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Explainer: क्या होता है ड्यूटी फ्री ट्रेड, भारत का कितने देशों के साथ ऐसा एफटीए, इससे क्या फायदा

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भारत और ओमान के बीच व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौता हुआ है. ये एक तरह का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट है, जो माल, सेवाओं, निवेश और पेशेवरों की आवाजाही को बढ़ावा देने वाला आधुनिक समझौता है. अब दोनों देशों के बीच जब व्यापार होगा यानि आयात निर्यात होगा तो उस पर किसी तरह की कोई ड्यूटी नहीं लगेगी. ये ट्रेड पूरी तरह से ड्यूटी फ्री होगा.

ड्यूटी फ्री ट्रेड मुक्त व्यापार समझौतों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें भागीदार देश एक-दूसरे के निर्यात पर लगने वाले आयात शुल्क या टैरिफ को पूरी तरह समाप्त कर देते हैं. इससे व्यापार बाधाएं जैसे कोटा और लाइसेंसिंग कम होती हैं, जिससे निर्यातक सस्ते दामों पर बाजार तक पहुंच पाते हैं.

सवाल – क्या होता है एफटीए, ये दो देश कब और किन स्थितियों में करते हैं?

– ये दो या अधिक देशों के बीच एक समझौता होता है, जिसमें वे आयात-निर्यात पर लगने वाले टैरिफ (सीमा शुल्क), कोटा (मात्रा की सीमा), सब्सिडी और अन्य प्रतिबंधों को पूरी तरह या ज्यादातर हटा देते हैं. इससे देशों के बीच माल और सेवाओं का व्यापार आसान और सस्ता हो जाता है. ड्यूटी फ्री ट्रेड का मतलब है कि समझौते में शामिल देशों के बीच योग्य वस्तुओं पर कोई सीमा शुल्क नहीं लगता, यानी वे बिना अतिरिक्त टैक्स के खरीद-बिक्री कर सकते हैं.

देश आपस में ऐसा व्यापार तब करते हैं जब वे आर्थिक लाभ देखते हैं, जैसे निर्यात बढ़ाना, रोजगार पैदा करना, उपभोक्ताओं के लिए सस्ते सामान उपलब्ध कराना, बाजारों को खोलना और प्रतिस्पर्धा बढ़ाना. आमतौर पर, देश तब एफटीए साइन करते हैं जब वे एक-दूसरे के साथ मजबूत आर्थिक संबंध बनाना चाहते हैं, जैसे पड़ोसी देश या बड़े व्यापारिक साझेदार.

सवाल – एफटीए कब शुरू हुआ और कितना प्रचलन में है?

– दुनिया में पहला मुक्त व्यापार समझौता 1860 में ब्रिटेन और फ्रांस के बीच कोब्डेन-शेवालियर संधि के रूप में शुरू हुआ, जिसने यूरोपीय देशों में व्यापार बाधाओं को कम किया. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1947 में GATT ने बहुपक्षीय व्यापार ढांचा स्थापित किया, जो 1995 में WTO बना.

सवाल – ये GATT और WTO क्या है?

– GATT का पूरा नाम General Agreement on Tariffs and Trade है, जो टैरिफ और व्यापार पर सामान्य समझौता कहलाता है. यह 1947 में 23 देशों द्वारा जिनेवा में हस्ताक्षरित बहुपक्षीय व्यापार समझौता था, जो 1 जनवरी 1948 से प्रभावी हुआ.

GATT का मुख्य लक्ष्य टैरिफ, कोटा और अन्य व्यापार बाधाओं को कम या समाप्त करके अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बढ़ावा देना था. यह गैर-भेदभावपूर्ण व्यापार और टैरिफ के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित करता था. 1995 में ये WTO यानि वर्ल्ड ट्रेड आर्गनाइजेशन में बदल गया. भारत 1948 से ही सदस्य था.

सवाल – एफटीए के तहत कितने देश व्यापार कर रहे हैं?

– 2025 तक विश्व में 350 से अधिक सक्रिय FTA हैं, जिनमें द्विपक्षीय और क्षेत्रीय समझौते शामिल हैं, जो WTO के पूरक के रूप में कार्य करते हैं. अब EU, US जैसे देशों के पास दर्जनों FTA हैं.

सवाल – एफटीए क्या शामिल होता है? 

– FTA के तहत अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं (अक्सर 90-99%) पर ड्यूटी फ्री पहुंच मिलती है, हालांकि संवेदनशील क्षेत्रों जैसे कृषि, डेयरी या फार्मा को सुरक्षा दी जा सकती है. यह द्विपक्षीय व्यापार बढ़ाता है, रोजगार सृजन करता है और आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करता है.

