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Canada Alberta Karma : Trudeau Backing Khalistan | Alberta America 51st State | Mark Carney Alberta distress | कनाडा अल्बर्टा | खालिस्तान | मार्क कार्नी

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ओटावा : कनाडा को आज ठीक वैसे ही बबूल के कांटे चुभ रहे हैं, जैसा बबूल वो भारत के लिए उगा रहा था. कनाडा ने एक वक्त पर खालिस्तानी उग्रवादियों खूब पाला-पोसा, जो भारत को तोड़ने का सपना देख रहे थे उन्हें ‘शांतिप्रिय’ तक बता दिया गया. वहीं, अब कनाडा खुद अलगाववादियों की साजिश का सामना कर रहा है. भारत ने तो टुकड़े गैंग की साजिशों को नाकाम कर दिया लेकिन कनाडा के कर्मों का फल देखिए, इस देश का एक हिस्सा कटकर अलग होने कगार पर पहुंच गया है. अब कनाडा को अलगावादी ‘शांतिप्रिय’ नहीं लग रहे?

कनाडा में चल क्या रहा है?

कनाडा के भीतर ही अब ‘Wexit’ (Western Exit) जैसा आंदोलन जोर पकड़ रहा है. जिसकी वजह से यहां का अल्बर्टा प्रांत कटकर अलग होने वाला है. यहां के लोग जस्टिन ट्रूडो की नीतियों से पहले ही इतने तंग आ चुके थे कि वे कनाडा से अलग होने की मांग कर रहे थे.

ट्रूडो सरकार ने तेल और गैस से समृद्ध अल्बर्टा पर इतने कड़े पर्यावरण नियम और टैक्स थोप दिए थे कि वहां की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है. कार्ने के आने के बाद भी यहां के लोगों की राय बदली नहीं है. अल्बर्टा के लोग केंद्र सरकार से नाराज हैं और प्रांत को अलग करने की मांग कर रहे हैं. अलगाववादियों और केंद्र सरकार के बीच छिड़ी इस जंग को ब्रिटिश कोलंबिया के प्रीमियर डेविड एबी ने ‘देशद्रोह’ करार देते हुए इसे कनाडा को तोड़ने की एक गहरी साजिश बताया है.

ट्रूडो के किए की सजा भुगत रहे कार्नी

अब आलम यह है कि एक हालिया सर्वे के मुताबिक, वहां के 30 प्रतिशत लोग कनाडा से अलग होकर अपनी नई सल्तनत बनाने के पक्ष में खड़े हो गए हैं, जिससे मुल्क के दो टुकड़े होने का खतरा मंडराने लगा है.

इस ‘ग्रेट डिवाइड’ के बीच अब मार्क कार्नी एक संकटमोचक के रूप में सामने आए हैं, जिन्होंने अल्बर्टा के साथ एक मेगा डील साइन की है. इस पाइपलाइन समझौते से प्रशांत महासागर तक तेल पहुंचाने का रास्ता साफ हो सकता है, जिसे कनाडा की एकता को बचाने की आखिरी कोशिश माना जा रहा है. हालांकि, सवाल अब भी वही है कि क्या पाइपलाइन की यह डील उन लोगों का दिल जीत पाएगी जो ट्रूडो की नीतियों से लगी आग में झुलस रहे हैं?

ट्रंप ने आग में डाला घी

बताया जा रहा है कि ट्रंप कनाडा की आग में घी डालने का काम कर रहे हैं. वो कनाडा को अपना 51वां राज्य बनाने का सपना पूरा करने के लिए अल्बर्टा के गुस्से का इस्तेमाल कर सकते हैं. दावा किया जा रहा है कि अमेरिका के कुछ अधिकारियों ने गुपचुप तरीके से कनाडा के अलगाववादियों के साथ बैठकें की हैं, जिसमें देश में प्रदर्शन भड़काने की रणनीति तय की गई है.

भारत के खिलाफ साजिश को हवा दे चुके हैं जस्टिन ट्रूडो

  • इसी देश के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने अपनी सत्ता के दौरान भारत में किसानों के नाम पर उग्रवाद को हवा दी थी. उनकी ही नीतियों की वजह से कनाडा का एक हिस्सा अलग होने की बात कर रहा है, तो कार्ने सरकार की सांसें फूल रही हैं.
  • कनाडा ने दशकों तक खालिस्तानी तत्वों को अपनी धरती पर फलने-फूलने दिया. मीडिया रिपोर्ट्स में दाला किया जाता है कि यहां आज स्थिति यह है कि कनाडा की राजनीति, पुलिस और व्यापार में इन चरमपंथियों की गहरी पैठ हो चुकी है.
  • कनाडा की सड़कों पर अब सरेआम गोलियां चलती हैं. भारत के खिलाफ साजिश रचने वाले ये आतंकी अब कनाडा के भीतर ही वसूली, ड्रग तस्करी और फिरौती का धंधा चला रहे हैं.
  • ‘अभिव्यक्ति की आजादी’ के नाम पर मंदिरों पर हमले और हिंदुओं को डराने-धमकाने की घटनाओं ने कनाडा के सामाजिक ढांचे को खोखला कर दिया है. ट्रूडो की इतने खराब प्रधानमंत्री साबित हुए कि उन्हें पार्टी से भी इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया था फिर उन्हीं की लिबरल पार्टी ऑफ कनाडा से मार्क कार्ने ने कुर्सी संभाली थी.

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