Global Risk Alert; Doomsday Clock 2026: दुनिया पर कई तरह का खतरा मंडरा रहा है. रूस युक्रेन युद्ध जारी है साथ ही ईरान-अमेरिका संग नए युद्ध की तैयारी भी हो रही है. लेकिन हम जिस विनाश की बात करने जा रहे हैं वो अलग है. दरअसल ‘डूम्सडे क्लॉक’ को अब आधी रात यानी वैश्विक तबाही से सिर्फ 85 सेकंड पहले पर सेट कर दिया गया है. यह अब तक की सबसे खतरनाक स्थिति है. 1947 में शुरू हुई इस प्रतीकात्मक घड़ी ने पहले कभी इतना डरावना संकेत नहीं दिया था. परमाणु युद्ध का खतरा, जलवायु संकट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बेकाबू इस्तेमाल और वैश्विक सहयोग की कमी… ये सभी कारण मिलकर इंसानियत के भविष्य पर सवाल खड़े कर रहे हैं. यही वजह है कि इस नई चेतावनी ने पूरी दुनिया की धड़कनें बढ़ा दी हैं.
पिछले साल यह घड़ी 89 सेकंड पर थी लेकिन अब इसे चार सेकंड और आगे बढ़ा दिया गया है. सुनने में यह फर्क मामूली लग सकता है, लेकिन वैज्ञानिकों के लिए यह बेहद गंभीर संकेत है. इसका मतलब साफ है कि दुनिया पहले से ज्यादा अस्थिर, ज्यादा खतरनाक और ज्यादा अनिश्चित हो चुकी है. ‘डूम्सडे क्लॉक’ कोई भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि यह एक चेतावनी है. एक ऐसा अलार्म, जो बताता है कि अगर मौजूदा हालात नहीं बदले, तो विनाश का रास्ता बहुत छोटा रह जाएगा.

(फोटो Reuters)
- साइंस एंड सिक्योरिटी बोर्ड के मुताबिक दुनिया इस समय कई मोर्चों पर एक साथ खतरे झेल रही है. यूक्रेन और मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्धों ने परमाणु टकराव का जोखिम बढ़ा दिया है. परमाणु हथियारों पर नियंत्रण की कोशिशें कमजोर पड़ रही हैं. जलवायु परिवर्तन पर ठोस कार्रवाई नहीं हो पा रही. AI का मिलिट्री और इंफॉर्मेशन वॉर में इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है.
- परमाणु हथियारों की होड़ और नई तकनीक, यूक्रेन और पश्चिम एशिया में लगातार युद्ध. जलवायु लक्ष्यों पर देशों की विफलता. AI से फेक न्यूज और गलत सूचना का फैलाव और जैविक खतरों पर वैश्विक समझौते की कमी. ये वैसे फैक्ट हैं जो वैश्विक खतरे जो सबसे ज्यादा चिंता बढ़ा रहे हैं.
वैज्ञानिकों की चेतावनी क्या कहती है?
- परमाणु हथियारों की संख्या कम करने के लिए तुरंत समझौते जरूरी हैं.
- AI के सैन्य उपयोग पर अंतरराष्ट्रीय नियम बनाए जाएं.
- जैविक खतरों से निपटने के लिए मल्टीलेटरल सहयोग बढ़ाया जाए.
- जलवायु संकट को राजनीतिक मुद्दा नहीं, अस्तित्व का सवाल माना जाए.
- बड़े देश जिम्मेदारी दिखाएं, सिर्फ ताकत नहीं.

कयामत की घड़ी. (फाइल फोटो AP)
डूम्सडे क्लॉक क्या है?
डूम्सडे क्लॉक एक प्रतीकात्मक घड़ी है जिसे ‘बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स’ सेट करता है. यह घड़ी यह बताने के लिए बनाई गई थी कि मानव सभ्यता वैश्विक तबाही से कितनी दूर है. आधी रात का मतलब है पूर्ण विनाश.
डूम्सडे क्लॉक हमें क्या संदेश देती है?
डूम्सडे क्लॉक डराने के लिए नहीं बनाई गई है. इसका मकसद चेताना है. वैज्ञानिक साफ कहते हैं कि अभी भी हालात सुधारे जा सकते हैं. लेकिन इसके लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति, वैश्विक सहयोग और तेज फैसलों की जरूरत है. अगर देश सिर्फ अपने हितों में उलझे रहे तो यह घड़ी और आगे बढ़ेगी.
क्या डूम्सडे क्लॉक भविष्यवाणी करती है?
नहीं, यह एक प्रतीकात्मक चेतावनी है, भविष्य बताने वाली घड़ी नहीं.
क्या 85 सेकंड का मतलब तुरंत तबाही है?
नहीं, लेकिन यह बताता है कि जोखिम बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच चुका है.
क्या हालात बदले जा सकते हैं?
हां, वैज्ञानिकों के मुताबिक बदलाव संभव है, लेकिन समय बहुत कम है.
अगर वैश्विक शक्तियां सहयोग का रास्ता नहीं अपनातीं हैं तो परमाणु हथियार, जलवायु आपदाएं और तकनीकी गलतियां दुनिया को अकल्पनीय संकट में डाल सकती हैं. डूम्सडे क्लॉक का यह नया समय एक आखिरी चेतावनी की तरह है… अब भी संभलने का मौका है, लेकिन देरी भारी पड़ सकती है.





