बेशक इजरायल और अमेरिका फिलिस्तीन को एक देश बनाने की राह में एड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं लेकिन उसके लिए पूरी दुनिया में जनमत बढ़ता लग रहा है. इस फिलिस्तीन देश के ही दो हिस्से हैं – एक गाजा पट्टी और दूसरा वेस्ट बैंक. इजरायल की नजर हमेशा दोनों ओर रही है. इजरायल अगर गाजा शहर को खाली कराने में लगा है तो वेस्ट बैंक पर भी देरसबेर कब्जा करना चाहता है. खाड़ी देश के मुस्लिम देश इसका विरोध कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब मुस्लिम देशों के प्रमुखों से मिले तो उन्होंने कहा कि वो किसी भी हालत में इजरायल को वेस्ट बैंक पर कब्जा नहीं करने देंगे.
वेस्ट बैंक इजरायल-फिलिस्तीन विवाद का केंद्र बिंदु है. यह इलाका लगभग 5,655 वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो जॉर्डन नदी के पश्चिम में स्थित है. यहां की आबादी करीब 30 लाख फिलिस्तीनी है. यहां की इजरायली बस्तियां 5 लाख से ज्यादा यहूदियों को आश्रय देती हैं. 1967 के छह दिवसीय युद्ध में इजरायल ने जॉर्डन से यह इलाका कब्जा लिया. तब से ये ‘कब्जे वाले क्षेत्र’ का हिस्सा है. अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक, ये फिलिस्तीनी राज्य का हिस्सा होना चाहिए, लेकिन इजरायल इसे ‘विवादित क्षेत्र’ मानता है. तो जानते हैं कि वेस्ट बैंक का इलाका कैसा है. वहां की आबादी कितनी है. किस धर्म के लोग वहां रहते हैं. क्षेत्रफल कितना है
सवाल – वेस्ट बैंक क्या है और यह कहां स्थित है?
– वेस्ट बैंक मध्य-पूर्व का वह इलाका है जो जॉर्डन नदी के पश्चिमी किनारे पर फैला है. इसका नाम भी इसी वजह से पड़ा. क्षेत्रफल जैसा कि ऊपर भी बताया जा चुका है कि 5655 वर्ग किलोमीटर है, हालांकि कहीं कहीं इसे 5,640 वर्ग किलोमीटर भी बताया जाता है. यानि ये पूरा इलाका भारत के गोवा राज्य का 10 गुना है. इसके उत्तर, पश्चिम और दक्षिण में इज़रायल है, जबकि पूर्वी सीमा जॉर्डन से लगती है. ये यरूशलम के पूर्वी हिस्से से सटा हुआ है, जिस पर इज़रायल ने पहले ही कब्ज़ा कर लिया है.

चित्र में आप देख सकते हैं कि किस तरह वेस्ट बैंक तीन ओर से इजरायल से घिरा है. गाजा पट्टी उससे अलग नीचे नजर आ रहा है. (courtesy World atlus)
सवाल – वेस्ट बैंक किसके अधीन है, इसको कौन चलाता है, यहां किसकी सरकार है?
– अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र के मुताबिक यह फिलिस्तीन का क्षेत्र है. यहां की प्रशासनिक व्यवस्था फिलिस्तीनी अथॉरिटी के हाथों में है, जो 1990 के दशक में ओस्लो समझौते के बाद बनी थी. फिलिस्तीन अथारिटी पर राजनीतिक पार्टी है फतह का नियंत्रण है जबकि गाज़ा पट्टी पर हमास का शासन है. फिलिस्तीनी क्षेत्रों की दोहरी राजनीति चलती है – गाज़ा में हमास और वेस्ट बैंक में फतह.
सवाल – वेस्ट बैंक को प्रशासनिक तौर पर कैसे बांटा गया है?
– ओस्लो समझौते (1993-95) के अनुसार वेस्ट बैंक को तीन हिस्सों में बांटा गया.
एरिया A – यहां सुरक्षा और प्रशासन दोनों का जिम्मा फिलिस्तीनी अथॉरिटी का है. ये एरिया कुल क्षेत्रफल का करीब 18फीसदी है.
एरिया B – यहां प्रशासन फिलिस्तीनी का है, लेकिन सुरक्षा पर इज़रायल और फिलिस्तीन साझा जिम्मेदारी निभाते हैं. ये एरिया करीब 22फीसदी है.
एरिया C – सबसे बड़ा इलाका है, जो करीब 60% है. यहां सुरक्षा, प्रशासन और जमीन – सब कुछ इज़रायल के हाथों में है.
