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Bihar Chunav 2025: बिहार चुनाव 2025 में चिराग पासवान पहली बार जेडीयू के साथ एलजेपी (रामविलास) को चुनावी मैदान में उतारेंगे, लेकिन सीटों को लेकर उनकी स्थिति राजा त्रिशंकु जैसी क्यों बनी हुई है? क्या चिराग आकाश औ…और पढ़ें

न आकाश न पाताल... बिहार चुनाव 2025 में राजा 'त्रिशंकु' की तरह लटकेंगे चिराग?क्या चिराग पासवान राजा त्रिशंकु बनेंगे?

पटना.बिहार चुनाव में जो साल 2000 से नहीं हुआ, वह 2025 में होने जा रहा है. एलजेपी रामविलास के सुप्रीमो और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान की प्रतिष्ठा दांव पर है. जो काम उनके पिता स्वर्गीय रामविलास पासवान ने आज तक नहीं किया, वह काम चिराग पासवान 2025 में करने जा रहे हैं. लेकिन उनके सामने धर्मसंकट खड़ा है कि आकाश में जाएं, पाताल में जाएं या फिर त्रिशंकु की तरह न आकाश और न पाताल बीच में लटके रहें. बता दें कि राजा त्रिशंकु सशरीर स्वर्ग पहुंचने की इच्छा रखते थे, जो तत्कालीन ब्रह्मांडीय व्यवस्था के विरुद्ध था. विश्वामित्र ने उन्हें वचन दिया था कि वह सशरीर स्वर्ग भेज देंगे. उन्होंने किया भी यही. लेकिन इंद्र और अन्य देवताओं ने त्रिशंकु को स्वर्ग में प्रवेश करने से रोक दिया, जिससे त्रिशंकु वापस पृथ्वी की ओर गिरने लगे. विश्वामित्र ने अपने वादे को पूरा करने और अपनी तपस्या शक्ति का प्रदर्शन करते हुए त्रिशंकु को गिरने से रोक दिया और धरती और आकाश के बीच में एक नया स्वर्ग बना दिया. कमोबेश यही स्थिति चिराग पासवान के साथ बिहार चुनाव 2025 में हो सकती है. क्या चिराग पासवान 43 और 137 के बीच लटक जाएंगे या फिर धरती पर लेट जाएंगे?

चिराग पासवान के बहनोई और जमुई के सांसद अरुण भारती ने गुरुवार को एक बयान दिया है. भारती ने कहा, ‘उनकी पार्टी उम्मीद कर रही है कि एनडीए में उन्हें सम्मानजनक सीट मिलेगी. आज तक कभी भी जेडीयू और एलजेपी बिहार विधानसभा का चुनाव साथ-साथ नहीं लड़ी है. यह पहली बार होगा जब साल 2000 के बाद दोनों पार्टी साथ-साथ चुनाव लड़ेगी. साल 2015 में एनडीए में रहते हुए एलजेपी ने 43 सीटों पर चुनाव लड़ा और साल 2020 में अकेले 137 सीटों पर चुनाव लड़ा. मैं उम्मीद कर रहा हूं कि 43 और 137 सीटों के बीच मुझे सीट मिलना चाहिए. पार्टी ने यह इच्छा बीजेपी नेताओं को बता दिया है.’

अगर एलजेपी की 37 और 143 सीटों के बीच सीट पाने की जिद है तो 2025 में एनडीए की मौजूदा स्थिति में यह संभव नजर नहीं आ रहा है. ऐसे में चिराग की राजनीतिक स्थिति इस वक्त बिल्कुल उस राजा त्रिशंकु जैसी मानी जा रही है, जो न आकाश (सत्ता) तक पहुंच पा रहे हैं, न पाताल (विपक्ष) में जा सकते हैं और न ही स्पष्ट तौर पर जमीन पर खड़े दिख रहे हैं. 43 और 137 सीटों के बीच लटकती यह महत्वाकांक्षा अब सवाल बन गई है.

चिराग की पिता से आगे बढ़ने की जिद

एलजेपी संस्थापक स्व. रामविलास पासवान कभी भी विधानसभा राजनीति में खास दिलचस्पी नहीं दिखाई. लेकिन चिराग इस परंपरा को तोड़ते दिख रहे हैं. वे न केवल विधानसभा चुनाव में पार्टी का नेतृत्व करना चाहते हैं, बल्कि मुख्यमंत्री पद की दौड़ में ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आना चाहते हैं. पिछले कुछ महीनों में चिराग ने यह संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी 2025 में कम से कम 50–60 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. लेकिन सवाल उठता है कि किस गठबंधन के साथ? और किन शर्तों पर?

एनडीए में स्थिति कितनी जटिल है

बीजेपी 243 में से लगभग 160 सीटें अपने लिए आरक्षित रखना चाहती है. जेडीयू लगभग 80-90 सीटों की मांग कर रही है. बाकी बची कुछ सीटें उपेंद्र कुशवाहा की पारर्टी आऱएलडी, जीतन राम मांझी की पार्टी हम और अब लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) के बीच बंटनी हैं. ऐसे में चिराग के लिए 20 प्लस सीटों की मांग स्वीकार करना मुश्किल दिखता है. बीजेपी उन्हें केवल 10-20 सीटें देना चाहती है. वह भी शर्तों के साथ. चिराग के हालिया दौरे, जनसभाएं और सोशल मीडिया कैंपेन इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि वे सम्मानजनक हिस्सेदारी के बिना चुनाव में उतरने से नहीं हिचकिचाएंगे.

राजा त्रिशंकु क्यों?

त्रिशंकु ने जैसे सशरीर स्वर्ग जाने की ज़िद ठानी थी, चिराग भी मुख्यमंत्री पद की दौड़ से खुद को अलग नहीं दिखाना चाहते. हालांकि वे जानते हैं कि अकेले दम पर 243 में से 122 का बहुमत दूर की कौड़ी है. लेकिन अगर बिहार में त्रिशंकु विधानसभा बनती है जैसे 2000 में हुआ था, तो चिराग किंगमेकर बनने की स्थिति में आ सकते हैं. लेकिन ठीक त्रिशंकु की तरह, अगर बीजेपी और जेडीयू उन्हें ज्यादा सीटें नहीं देती और वे एनडीए में बने रहते हैं तो लटकाव की स्थिति में चले जाएंगे. न खुलकर सत्ता में, न विपक्ष में. अगर एनडीए से बाहर जाते हैं तो फिर विपक्ष उन्हें किस भूमिका में अपनाएगा, यह भी साफ नहीं है. यही वो राजनीतिक ‘त्रिशंकु’ की स्थिति है, जिसमें चिराग आज फंसे नजर आते हैं.

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रविशंकर सिंहचीफ रिपोर्टर

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा…और पढ़ें

भारतीय विद्या भवन से पत्रकारिता की पढ़ाई करने वाले रविशंकर सिंह सहारा समय न्यूज चैनल, तहलका, पी-7 और लाइव इंडिया न्यूज चैनल के अलावा फर्स्टपोस्ट हिंदी डिजिटल साइट में भी काम कर चुके हैं. राजनीतिक खबरों के अलावा… और पढ़ें

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न आकाश न पाताल… बिहार चुनाव 2025 में राजा ‘त्रिशंकु’ की तरह लटकेंगे चिराग?

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