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Explainer: क्या होता है हॉट माइक, शी जिनपिंग और पुतिन इसे लेकर क्यों चर्चा में

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बीजिंग में सैन्य परेड के दौरान चीन और रूस के प्रेसीडेंट शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की हॉट माइक बातचीत सार्वजनिक हो गई. इसे चीन के सरकारी प्रसारण हाउस ने प्रसारित कर दिया. इसकी बहुत चर्ची इस समय पूरी दुनिया में हो रही है. जब चीन और रूस के नेता मंच की ओर बढ़ रहे थे, तो उन्होंने हमेशा जीवित रहने के बारे में छोटी-छोटी बातें कीं. क्या आपको मालूम है कि हॉट माइक क्या होता है. उसे किस संदर्भ में इस्तेमाल किया जाता है.

सवाल – क्या होता है हॉट माइक. इसमें क्या होता है?

– हॉट माइक वह स्थिति होती है जब कोई माइक्रोफोन बिना वक्ता की जानकारी के चालू रहता है. उनकी निजी बातचीत या टिप्पणी रिकॉर्ड या प्रसारित हो जाती है, जो अकसर सार्वजनिक होने के बाद चर्चा या विवाद का कारण बनती है.

शी जिनपिंग और पुतिन के साथ भी ऐसा ही हुआ. हाल ही में बीजिंग में एक सैन्य परेड के दौरान सामने आया, जब दोनों नेताओं की बायोटेक्नोलॉजी, अंग प्रत्यारोपण और इंसान की 150 साल तक जीने की संभावना पर बातचीत हॉट माइक के जरिए रिकॉर्ड हो गई और वायरल हो गई मजे कि बात ये है कि जब ये दोनों नेता ये बातें कर रहे थे तो उनके अनुवादक भी उन्हें इसे ट्रांसलेट करके बता रहे थे. उनके साथ चल रहे उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग उन भी इसका मजा ले रहे थे.

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सवाल – हॉट माइक का सटीक मतलब और तकनीक कारण क्या होते हैं?

– हॉट माइक का सटीक मतलब है — ऐसा माइक्रोफोन जो बिना उपयोगकर्ता की जानकारी के चालू हो, जिससे उनकी बातचीत, ध्वनि या टिप्पणियां रिकॉर्ड या प्रसारित हो जाती हैं, जबकि उन्हें लगता है कि माइक बंद है या उनकी बात पब्लिक में नहीं आ रही.

हॉट माइक आमतौर पर तब होता है जब लाइव स्टूडियो, प्रेस सम्मेलन, या किसी सार्वजनिक स्थल में मिक्सर, ऑडियो डिवाइस या रिकॉर्डिंग सिस्टम में माइक्रोफोन ऑन रहता है और सिग्नल ब्रॉडकास्ट या रिकॉर्ड हो रहा होता है.

माइक्रोफोन मुख्य तौर पर ध्वनि तरंगों को इलेक्ट्रिकल सिग्नल में बदलता है. अगर यह चालू हो, तो हर ध्वनि/संवाद को डिवाइस तक पहुंचाता है – कभी-कभी साउंड इंजीनियर या तकनीकी स्टाफ की गलती की वजह से या लाइव सेटअप में ऑटोमेटिक सिग्नल के कारण माइक रिकॉर्डिंग मोड में रहता है.

इसकी वजह से अक्सर गोपनीय या अनफिल्टर्ड जानकारी जनता या मीडिया तक पहुंच जाती है, क्योंकि माइक को ऑन रखने की जानकारी वक्ता को नहीं होती, और उनकी निजी बातें लाइव हो जाती हैं.
तकनीकी तौर पर इसकी वजह गलत स्विचिंग, आडियो इंजीनियर की भूल, या ऑटो-मोड सेटिंग्स से होती है, जिससे माइक ऑन रहता है और सबकुछ रिकॉर्ड करता है.

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डोनाल्ड ट्रंप कई बार हॉट माइक मोमेंट में फंसकर सुर्खियों में आ चुके हैं.
सवाल – हॉट माइक के वो वाकये क्या थे जब कोई नेता विवादों में आ गया?

– हालांकि ऐसा तो कई नेताओं के साथ हो चुका है लेकिन इससे सबसे ज्यादा सुर्खियां और विवाद डोनाल्ड ट्रंप ने बटोरे हैं. वर्ष 2029 में नाटो शिखर सम्मेलन में साथी नेताओं ने डोनालड ट्रंप का मजाक उड़ाया और ये हॉट माइक हो गया. इससे काफी विवाद हो गया. 2017, 2019, और 2025 में ट्रंप की निजी चर्चाएं, जैसे कूटनीति, रूस, फ्रांस, जर्मनी नेताओं के सामने अनफिल्टर्ड बातें बार-बार चर्चा में आती रही हैं.
ओबामा ने 2012 में रूसी राष्ट्रपति मेदवेदेव से कहा, “चुनाव बाद मुझे अधिक लचीलापन मिलेगा,” जो खुली रिकॉर्डिंग में आ गया और विवाद हो गया. क्वाड शिखर सम्मेलन में बाइडेन ने शी जिनपिंग और चीन के मसले पर अनजाने में टिप्पणी दे दी, जो वायरल हो गई. हॉट माइक आमतौर पर गोपनीयता को तोड़ देती है और नेताओं की निजी बातें सार्वजनिक बना देती है.

सवाल – शी जिनपिंग और पुतिन का हॉट माइक का क्या प्रसंग है, जो चर्चाओं में आ गया?

– बीजिंग में हालिया विजय दिवस सैन्य परेड में शी जिनपिंग, पुतिन और किम जोंग उन साथ चल रहे थे तभी उनकी बातचीत हॉट माइक द्वारा रिकॉर्ड होकर प्रसारित हो गई. इस बातचीत में ये दोनों नेता इंसानी जीवन को लंबा करने की संभावना, अंग प्रत्यारोपण और बायोटेक्नोलॉजी के आधुनिक प्रयोगों के बारे में बात कर रहे थे और अनुवादक उनकी मदद कर रहे थे.

शी जिनपिंग ने कहा कि आज 70 की उम्र में भी आदमी जवान महसूस करता है. इस सदी में ही इंसान 150 साल तक जी सकता है. पुतिन ने जवाब दिया कि अंगों को कई बार बदला जा सकता है और शायद लोग अमर भी हो सकते हैं.
यह बातचीत बाद में वायरल हो गई क्योंकि यह हॉट माइक द्वारा बिना इरादे के सार्वजनिक हो गई थी. बाद में पुतिन ने इसकी पुष्टि भी की. ये बातचीत के जरिए पुतिन और शी ने संकेत दिया कि वे आने वाले वर्षों तक सत्ता में बने रहना चाहते हैं. दोनों नेता अभी 72 वर्ष के हैं. पुतिन के बारे में तो कहा भी जाता है कि वह लंबे समय तक जिंदा रहना चाहते हैं. उन्होंने अपनी हेल्थ मिनिस्ट्री से कहा है कि वो प्राथमिकता के आधार जीवन प्रत्याशा बढ़ाने पर काम करे. रूस की सबसे महत्वपूर्ण सरकारी कंपनियों में से एक परमाणु ऊर्जा समूह रोसाटॉम ने पिछले साल कहा कि वह मानव अंगों को “प्रिंट” करने की तकनीक विकसित कर रही है.

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