UNFPA की यह रिपोर्ट जनसंख्या नियंत्रण, महिला स्वास्थ्य और परिवार नियोजन की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देती है, जो विकासशील देशों के लिए एक सबक है. आइए, इन आंकड़ों के पीछे की कहानी और इसके अर्थ पर विस्तार से नजर डालते हैं.
क्या कहती है रिपोर्ट?
टॉप देश: फिनलैंड, स्विट्जरलैंड, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम में 70% से अधिक महिलाएं गर्भनिरोधक का उपयोग करती हैं.
चीन का प्रदर्शन: चीन में यह दर 70% के करीब है, जो एशियाई देशों में एक मिसाल है.
भारत की स्थिति: भारत 57वें स्थान पर है, जहां आधी महिलाएं (करीब 50%) गर्भनिरोधक का उपयोग करती हैं.
2023-2025 के आंकड़े क्या कहते हैं?
UNFPA और विश्व बैंक के ताजा आंकड़ों (2023-2024) से पता चलता है कि वैश्विक स्तर पर गर्भनिरोधक उपयोग में सुधार हुआ है, लेकिन असमानताएं बनी हुई हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNFPA के अनुसार, विकासशील देशों में 25.7 करोड़ महिलाओं की गर्भनिरोधक जरूरतें पूरी नहीं हो रही हैं. भारत में PDHS 2017-18 के अनुसार कुल प्रजनन दर (TFR) 3.2 है, और गर्भनिरोधक दर 34% है, जो 2025 तक 60% तक बढ़ाने का लक्ष्य है. वैश्विक स्तर पर, 2021 में 1.9 अरब महिलाओं में से 87.4 करोड़ आधुनिक गर्भनिरोधक का उपयोग कर रही थीं.
भारत में गर्भनिरोध की राह में कैसे रोड़े?
भारत में जागरूकता और स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव के चलते गर्भनिरोधक का उपयोग सीमित है. ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति और भी कमजोर है. हालांकि, सरकार की ओर से चलाए जा रहे परिवार नियोजन कार्यक्रमों के चलते धीरे-धीरे सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहा है.
संयुक्त राष्ट्र की इस रिपोर्ट ने साफ़ कर दिया है कि यदि भारत को वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति मजबूत करनी है तो न केवल गर्भनिरोधक तक आसान पहुंच सुनिश्चित करनी होगी बल्कि महिलाओं को शिक्षित और जागरूक भी बनाना होगा.





