भारत » Europe Looking At PM Narendra Modi To Stop Russia Ukraine War, From France To Germany Leaders Calling India | कोई मिलने आ रहा, कोई फोन मिला रहा… अब PM मोदी से ही यूरोप को उम्मीद, ट्रंप से मोहभंग! रुकेगी रूस-यूक्रेन की जंग?

Europe Looking At PM Narendra Modi To Stop Russia Ukraine War, From France To Germany Leaders Calling India | कोई मिलने आ रहा, कोई फोन मिला रहा… अब PM मोदी से ही यूरोप को उम्मीद, ट्रंप से मोहभंग! रुकेगी रूस-यूक्रेन की जंग?

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यूरोप के नेताओं ने रूस-यूक्रेन युद्ध पर अब पीएम मोदी से उम्मीद लगाई है. फ्रांस, जर्मनी और ईयू के नेताओं ने सितंबर के पहले सप्ताह में ही भारत से संपर्क साधा है.

कोई मिलने आ रहा, कोई फोन मिला रहा… PM मोदी से यूरोप को उम्मीद, ट्रंप से मोहभंगट्रंप से मोहभंग, अब पीएम मोदी के भरोसे यूरोप (फाइल फोटोज)
नई दिल्ली: रूस-यूक्रेन युद्ध को रोक पाने की कोशिश में यूरोप और अमेरिका नाकाम रहे. फ्रांस से लेकर जर्मनी और यूरोपीय संघ तक, सबकी नजर अब एक ही शख्स पर टिक गई है: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी. यूरोप को अब भरोसा है कि अगर कोई संतुलन साध सकता है, तो वह भारत है. अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप से यूरोप का मोहभंग हो चुका है.

फ्रांस का दांव: मैक्रों ने मोदी को फोन लगाया

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने पीएम मोदी से टेलीफोन पर बातचीत की. दोनों नेताओं ने रूस-यूक्रेन संकट पर विचार साझा किए और शांति बहाली के प्रयासों पर सहमति जताई. दिलचस्प बात यह रही कि यह बातचीत सिर्फ युद्ध पर केंद्रित नहीं थी, बल्कि दोनों ने रक्षा, विज्ञान, तकनीक और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर भी सहयोग मजबूत करने की बात की. पीएम मोदी ने मैक्रों को अगले साल भारत में होने वाले AI Impact Summit में शामिल होने का न्योता भी दिया. यूरोप को साफ संदेश गया कि भारत सिर्फ युद्ध पर बात नहीं कर रहा, बल्कि भविष्य की टेक्नोलॉजी और सुरक्षा व्यवस्था में भी साझेदारी बढ़ाना चाहता है.

यूरोपीय संघ का PM मोदी पर भरोसा

कुछ ही दिन पहले पीएम मोदी ने यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयन से संयुक्त कॉल पर बातचीत की. यह कॉल दिखाता है कि यूरोप अब सीधे भारत को एक बड़े रणनीतिक भागीदार की तरह देख रहा है. बातचीत में न सिर्फ यूक्रेन युद्ध पर चर्चा हुई, बल्कि India-EU FTA (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) को जल्द से जल्द पूरा करने की बात भी हुई. भारत ने साफ कहा कि वह शांति का समर्थक है, लेकिन इसके साथ-साथ व्यापार और टेक्नोलॉजी साझेदारी को भी प्राथमिकता दी जाएगी.

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