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Why no liquid in space: अंतरिक्ष में दबाव लगभग शून्य होने के कारण कोई भी पदार्थ तरल रूप में मौजूद नहीं रह सकता. वहां चीजे या तो ठोस बनती हैं या गैस में बदल जाती हैं.
प्रतीकात्मक तस्वीरस्पेस का खेल
अब जरा सोचिए, अंतरिक्ष यानी स्पेस में दबाव कैसा होता है? वहां दबाव लगभग शून्य के बराबर है. ऐसे माहौल में चीज़ों के जमने और उबलने का तापमान लगभग एक जैसा हो जाता है. इसका मतलब ये हुआ कि स्पेस में कोई भी चीज़ लिक्विड नहीं रह सकती. पानी हो, मरकरी हो या फिर धातु– सब या तो सॉलिड बन जाएंगे या फिर गैस में बदल जाएंगे. वहां लिक्विड का टिकना लगभग नामुमकिन है.
हमारी धरती इतनी खास क्यों है? क्योंकि यहां पर वातावरण है, और वो दबाव बनाए रखता है. यही दबाव और सही तापमान पानी को तरल बनाए रखते हैं. इसी वजह से नदियां, झीलें और समंदर हमारे ग्रह पर मौजूद हैं. जरा सोचिए, अगर धरती पर दबाव खत्म हो जाए तो क्या होगा? सारी नदियां-झीलें तुरंत भाप बनकर उड़ जाएंगी. यानी तरल रूप कहीं दिखेगा ही नहीं.
क्या सिर्फ धरती पर ही लिक्विड है?
नहीं. ब्रह्मांड इतना बड़ा है कि वहां भी तरल चीजें मिल सकती हैं. बस शर्त ये है कि जहां कहीं दबाव मौजूद हो, वहां लिक्विड बनने की संभावना रहती है. उदाहरण के तौर पर– अगर किसी ग्रह का वातावरण (एटमॉस्फियर) है, तो वहां दबाव मौजूद रहेगा. उसी दबाव के कारण तरल पदार्थ भी वहां बने रह सकते हैं.
वैज्ञानिक मानते हैं कि सौर मंडल के कई चंद्रमा और ग्रह तरल पदार्थ छिपाकर बैठे हैं. जैसे बृहस्पति का चंद्रमा यूरोपा. इसकी सतह तो मोटी बर्फ से ढकी हुई है, लेकिन उसके नीचे महासागर जैसी गहराइयों में पानी हो सकता है. ठीक इसी तरह शनि का चंद्रमा एन्सेलेडस भी वैज्ञानिकों की नज़र में खास है. यहां सतह से बर्फीले फव्वारे निकलते देखे गए हैं. इससे अंदाजा लगता है कि इसकी सतह के नीचे भी पानी मौजूद हो सकता है.
नतीजा क्या निकला?
तरल रूप हर जगह नहीं मिलता. इसके लिए सही दबाव और सही तापमान होना ज़रूरी है. स्पेस में दबाव लगभग जीरो है, इसलिए वहां लिक्विड टिक नहीं पाता. लेकिन जहां दबाव है, जैसे धरती या कुछ ग्रहों/चंद्रमाओं पर– वहां लिक्विड मौजूद हो सकता है.
New Delhi,Delhi
September 11, 2025, 22:56 IST





