इस टेस्ट में क्रू मॉड्यूल के पैराशूट आधारित डिसेलेरेशन सिस्टम की कार्यक्षमता को परखा गया, जिसमें दो ड्रॉग पैराशूट और तीन मुख्य पैराशूट शामिल थे. ये पैराशूट मॉड्यूल की गति को कम करके समुद्र में सुरक्षित लैंडिंग सुनिश्चित करते हैं. यह परीक्षण इसरो, भारतीय वायु सेना, डीआरडीओ, भारतीय नौसेना, और तटरक्षक बल के संयुक्त प्रयासों से किया गया.
– गगनयान मिशन भारत का पहला मानवयुक्त अंतरिक्ष मिशन है, जिसे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा विकसित किया जा रहा है. इस मिशन का उद्देश्य तीन अंतरिक्ष यात्रियों को 400 किलोमीटर की ऊंचाई पर पृथ्वी की निचली कक्षा में तीन दिनों के लिए भेजना और उन्हें सुरक्षित रूप से पृथ्वी पर वापस लाना है.
– एयर ड्रॉप टेस्ट गगनयान मिशन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसमें क्रू मॉड्यूल (जिसमें अंतरिक्ष यात्री यात्रा करेंगे) की सुरक्षित वापसी और लैंडिंग की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया है. इस टेस्ट में क्रू मॉड्यूल को एक निश्चित ऊंचाई (लगभग 3.5 से 4 किलोमीटर) से हेलीकॉप्टर के माध्यम से गिराया गया ताकि पैराशूट प्रणाली की कार्यक्षमता और मॉड्यूल की सुरक्षा का आकलन किया जा सके. यह टेस्ट विशेष रूप से समुद्र में क्रू मॉड्यूल की सॉफ्ट लैंडिंग (स्प्लैशडाउन) सुनिश्चित करने के लिए किया जाता है, जो अंतरिक्ष से वापसी के दौरान महत्वपूर्ण है.

courtesy isro
सवाल – गगनयान में कितने पैराशूट होंगे, जिसके जरिए इसकी गति धीमी करके इसको अंतरिक्ष से धरती पर लाया जाएगा?
एयर ड्रॉप टेस्ट का संबंध क्रू मॉड्यूल की सुरक्षित वापसी और समुद्र में सॉफ्ट लैंडिंग से है, जो अंतरिक्ष से पृथ्वी पर लौटते समय पैराशूट सिस्टम की कार्यक्षमता को देखता है.
– गगनयान खुद अंतरिक्ष में नहीं जाएगा; इसे अंतरिक्ष में ले जाने के लिए एक रॉकेट की जरूरत होगी. गगनयान के दो मुख्य हिस्से होंगे. एक क्रू मॉड्यूल और दूसरा सर्विस मॉड्यूल.
सर्विस मॉड्यूल – यह क्रू मॉड्यूल को सपोर्ट करता है, जिसमें प्रोपल्सन सिस्टम, बिजली आपूर्ति और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं.

courtesy isro
गगनयान को अंतरिक्ष में ले जाने के लिए इसरो के GSLV Mk III रॉकेट उपयोग किया जाएगा. यह भारत का सबसे शक्तिशाली लॉन्च व्हीकल है, जो भारी पेलोड को पृथ्वी की कक्षा में ले जा सकता है. इसे श्रीहरिकोटा में सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लांच किया जाएगा. रॉकेट के टॉप पर गगनयान (क्रू मॉड्यूल + सर्विस मॉड्यूल) को जोड़ा जाएगा.
लांच के समय GSLV Mk III रॉकेट गगनयान को पृथ्वी की निचली कक्षा (लगभग 400 किमी ऊंचाई) तक ले जाएगा. एक बार कक्षा में पहुंचने के बाद, रॉकेट का काम पूरा हो जाएगा. फिर गगनयान स्वतंत्र रूप से कक्षा में चक्कर लगाएगा.
– नहीं, GSLV Mk III वापस लौटने वाला रॉकेट नहीं है. ये एक एक्सपेंडेबल लॉन्च व्हीकल है, जिसका मतलब है कि ये एक बार उपयोग के बाद फिर इस्तेमाल लायक नहीं रह जाता. इसके सभी हिस्से उपयोग के बाद नष्ट हो जाते हैं या समुद्र में गिर जाते हैं. सॉलिड बूस्टर्स लांच के कुछ मिनट बाद ये अलग होकर समुद्र (आमतौर पर बंगाल की खाड़ी) में गिर जाते हैं. लिक्विड कोर स्टेज में उसके बाद उपयोग हो जाने के बाद समुद्र में गिरता है. क्रायोजेनिक स्टेज पेलोड को कक्षा में पहुंचाने के बाद अंतरिक्ष में रह जाता है या वायुमंडल में जल जाता है. एक GSLV Mk III रॉकेट के निर्माण और लंच की औसत लागत लगभग ₹400 करोड़ (लगभग US$54-62 मिलियन) बताई जाती है.
– .ये पृथ्वी की कक्षा में करीब तीन दिनों तक रहेगा. अंतरिक्ष यात्री क्रू मॉड्यूल के अंदर रहेंगे, जहां उनके लिए आवश्यक जीवन-रक्षक प्रणालियां ऑक्सीजन, खाना, तापमान नियंत्रण और वेस्ट मैनेजमेंट उपलब्ध रहेगा. अंतरिक्ष यात्री कई तरह के वैज्ञानिक प्रयोग कर सकते हैं, जैसे माइक्रोग्रैविटी में सामग्री का अध्ययन, जैविक प्रयोग, या पृथ्वी का अवलोकन.
– मिशन के अंत में, गगनयान को पृथ्वी की ओर वापस लाने के लिए सर्विस मॉड्यूल के प्रोपल्सन सिस्टम का उपयोग किया जाएगा, जिससे क्रू मॉड्यूल को कक्षा से बाहर निकाला जाएगा. क्रू मॉड्यूल सर्विस मॉड्यूल से अलग हो जाएगा. पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करेगा. वायुमंडल में प्रवेश के दौरान क्रू मॉड्यूल को अत्यधिक गर्मी से बचाने के लिए एक हीट शील्ड होगी. जैसे ही मॉड्यूल पृथ्वी के करीब पहुंचेगा, इसकी गति को कम करने के लिए पैराशूट सिस्टम सक्रिय होगा. गगनयान में 10 पैराशूट्स की एक सीरीज है, जो मॉड्यूल को धीमा करके समुद्र में सॉफ्ट लैंडिंग सुनिश्चित करेगी.
सवाल – इसमें क्रू एस्केप सिस्टम क्या है?
सवाल – क्या अब गगनयान से सीधे मानवों को अंतरिक्ष भेज दिया जाएगा?
सवाल – मानव के साथ ये मिशन कब अंतरिक्ष जाएगा?
– इसरो ने गगनयान के लिए पहली मानवयुक्त उड़ान को 2026 के अंत तक तय किया है. इससे पहले सारे परीक्षण कर लिए जाएंगे.