व्यवहार में, इज़रायल की फौज और बस्तियां एरिया C से लगातार वेस्ट बैंक पर पकड़ मजबूत करती जा रही हैं.
सवाल – वेस्ट बैंक की जनसंख्या कितनी है और उसकी डेमोग्राफी कैसी है?
– कुल आबादी – करीब 30 लाख फिलिस्तीनी अरब (2025 के अनुमान). इनमें से अधिकतर मुसलमान हैं, लेकिन थोड़ी संख्या में ईसाई भी रहते हैं. साथ ही यहां 7 लाख से ज्यादा इज़रायली भी अलग बस्तियां बनाकर बस चुके हैं. डेमोग्राफी में बड़ा बदलाव यह है कि 1970 में यहां पूरी तरह फिलिस्तीनी ही थे, लेकिन आज यहूदी बस्तियों के कारण वेस्ट बैंक का नक्शा “टुकड़ों में बंटा” हुआ है.

सवाल – इज़रायल की बस्तियां क्या हैं और इनका असर कैसा है?
– इज़रायल ने 1967 के युद्ध के बाद से वेस्ट बैंक में यहूदी बस्तियां बसानी शुरू कीं. इन बस्तियों में यहूदियों के लिए घर, सड़कें, स्कूल, अस्पताल और सैन्य चौकियां बनाई गईं. आज 150 से ज्यादा आधिकारिक बस्तियां और 100 से ज्यादा “आउटपोस्ट” मौजूद हैं. इन्होंने वेस्ट बैंक को इस तरह काट दिया है कि फिलिस्तीनी गांव और शहर आपस में अलग-थलग पड़ गए हैं. संयुक्त राष्ट्र और दुनिया के ज्यादातर देश इन्हें अवैध मानते हैं, लेकिन इज़रायल इन्हें “वैध” बताता है.
सवाल – वेस्ट बैंक की अर्थव्यवस्था कैसी है?
– वेस्ट बैंक की अर्थव्यवस्था कृषि, सेवाओं और थोड़े बहुत उद्योग पर टिकी है. जैतून का तेल, खजूर, अंगूर, संगमरमर पत्थर और टूरिज्म यहां के बड़े स्रोत हैं.
जीडीपी का बड़ा हिस्सा इज़रायल पर निर्भर है, क्योंकि फिलिस्तीनी मजदूर बड़ी संख्या में इज़रायल जाकर काम करते हैं. बेरोजगारी काफी ज्यादा है. करीब 17-18% लोग बेरोजगार हैं. हालांकि यहां के हालात गाज़ा के मुकाबले हालात बेहतर हैं, लेकिन बस्तियों और सैन्य नियंत्रण की वजह से विकास रुकता रहता है.
सवाल – वेस्ट बैंक की राजनीतिक स्थिति क्या है?
– यहां का प्रशासन फिलिस्तीनी अथॉरिटी संभालती है, लेकिन उसकी शक्तियां सीमित हैं. हर जगह इज़रायली सेना की चौकियां हैं और लोग बिना परमिट यात्रा नहीं कर सकते. 2007 से हमास और फतह की लड़ाई ने फिलिस्तीनी राजनीति को और कमजोर किया है. इससे इज़रायल को फायदा होता है, क्योंकि फिलिस्तीन अंदर से बंटा हुआ है.

सवाल – इज़रायल का वेस्ट बैंक पर दखल कैसा है?
– इज़रायली फौज पूरे वेस्ट बैंक में ऑपरेशन करती है. छापे मारती है. गिरफ्तारी करती है. सुरक्षा दीवार ने इलाके को टुकड़ों में बांट दिया है. लाखों यहूदियों को यहां बसाकर इस पूरे इलाके को धीरे धीरे इजरायल अपने कब्जे में लेता जा रहा है. इज़रायल अपने घरेलू कानून वेस्ट बैंक की बस्तियों में लागू करता है, जबकि फिलिस्तीनी इलाकों में सैन्य कानून चलता है. फिलिस्तीनियों को कई बार उनकी खेती की जमीन तक पहुंचने से रोका जाता है.
सवाल- क्या इज़रायल वेस्ट बैंक को पूरी तरह अपने में मिला लेना चाहता है?
