विदेश » कैसे बनारस से शुरू हुई नेपाल की जस्टिस सुशीला की लव स्टोरी, पति 40 साल क्यों रहे भारत की जेल में

कैसे बनारस से शुरू हुई नेपाल की जस्टिस सुशीला की लव स्टोरी, पति 40 साल क्यों रहे भारत की जेल में

Facebook
Twitter
WhatsApp

नेपाल की अंतरिम प्रमुख बनने के लिए सबसे मजबूत दावेदार मानी जा रहीं नेपाल की पूर्व चीफ जस्टिस सुशीला कार्की की लव स्टोरी बहुत रोचक है. ये बनारस से शुरू हुई थी. वैसे बनारस यूं भी उनके जीवन का खास पड़ाव रहा है. इसी जगह उन्होंने दो साल रहकर पढ़ाई की. यहीं उन्हें अपना जीवनसाथी मिला. हालांकि उनके पति को विमान अपहरण के मामले में 40 सालों तक भारत की जेल में रहना पड़ा.

सुशीला कार्की नेपाल की सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायमूर्ति थीं. उन्होंने 11 जुलाई 2016 को यह पद संभाला. 6 जून 2017 तक इस पद पर काम किया. वैसे वह वर्ष 2009 में ही एक न्यायाधीश के तौर पर नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में शामिल हो गईं थीं. उनका कार्यकाल न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.

उन्हें ऐसे मु्ख्य न्यायाधीश के तौर पर भी याद किया जाता है, जिसने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के खिलाफ कई फैसले दिए. सरकार के कई कामों की फैसलों के जरिए आलोचना की तो कभी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया.

बीएचयू में पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई करने आईं

सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर, नेपाल में हुआ था.उनकी शुरुआती शिक्षा विराटनगर में ही हुई. नेपाल के मेघावी छात्र काफी संख्या में बनारस के बनारस हिंदू विश्व विद्यालय (बीएचयू) में पढ़ने आते हैं. इसी वजह इस यूनिवर्सिटी ने नेपाल को कई प्रधानमंत्री और आला नेता दिए हैं. सुशीला यहां राजनीति विज्ञान से एमए करने आयीं. यहां उन्होंने दो साल तक पढाई की. बनारस हर लिहाज से उनकी जिंदगी का अहम पड़ाव था.

जब सुशीला बीएचयू आईं तो ये 70 के दशक की शुरुआत का समय था. उसी समय बीएचयू में नेपाल का एक जोशीले नेता भी पढ़ाई कर रहा था. उनका नाम था दुर्गा प्रसाद सुबेदी. तब नेपाल में पंचायत शासन चल रहा था. बनारस में पढ़ रहे नेपाली युवाओं का एक वर्ग इस व्यवस्था का विरोधी था. इन छात्रों ने एक ग्रुप बनाया हुआ था.

Generated image

मीटिंग के दौरान ही मिले थे दोनों

अपने देश के हालात पर उनके बीच हमेशा मीटिंग होती. चर्चा और बहस होती कि देश के इस हालात से कैसे निपटा जाए. कई क्रांतिकारी योजनाएं बनतीं. इस ग्रुप में तब सुशीला कार्की भी थीं और दुर्गा प्रसाद सुबेदी भी. यहीं पर दोनों के बीच आपस में परिचय हुआ. दोनों बहुत मुखर थे. वैचारिक तौर पर काफी प्रखर. दोनों एक दूसरे से प्रभावित हुए. एक दूसरे करीब आने लगे. नेपाल में राजनीतिक बदलाव की लहरें चल रही थीं. दोनों की जोड़ी लोकतांत्रिक विचारों से प्रेरित थी.

बनारस में प्रेम हुआ और फिर शादी

जब दोनों का मिलना जुलना बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कैंपस में होने लगा. ये मुलाकातें प्रेम में बदल गईं. दोनों साथ दिखने लगे. माना जाता है कि बीएचयू के दिनों में ही उन्होंंने शादी कर ली. ये शादी बनारस में हुए दोनों के प्रेम की परिणति थी. दोनों की जोड़ी को नेपाल में सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. बीएचयू से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुशीला काठमांडु के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई करने गईं. तो दुर्गा नेपाल में पूरी तरह से राजनीति में कूद गए.

नेपाल की रिटायर्ड चीफ जस्टिस सुशीला कार्की 73 वर्ष की हैं. उन्होंने कहा है कि वह नेपाल की अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं

पति ने विमान का अपहरण कर सनसनी मचाई

शादी के बाद दुर्गा सुबेदी नेपाली कांग्रेस के एक प्रमुख युवा नेता के रूप में उभरने लगे. उन्होंने नेपाल में पंचायत शासन के विरोध में आंदोलन शुरू किया. शुरू में सुशीला भी राजनीति के क्षेत्र में सक्रिय हुईं लेकिन फिर उन्होंने वकालत का पेशा अपना लिया. फिर अपनी एक पहचान बनाई. इसी ने उनके न्याय पालिका में जाने का रास्ता मजबूत किया. वह नेपाल के बेखौफ न्यायाधीश के तौर पर जानी जाती हैं, जो किसी दबाव में नहीं आती थीं.  वहीं उनके पति ने पंचायत शासन के खिलाफ और लोकतंत्र के समर्थन में नेपाल के सरकारी विमान का अपहरण कर लिया. इससे सनसनी फैल गई. इसे आज भी नेपाल प्लेन हाइजेकिंग केस, 1973 के नाम से जाना जाता है.

हाईजैक करके विमान भारत में उतारा गया

दुर्गा प्रसाद सुबेदी और उनके साथियों ने नेपाल में लोकतंत्र की बहाली के लिए नेपाल सरकार के एक विमान को अपहरण कर भारत के फारबिसगंज हवाई अड्डे पर उतारा. इस विमान में 30 लाख भारतीय रुपये थे, जो नेपाल सरकार के थेयह कदम नेपाल में लोकतंत्र बहाली की लड़ाई में साहसिक मील का पत्थर माना गया. लेकिन भारत सरकार ने दुर्गा प्रसाद को गिरफ्तार करके दमदम केंद्रीय कारागार में बंद कर दिया.

40 सालों तक भारत की जेल में रहे

उन्हें लंबे समय तक बिना रिहाई के जेल में रखा गया. यह पूरी अवधि लगभग 40 वर्षों तक चली, क्योंकि भारत और नेपाल के बीच राजनीतिक सहमति और समझौते नहीं बन पाए थे.

2013 में दुर्गा प्रसाद सुबेदी को नेपाल वापस बुलाया गया. नेपाल सरकार ने उनके इलाज और जीवन के देखभाल की जिम्मेदारी ली. उनका संघर्ष नेपाल में लोकतंत्र संघर्ष का प्रतीक बन गया. हालांकि ये भी कहना चाहिए कि जस्टिस सुशीला और दुर्गा प्रसाद का प्रेम और शादी लोकतंत्र संघर्ष की भेंट ज्यादा चढ़ गई. दोनों शादी के जल्द बाद ही बिछुड़ गए. फिर लंबे समय तक अकेले ही रहे. दोनों की एक बेटी है लेकिन वह सार्वजनिक जीवन से दूर रहती है.

रिटायर्ड चीफ जस्टिस सुशीला कुमारी का नाम अब नेपाल के अंतरिम प्रमुख के तौर पर लिया जा रहा है तो केवल इसीलिए क्योंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रहने के दौरान अपने फैसलों से भ्रष्टाचार और अवसरवादी राजनीति के खिलाफ देश में एक उम्मीद जगाई थी.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी