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Explainer: संयुक्त राष्ट्र के गाजा में अकाल घोषित करने से क्या बदलेगा, कब और क्यों होती है ऐसी घोषणा

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संयुक्त राष्ट्र ने 22 अगस्त को आधिकारिक तौर पर गाजा में अकाल की घोषणा की. उसने कहा कि वहां पांच लाख लोग “विनाशकारी” भूख का सामना कर रहे हैं. सवाल इस बात का है कि यूनाइटेड नेशंस की इस घोषणा के बाद क्या बदलेगा. क्या वहां अब सहायता पहुंच सकेगी. खासकर तब जबकि इजरायल के विदेश मंत्रालय ने तुरंत पलटवार करते हुए कहा कि “गाजा में कोई अकाल नहीं है”.

आखिर वो कौन सी वजहें हैं, जिस कारण संयुक्त राष्ट्र किसी जगह पर अकाल की आधिकारिक तौर पर घोषणा करता है. जब संयुक्त राष्ट्र (UN) किसी देश में अकाल की आधिकारिक घोषणा करता है तो इसका मतलब केवल यह नहीं होता कि वहां खाने की कमी है बल्कि ये भी कि हालात गंभीर मानवीय संकट की स्थिति तक पहुंच चुके हैं.

संयुक्त राष्ट्र “अकाल” शब्द का इस्तेमाल हल्के में नहीं करता. ये एकीकृत खाद्य सुरक्षा चरण वर्गीकरण (IPC) पैमाने के तहत किया जाता है. क्या होती हैं अकाल घोषित करने की शर्तें

अकाल घोषित करने की शर्तें

संयुक्त राष्ट्र किसी जगह को अकाल तभी घोषित करता है जब ये तीन शर्तें पूरी हों
– 20% आबादी के पास पर्याप्त भोजन न हो.
– हर 10,000 लोगों में कम से कम 2 लोग रोज भूख से मर रहे हों.
– 30% से ज्यादा बच्चे कुपोषित हों.
अकाल की घोषणा का मतलब यह है कि भूख अब “संकट” से आगे बढ़कर “व्यापक मौतों” तक पहुंच चुकी है.

अकाल की घोषणा होते ही क्या होता है

– ग्लोबल अलार्म बजता है, ये मान लिया जाता है कि हालात इतने खराब हैं कि देश अकेले नहीं संभाल सकता.
– तब वर्ल्ड फूड प्रोग्राम (WFP) तुरंत बड़ी मात्रा में खाद्यान्न भेजना शुरू करता है.
– यूनीसेफ बच्चों और माताओं के लिए हाई-एनर्जी फूड सप्लीमेंट और दवाइयां भेजता है
– वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन बीमारियों के प्रसार पर नज़र रखता है, क्योंकि अकाल के साथ बीमारियां भी तेजी से फैलती हैं.
– संयुक्त राष्ट्र अपने सदस्य देशों, दानदाता एजेंसियों और दुनियाभर के तमाम एनजीओ से फंड की अपील करता है.
– स्थानीय सरकार पर दबाव बनाया जाता है कि वह राहत के कामों में रुकावट नहीं डाले
(जैसे सोमालिया या सूडान में कई बार सरकार या मिलिशिया ने राहत सामग्री रोकी)
– अक्सर अकाल से प्रभावित इलाकों में हिंसा, लूटपाट और पलायन होता है. यूनाइटेड शांति-सेना या अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा बल राहत वितरण की रक्षा कर सकते हैं. इसका मतलब ये भी है कि वो इलाका संयुक्त राष्ट्र शांतिसेना के तहत आ जाता है.

लोगों की ज़िंदगी में क्या होता है

– प्रभावित इलाकों में खास कैंप बनाए जाते हैं जहां भोजन और पानी दिया जाता है.
– बच्चों और गर्भवती या दूध पिलाने वाली महिलाओं को प्राथमिकता मिलती है.
– रोज़ाना एयरलिफ्ट्स और राहत ट्रक भेजे जाते हैं.
– अगर स्थिति लंबे समय तक बिगड़ी रहती है तो लाखों लोग विस्थापित होकर पड़ोसी देशों में शरण लेने लगते हैं.

