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Explainer: नेपाल में कौन से सामान चीन से जाते हैं कौन से भारत से, खुद कैसे करता है कमाई

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नेपाल में जेन जेड के विद्रोह के बाद अराजकता की स्थिति है. हालांकि सेना ने देश की कमान संभाल ली है लेकिन वहां रोजाना के सामानों की कमी होने लगी है. पेट्रोल की कमी हो गई है. दूसरे जरूरी सामानों का भी अकाल पड़ने लगा है. नेपाल ज्यादा सामान चीन से आता है या भारत से, ये तो हम देखेंगे ही, साथ ही ये भी जानेंगे कि आखिर नेपाल अपनी खुद की कमाई कैसे करता है कि देश चलता रहे.

हालांकि कहना चाहिए कि नेपाल की इकोनॉमी में संकट की स्थितियां हमेशा से बनती रही हैं. क्योंकि उसकी कमाई कम है और बाहर के सामानों पर निर्भरता बहुत ज्यादा. मसलन भारत से आने वाले सामानों की आपूर्ति रुक जाए तो उनके रोजाना के जीवन पर असर पड़ता है तो चीन आने वाले सामान उसकी इंडस्ट्री, वाहन और इलैक्ट्रॉनिक्स की जरूरत को ज्यादा पूरी करता है.

वैसे नेपाल में दूसरे देशों से भी सामान आते हैं. इस छोटे से हिमालयन देश की सबसे बड़ी समस्या यही है कि अपने लिए पर्याप्त कमाई कैसे कर पाए कि उसकी इकोनॉमी दुरुस्त हो सके. सबसे पहले देखते हैं कि नेपाल में कौन से सामान चीन से आते हैं. हालांकि चीन ने नेपाल सामान भारत की तुलना में ज्यादा मुश्किल और समय लेने वाला है. मुख्य तौर पर ये सामान चीन से सड़क के रास्ते ही आता है. भारत से नेपाल का व्यापार ज्यादा सरल है. नेपाल चारों ओर से लैंडलॉक वाला देश है, लिहाजा व्यापार और पारगमन दोनों मार्गों के लिए भारत और चीन पर ज्यादा निर्भर है.

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नेपाल में चीन से कौन से सामान आते हैं

– इलेक्ट्रॉनिक्स और बिजली के सामान
– मोबाइल फ़ोन, स्मार्टफ़ोन
– विद्युत उपकरण (पंखे, रेफ्रिजरेटर, एयर कंडीशनर, आदि)
– मशीनरी और उपकरण – औद्योगिक मशीनरी
– निर्माण उपकरण (सीमेंट मिक्सर, जनरेटर)
– वाहन और स्पेयर पार्ट्स – मोटर वाहन (कार, ट्रक, मोटरसाइकिल), वाहन के पुर्जे और सहायक उपकरण
– कपड़े – सिंथेटिक वस्त्र, रेडीमेड कपड़े
– घरेलू सामान – प्लास्टिक का सामान, रसोई के बर्तन, फर्नीचर
– चिकित्सा आपूर्ति – दवाएं, चिकित्सा उपकरण.

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भारत से क्या नेपाल जाता है

भौगोलिक नजदीकी, सांस्कृतिक संबंधों, खुली सीमा और व्यापार समझौतों के कारण भारत से रोजाना सैक़ड़ों ट्रक सामान लेकर नेपाल जाते हैं. भारत के कम से कम पांच ऐसे रास्ते हैं, जिनसे नेपाल को लगातार व्यापार के लिए ट्रक और टैंक दौड़ते रहते हैं. ये रोजाना भारत से नेपाल जाने वाले सामान इस तरह हैं-
– पेट्रोलियम उत्पाद -पेट्रोल, डीज़ल, मिट्टी का तेल, स्नेहक
– खाद्य पदार्थ- चावल, गेहूँ, चीनी, दालें, खाद्य तेल
– औषधीय उत्पाद और चिकित्सा उत्पाद
– दवाएं और चिकित्सा उपकरण
– मशीनरी और उपकरण, कृषि मशीनरी
– विद्युत उपकरण
– उपभोक्ता वस्तुएं – वस्त्र, परिधान, जूते
– पैकेज्ड खाद्य उत्पाद
– कच्चा माल -लोहा, इस्पात, सीमेंट
-परिवहन वाहन – ट्रक, बसें, दोपहिया वाहन

