विदेश » Explainer: क्यों अंतरिक्ष में कभी पानी का वजूद नहीं हो सकता? वजह आपके होश उड़ा देगी

Explainer: क्यों अंतरिक्ष में कभी पानी का वजूद नहीं हो सकता? वजह आपके होश उड़ा देगी

Facebook
Twitter
WhatsApp

Last Updated:

Why no liquid in space: अंतरिक्ष में दबाव लगभग शून्य होने के कारण कोई भी पदार्थ तरल रूप में मौजूद नहीं रह सकता. वहां चीजे या तो ठोस बनती हैं या गैस में बदल जाती हैं.

क्यों अंतरिक्ष में कभी पानी का वजूद नहीं हो सकता? वजह आपके होश उड़ा देगीप्रतीकात्मक तस्वीर
आपने देखा होगा कि पानी कभी बर्फ बन जाता है, कभी भाप. लेकिन पानी हमेशा लिक्विड क्यों नहीं रहता? इसका कारण है दबाव और तापमान. किसी भी चीज़ के तरल रूप को बनाए रखने के लिए इन दोनों का सही होना ज़रूरी है. अगर दबाव कम होने लगे तो चीज़ का जमने और उबलने वाला तापमान एक-दूसरे के करीब आने लगता है. यानी हालात ऐसे बनते हैं कि तरल रूप ज़्यादा देर तक टिक ही नहीं पाता.

स्पेस का खेल
अब जरा सोचिए, अंतरिक्ष यानी स्पेस में दबाव कैसा होता है? वहां दबाव लगभग शून्य के बराबर है. ऐसे माहौल में चीज़ों के जमने और उबलने का तापमान लगभग एक जैसा हो जाता है. इसका मतलब ये हुआ कि स्पेस में कोई भी चीज़ लिक्विड नहीं रह सकती. पानी हो, मरकरी हो या फिर धातुसब या तो सॉलिड बन जाएंगे या फिर गैस में बदल जाएंगे. वहां लिक्विड का टिकना लगभग नामुमकिन है.

धरती की खासियत
हमारी धरती इतनी खास क्यों है? क्योंकि यहां पर वातावरण है, और वो दबाव बनाए रखता है. यही दबाव और सही तापमान पानी को तरल बनाए रखते हैं. इसी वजह से नदियां, झीलें और समंदर हमारे ग्रह पर मौजूद हैं. जरा सोचिए, अगर धरती पर दबाव खत्म हो जाए तो क्या होगा? सारी नदियां-झीलें तुरंत भाप बनकर उड़ जाएंगी. यानी तरल रूप कहीं दिखेगा ही नहीं.

क्या सिर्फ धरती पर ही लिक्विड है?
नहीं. ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि वहां भी तरल चीजें मिल सकती हैं. बस शर्त ये है कि जहां कहीं दबाव मौजूद हो, वहां लिक्विड बनने की संभावना रहती है. उदाहरण के तौर परअगर किसी ग्रह का वातावरण (एटमॉस्फियर) है, तो वहां दबाव मौजूद रहेगा. उसी दबाव के कारण तरल पदार्थ भी वहां बने रह सकते हैं.

दूसरे ग्रहों और चंद्रमाओं की कहानी
वैज्ञानिक मानते हैं कि सौर मंडल के कई चंद्रमा और ग्रह तरल पदार्थ छिपाकर बैठे हैं. जैसे बृहस्पति का चंद्रमा यूरोपा. इसकी सतह तो मोटी बर्फ से ढकी हुई है, लेकिन उसके नीचे महासागर जैसी गहराइयों में पानी हो सकता है. ठीक इसी तरह शनि का चंद्रमा एन्सेलेडस भी वैज्ञानिकों की नज़र में खास है. यहां सतह से बर्फीले फव्वारे निकलते देखे गए हैं. इससे अंदाज लगता है कि इसकी सतह के नीचे भी पानी मौजूद हो सकता है.

नतीजा क्या निकला?
तरल रूप हर जगह नहीं मिलता. इसके लिए सही दबाव और सही तापमान होना ज़रूरी है. स्पेस में दबाव लगभग जीरो है, इसलिए वहां लिक्विड टिक नहीं पाता. लेकिन जहां दबाव है, जैसे धरती या कुछ ग्रहों/चंद्रमाओं परवहां लिक्विड मौजूद हो सकता है.

homeworld

क्यों अंतरिक्ष में कभी पानी का वजूद नहीं हो सकता? वजह आपके होश उड़ा देगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी