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Best Workplaces: वाह! काम करने के लिए ये है एशिया का नंबर 1 देश, नाम जानकर गर्व से भर जाएंगे आप

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Best Workplaces: भारत अब केवल आउटसोर्सिंग या आईटी हब के तौर पर ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों को बेहतर कार्य अनुभव देने वाले देशों में भी टॉप पर आ गया है.

वाह! काम करने के लिए ये है एशिया का नंबर 1 देश, नाम जानकर गर्व से भर जाएंगे आपBest Workplaces: भारतीय कंपनियों का वर्क कल्चर अब बदल रहा है
नई दिल्ली (Asia’s Best Workplaces). आज के समय में केवल अच्छी सैलरी या सुविधाएं ही किसी कंपनी की USP नहीं होती हैं, बल्कि पॉजिटिव वर्क कल्चर भी उतना ही अहम हो गया है. एंप्लॉइज अब ऐसे वर्कप्लेस की तलाश करते हैं, जहां उन्हें सम्मान मिले, उनकी राय को महत्व दिया जाए और वे अपने करियर को सिक्योर महसूस करें. हाल ही में जारी हुई ग्लोबल रिपोर्ट Great Place To Work साबित कर दिया है कि भारत इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, एशिया की 100 टॉप वर्कप्लेस में 48 कंपनियां भारत से हैं. साथ ही 12 भारतीय कंपनियों ने मिड-साइज श्रेणी में भी जगह बनाई है. यह न केवल भारतीय कंपनियों के लिए गर्व की बात है, बल्कि ग्लोबल वर्क कल्चर में भारत की बढ़ती पहचान को भी दर्शाता है. भारतीय कंपनियां अब सिर्फ अपने प्रोडक्ट्स और सर्विसेज के लिए ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों को दिए जाने वाले अनुभव के लिए भी जानी जा रही हैं. रिपोर्ट के अनुसार, इन वर्कप्लेस में एंप्लॉइज ज्यादा कॉन्फिडेंस महसूस करते हैं.

ग्रेट प्लेस टू वर्क इन एशिया

ग्रेट प्लेस टू वर्क की रिपोर्ट ने कई पॉजिटिव पहलुओं की जानकारी दी है. इसमें कहा गया है कि भारतीय कंपनियों में कर्मचारियों को मिलने वाली बराबरी और निष्पक्षता की भावना तेजी से मजबूत हुई है. उदाहरण के लिए, इस बार 91% कर्मचारियों ने माना कि वे अपने कार्यस्थल के डिसीजन प्रोसेस में शामिल हैं. पिछले साल की तुलना में यह संख्या बढ़ी है. इसी तरह से 86% कर्मचारियों ने कहा कि उनके मैनेजर उनसे निष्पक्ष व्यवहार करते हैं. 93% से अधिक कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर बराबरी का अनुभव किया.

भारत की बड़ी उपलब्धि

  • 100 में से 48 भारतीय कंपनियां बड़ी कैटेगरी की लिस्ट में शामिल.
  • 12 कंपनियां मिड-साइज़ कैटेगरी में शामिल.
  • भारत इस रिपोर्ट में एशिया में सबसे ऊपर.
  • यह उपलब्धि भारत के बेहतरीन वर्क कल्चर और ग्लोबल मान्यता को दर्शाती है.
  • कर्मचारियों के अनुभव में सुधार हुआ है.
  • निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने वाले कर्मचारियों की संख्या 86% से बढ़कर 91% हुई है.
  • मैनेजर द्वारा निष्पक्ष व्यवहार का अनुभव करने वाले 86% हो गए हैं (पिछले साल 83% थे).
  • 93% से अधिक कर्मचारियों ने कार्यस्थल पर बराबरी का अनुभव किया.

आ गई एक्सपर्ट की राय

ग्रेट प्लेस टू वर्क के सीईओ माइकल सी. बुश ने कहा कि ये कंपनियां सिर्फ अच्छा काम नहीं कर रही हैं, बल्कि कम्युनिटीज को मजबूत बनाने, राष्ट्रों को आगे बढ़ाने और दुनिया को बेहतर स्थान बनाने में भी अहम योगदान दे रही हैं. उनका मानना है कि भारतीय कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी इस बात का सबूत है कि देश अब ग्लोबल वर्कप्लेस एक्सीलेंस का केंद्र बन रहा है.

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Deepali Porwal

Having an experience of more than 10 years, she loves to write on anything and everything related to lifestyle (health, beauty, fashion, travel, astrology, numerology), entertainment and career. She has covered…और पढ़ें

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