दूसरे देशों से नेपाल में क्या आता है

चीन और भारत के अलावा नेपाल में अमेरिका, यूरोपीय संघ के देशों, जापान, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड से सामान आयात किए जाते हैं.
– फार्मास्युटिकल उत्पाद (स्विट्जरलैंड, जर्मनी, अमेरिका से विशेष दवाइयां)
– विलासिता के सामान – ब्रांडेड कपड़े, इलेक्ट्रॉनिक्स (एप्पल उत्पाद, लक्ज़री घड़ियां) – ये यूरोपीय देशों और अमेरिका से आते हैं
– ऑटोमोबाइल -जापानी और दक्षिण कोरियाई वाहन (टोयोटा, हुंडई, होंडा)
– उच्च तकनीक वाले उपकरण
– चिकित्सा निदान उपकरण (जर्मनी, अमेरिका, जापान से)
– उर्वरक (रूस, अमेरिका से)
– रसायन

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कैसे होती है नेपाल की कमाई

1. पर्यटन – नेपाल दुनिया भर में अपने हिमालय, सुंदर प्राकृतिक दृश्य, ट्रेकिंग रूट्स, और सांस्कृतिक धरोहर जैसे काठमांडू घाटी के मंदिर के साथ अन्य स्मारकों के लिए प्रसिद्ध है. वहां बड़े पैमाने पर दुनियाभर से पर्यटक आते हैं. इससे नेपाल को मोटी कमाई होती है. इसमें ट्रेकिंग परमिट, होटल, परिवहन (हवाई जहाज, बसें), गाइड सेवाएं और कल्चरल टूरिज्म के जरिए मुद्रा मिलती है. पर्यटन नेपाल की सबसे बड़ी विदेशी मुद्रा कमाई का स्रोत है. ये देश की GDP में बहुत योगदान देता है. रोजगार का भी बड़ा स्रोत है.

2. रेमिटेंस – लाखों नेपाली बाहर काम करते हैं, वो खाड़ी देशों से लेकर, मलेशिया, भारत, दक्षिण कोरिया जैसे देशों में नौकरियां करते हैं. वो अपने परिवार को नेपाल में पैसा भेजते हैं.रेमिटेंस नेपाल की GDP का लगभग 25-30% से अधिक बनाता है. ये देश की सबसे बड़ी विदेशी मुद्रा आय में एक है.

3. वस्तुओं का निर्यात – नेपाल कई चीजें विदेशों में बेचता भी है, जिसमें चाय, इलायची, चावल, अदरक और औषधीय जड़ी-बूटियों जैसे कृषि उत्पाद शामिल हैं. यहां का हस्तशिल्प और पारंपरिक वस्त्र भी विदेशों में भेजे जाते हैं, मसलन पश्मीना शॉल, गलीचे, पारंपरिक कपड़े, लकड़ी की नक्काशी. चूना पत्थर और रेत दूसरे देशों को बेचा जाता है. हल्के उद्योग से बनी वस्तुएं भी नेपाल बाहर भेजता है. हालांकि निर्यात की मात्रा कम है, पर यह देश के व्यापार संतुलन और विदेशी मुद्रा अर्जन में मदद करता है.

4. विदेशी सहायता – नेपाल को कई देशों और संस्थाओं से विदेशी सहायता मिलती है. वित्तीय तौर पर मदद करने वालों में भारत, चीन, अमेरिका, जापान, यूरोपीय संघ, वर्ल्ड बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB) शामिल हैं. ये मदद इंफ्रास्ट्रक्चर, शिक्षा, स्वास्थ्य, राहत कार्य, और विकास परियोजनाओं के लिए होती है. वैसे नेपाल की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि उसका व्यापार घाटा ज्यादा है और निर्यात कम.

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