सवाल – भारत ने अब तक कितने देशों के साथ एफटीए किया हुआ है? 

– भारत ने अब तक 16 देशों और क्षेत्रों के साथ FTA साइन किए हैं, जिनमें श्रीलंका, भूटान, थाईलैंड, सिंगापुर, मलेशिया, कोरिया, जापान, ऑस्ट्रेलिया, यूएई, यूके, मॉरीशस और आसियान शामिल हैं. हाल के समझौते जैसे EFTA (स्विट्जरलैंड, नॉर्वे आदि के साथ) और यूके के साथ 2025 में हुए, जिनमें भारत को 99% निर्यात पर ड्यूटी फ्री लाभ मिला. 2014 के बाद पांच नए FTA साइन हुए.

सवाल – भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार कैसा है? 

– भारत और ओमान के बीच द्विपक्षीय व्यापार FY25 में 10.61 अरब डॉलर तक पहुंचा, जिसमें भारत का निर्यात घाटा रहा. भारत ओमान को मुख्य रूप से पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, धातु अयस्क और रसायन निर्यात करता है, जबकि ओमान से खनिज ईंधन, उर्वरक, कार्बनिक रसायन और प्लास्टिक आयात होते हैं.

भारत से ओमान को पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, अभ्रक, कोयला और अन्य अयस्क, रसायन, चावल, एल्यूमिनियम ऑक्साइड, कृषि उत्पाद, वस्त्र और फार्मास्यूटिकल्स निर्यात करता है. वहीं भारत में ओमान से क्रूड आयल, उर्वरक, कार्बनिक रसायन और प्लास्टिक आता है.

सवाल – क्यों और कब हुआ यह समझौता?

– इससे संबंधित बातचीत नवंबर 2023 में शुरू हुईं. 2025 में पूरी हुईं. इसके 2026 की पहली तिमाही से लागू होने की उम्मीद है. यह समझौता भारत की गल्फ क्षेत्र में आर्थिक उपस्थिति को मजबूत करता है.

सवाल – एफटीए में शामिल होने के लिए देशों को किन नियमों का पालन करना पड़ता है?

– सामान को ड्यूटी फ्री बनाने के लिए वो सामान उन्हीं देशों में बनना चाहिए, जो ये समझौता कर रहे हैं. ये स्वास्थ्य, पर्यावरण, श्रम मानकों और बौद्धिक संपदा की सुरक्षा से जुड़े नियमों के साथ होने चाहिए. यानि जहां ये सामान बन रहे हों, वो इन नॉर्म का पूरा पालन कर रहे हों. समझौता विश्व व्यापार संगठन के नियमों के अनुरूप होना चाहिए, जैसे कि यह अन्य देशों पर नए प्रतिबंध न लगाए.

सवाल – भारत के सामानों पर कितने देश टैरिफ लगाते हैं?

– भारत के निर्यात उत्पादों पर लगभग सभी 190+ WTO सदस्य देश टैरिफ लगाते हैं, हालांकि दरें उत्पाद और FTA के आधार पर भिन्न होती हैं. कुछ देश जैसे अमेरिका ने 2025 में भारतीय सामानों (स्टील, फार्मा, ऑटो) पर 25-26% अतिरिक्त टैरिफ बढ़ाए हैं.
अमेरिका- 25% तक भारतीय निर्यात पर (2025 से प्रभावी) साथ में 25 फीसदी अतिरिक्त
यूरोपीय संघ- औसत 5-10%, कुछ क्षेत्रों में अधिक
चीन – औसत 8-15%, प्रतिस्पर्धी उत्पादों पर ऊंचा

FTA वाले 16+ देशों में अधिकांश भारतीय सामानों पर 0% टैरिफ है, लेकिन गैर FTA देशों (150+) में औसत 5-20% टैरिफ लागू रहता है. कुल मिलाकर, विश्व के 80% से अधिक व्यापार भागीदार टैरिफ लगाते हैं, लेकिन निर्यात वृद्धि बरकरार है.

सवाल – भारत कितने देशों पर टैरिफ लगाता है?

– भारत भी करीब सभी 190+ WTO सदस्य देशों और अन्य व्यापार भागीदारों पर आयात शुल्क यानि टैरिफ लगाता है, क्योंकि यह WTO नियमों के तहत सभी देशों के आयात पर टैरिफ लगाने का अधिकार रखता है. हालांकि FTA वाले 16+ देशों में अधिकांश सामानों पर 0% टैरिफ लागू होता है, जबकि गैर-FTA देशों (150+) पर औसत 5-20% टैरिफ रहता है.

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