्टटगार्ट में अंतरराष्ट्रीय समाजवादी कांग्रेस में दूसरा राष्ट्रीय ध्वज फहराया था, जो दमनकारी ब्रिटिश शासन के विरुद्ध भारतीय स्वायत्तता और स्वतंत्रता के लिए समर्थन की अपील थी. बर्लिन समिति ध्वज के रूप में भी जाना जाने वाला दूसरे राष्ट्रीय ध्वज की ऊपरी रंग की पट्टी हरे से नारंगी और कमल से तारे में बदल गई. निचली रंग की पट्टी लाल से हरे रंग में बदल गई, जिसके कोनों पर सूर्य, अर्धचंद्र और तारा बना हुआ था.
1931: पिंगली वेंकैया द्वारा निर्मित इसी ध्वज में थोड़े-बहुत बदलाव किए गए थे. अब यह वर्तमान राष्ट्रीय ध्वज से काफी मिलता-जुलता दिखता था. धर्म चक्र के स्थान पर पिंगली के दूसरे ध्वज-रूप में बीच में एक चलता हुआ चक्र अंकित था.
New Delhi,Delhi
August 15, 2025, 13:09 IST