गाजा में अकाल घोषित करने से पहले आकलन कैसे किया होगा

– डेटा इकट्ठा किया गया होगा
– स्थानीय स्वास्थ्य मंत्रालय, अस्पतालों और क्लीनिकों से जानकारी ली गई होगी, जिसमें बच्चों की कुपोषण दर और भूख से मौतों के रिकॉर्ड रहे होंगे
– मार्केट सर्वे किया होगा कि क्या भोजन उपलब्ध है, उसकी कीमतें कितनी हैं.
– पानी, बिजली और ईंधन की स्थिति कैसी है
– लोग दिन में कितने वक्त भोजन कर रहे हैं.
– बच्चों के वज़न और ऊंचाई नापकर उनके कुपोषण के बारे में पता किया गया होगा.
– मौतों के आंकड़े जुटाए होंगे, खासकर 5 साल से कम उम्र के बच्चों के.

कौन सी कमेटी ये तय करती है

एकीकृत खाद्य सुरक्षा वर्गीकरण यानि आईपीसी एक विशेषज्ञों की टीम होती है जिसमें संयुक्त राष्ट्र एजेंसियां, एनजीओ और स्थानीय अधिकारी शामिल होते हैं.
ये लोग सारा डेटा मिलाकर तय करते हैं कि कौन-सा इलाका किस हालत में है. अकाल की घोषणा से पहले अकाल समीक्षा कमेटी स्वतंत्र मूल्यांकन करती है. इसमें खाद्य सुरक्षा, पोषण और महामारी विज्ञान के अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ शामिल होते हैं. वे देखते हैं कि डेटा विश्वसनीय है या नहीं और कहीं राजनीतिक दबाव तो नहीं.

अकाल की घोषणा में कौन कौन शामिल होते हैं

– संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव के दफ्तर तक रिपोर्ट पहुंचती है.
– संयुक्त राष्ट्र का मानवीय मामलों का समन्वय आफिस आधिकारिक प्रेस बयान जारी करता है.
– वर्ल्ड फूड प्रोग्राम. यूनिसेफ, फूड एंड एग्रीकल्चर आर्गनाइजेशन, वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन संयुक्त रूप से रिपोर्ट पेश करते हैं.
– इसके बाद IPC की ग्लोबल कमेटी तकनीकी सहमति देती है.
– इसमें किसी खास देश या देशों की सहमति शामिल नहीं होती.

क्या अकाल घोषित होते ही शांति-सेना भी आती है?

नहीं, ऐसा नहीं होता. UN शांति-सेना अपने आप तैनात नहीं होती. उसका काम तभी होता है जबकि क्षेत्र में हिंसा, सशस्त्र संघर्ष या राजनीतिक अस्थिरता हो. तब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद इसके बारे में एक प्रस्ताव पास करे.

अगर रास्ते असुरक्षित हों तो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा बल या स्थानीय सेना की सुरक्षा ली जाती है. कुछ मामलों में शांति सेना के लोग खाने काफ़िले की सुरक्षा, कैंप की रक्षा करते हैं और सुनिश्चित करते हैं कि लूटपाट नहीं हो.

गाजा में क्यों मामला टेढा है

गाज़ा में मामला अलग तरह का है. गाज़ा में कभी यूनाइटेड नेशंस पीस फोर्स कभी तैनात नहीं हुई क्योंकि इज़रायल और अमेरिका इसका विरोध करते हैं. अमेरिका इसको वीटो कर देता है. इसमें यही सूरत बचती है कि राहत सामग्री पहुंचाने के लिए इज़रायल, मिस्र और हमास के बीच समझौता किया जाए. इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ की निगरानी में कुछ सीमाएं खोली जाएं.

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