अदालत ने कथित तौर पर गोविंदा को 25 मई को समन भेजा था, लेकिन अभिनेता किसी भी कार्यवाही में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए, जिससे कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. जबकि सुनीता जून 2025 से सुनवाई और अदालत की हर कार्रवाई के दौरान मौजूद रही हैं.
नेट वर्थ: लगभग ₹150–170 करोड़ तक आंका गया है. इसमें ₹16 करोड़ से अधिक मूल्य का जूहु का बंगला ‘जल दर्शन’ और साथ ही मुंबई (रुइया पार्क, मड आइलैंड), कोलकाता, रैगड़ एवं लखनऊ में फार्महाउस/फ्लैट्स शामिल हैं.
गोविंदा–सुनिता आहूजा तलाक में कितना पैसा देना होगा
अदालत या कानून में कोई तयशुदा रकम नहीं होती. तलाक की स्थिति में पत्नी को भरण-पोषण का अधिकार है, जो कई कारकों पर निर्भर करता है.
– पत्नी की आर्थिक स्थिति (कमाई, नौकरी, संपत्ति)
– शादी की अवधि (गोविंदा–सुनिता की शादी 1987 से है, यानी बहुत लंबी अवधि)
– जीवन स्तर जो विवाह के दौरान था.
– बच्चों/परिवार की जिम्मेदारी
अगर पुराने अदालत के फैसले देखे तो आमतौर पर अदालतें पति की नेट इनकम का 25% तक पत्नी को स्थायी भरण-पोषण के रूप में तय कर सकती हैं. अगर पत्नी की भी अच्छी आय है तो राशि कम हो सकती है. इसलिए गोविंदा को तलाक देने पर कितना पैसा देना होगा, यह अदालत तय करेगी और यह उनकी संपत्ति और कमाई पर निर्भर करेगा. वैसे कानून के जानकारों की माने तो 25 प्रतिशत के हिसाब से गोविंद को तकरीबन 35 से 40 करोड़ रुपये अपनी पत्नी को देने पड़ सकते हैं.
– 13 (1) (i) – व्यभिचार (Adultery)
यदि पति/पत्नी विवाह के बाद किसी अन्य के साथ शारीरिक संबंध रखते हैं, तो दूसरा पक्ष तलाक की अर्जी दे सकता है.
– 13 (1) (ia) – क्रूरता (Cruelty)
यदि पति या पत्नी मानसिक या शारीरिक रूप से क्रूर व्यवहार करते हैं, तो यह तलाक का आधार है.
यदि पति/पत्नी कम से कम 2 साल से बिना उचित कारण के साथ छोड़कर अलग रहते हैं, तो दूसरा पक्ष तलाक की मांग कर सकता है.
क्या है तलाक लेने की प्रक्रिया?
– अस्थायी भरण-पोषण: केस चलने के दौरान पत्नी को हर महीने खर्च मिलता है.
– स्थायी भरण-पोषण: तलाक डिक्री के समय एकमुश्त या नियमित रकम तय होती है.