– इज़रायल का आधिकारिक रुख अलग-अलग सरकारों में बदलता रहा है. दक्षिणपंथी पार्टियां (जैसे लिकुड) खुलकर कहती हैं कि वेस्ट बैंक का बड़ा हिस्सा “जूडिया और सामरिया” है और उसे इज़रायल में मिलाना चाहिए. 2020 में ट्रंप प्रशासन के दौरान “डील ऑफ द सेंचुरी” के तहत वेस्ट बैंक के कुछ हिस्सों को छीनकर इजरायल में मिलाने की योजना बनी थी.हालांकि अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते वह कदम नहीं उठा, लेकिन बस्तियों का विस्तार लगातार जारी है.

सवाल – फिलिस्तीनी लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी कैसी है?
– बार-बार चेकपोस्ट पर रोका जाता है. उनकी यात्राओं पर बहुत पाबंदी लगाई जाती है. रोजगार की सीमित संभावनाएं हैं, जो लगातार और कम होती जा रही हैं. कई इलाकों में पानी की आपूर्ति और बिजली तक इज़रायली नियंत्रण में है. गरीबी आम है, लेकिन साथ ही स्कूल और विश्वविद्यालयों का एक नेटवर्क भी है, जहां फिलिस्तीनी युवा पढ़ाई कर रहे हैं. तनाव और हिंसा की घटनाएं रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं.
सवाल – अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वेस्ट बैंक की स्थिति को कैसे देखा जाता है?
– संयुक्त राष्ट्र और यूरोपीय संघ मानते हैं कि वेस्ट बैंक भविष्य के स्वतंत्र फिलिस्तीन राज्य का हिस्सा होना चाहिए. अमेरिका ने पहले दो-राज्य समाधान का समर्थन किया था, लेकिन हाल के वर्षों में इज़रायल की बस्तियों पर उसका रुख ढीला पड़ा है. अरब देशों की तरफ से विरोध जारी है, लेकिन कई देशों ने इज़रायल से संबंध सुधार लिए हैं, जैसे संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को, जिससे फिलिस्तीनी दबाव कम हुआ है.
सवाल – आगे वेस्ट बैंक का भविष्य क्या हो सकता है?
– वेस्ट बैंक और गाज़ा मिलकर फिलिस्तीन बने. इज़रायल अलग रहे. यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे स्वीकार्य विकल्प है, लेकिन जमीन पर बस्तियों के फैलाव ने इसे मुश्किल बना दिया है. दूसरा विकल्प ये है कि वेस्ट बैंक को इज़रायल में मिला लिया जाए और फिलिस्तीनियों को नागरिकता दी जाए. इज़रायल इससे डरता है, क्योंकि फिलिस्तीनी जनसंख्या बढ़कर यहूदियों से ज्यादा हो सकती है. तीसरा विकल्प ये है कि मौजूदा स्थिति बनाए रखी जाए. यानि फिलिस्तीनी अथॉरिटी सीमित शक्ति के साथ और इज़रायल का बस्तियों के फैलाव के साथ उनका सैन्य नियंत्रण बना रहे, शायद ये तीसरा विकल्प ही लंबे समय तक चलता रहे.
जो प्रस्ताव 25 जुलाई को इजरायल की संसद में पेश हुआ
– 23 जुलाई 2025 को इजरायल की संसद नेसेट ने एक गैर बाध्यकारी कानून प्रस्ताव पारित किया, जो 71 बनाम 13 वोटों से पास हो गया. जिसमें कहा गया कि वेस्ट बैंक “यहूदी लोगों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मातृभूमि” है. सरकार को प्रस्ताव दिया गया कि बस्तियों वाले इलाकों में इज़रायली कानून, न्याय एवं प्रशासन लागू किया जाए. यह प्रस्ताव क़ानूनी बाध्यकारी नहीं था, इसका मतलब है कि इससे तुरंत कोई बदलाव नहीं हुआ, बल्कि यह एक राजनीतिक बयान था.
– वित्त मंत्री बेंजेएल स्मोट्रिच ने एक प्रस्ताव रखा है, जिसमें लगभग 82% वेस्ट बैंक क्षेत्र को इज़रायल में शामिल करने की बात कही गयी है. इस प्रस्ताव के तहत कुछ फिलिस्तीनी आबादी वाले बड़े शहरों को “आर्किपेलैगो” (छोटे टुकड़े) के रूप में छोड़ा जाएगा जबकि बाकी में इज़रायली संप्रभुता लागू होगी.
– 2 जुलाई 2025 को 14 इज़रायली मंत्रियों ने प्रधानमंत्री नेतन्याहू को लिखा कि वेस्ट बैंक पर संप्रभुता लागू की जाए.





