सुशीला कार्की नेपाल की सर्वोच्च न्यायालय की पहली महिला मुख्य न्यायमूर्ति थीं. उन्होंने 11 जुलाई 2016 को यह पद संभाला. 6 जून 2017 तक इस पद पर काम किया. वैसे वह वर्ष 2009 में ही एक न्यायाधीश के तौर पर नेपाल के सुप्रीम कोर्ट में शामिल हो गईं थीं. उनका कार्यकाल न्यायपालिका में महिलाओं की भागीदारी और स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
बीएचयू में पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई करने आईं
सुशीला कार्की का जन्म 7 जून 1952 को बिराटनगर, नेपाल में हुआ था.उनकी शुरुआती शिक्षा विराटनगर में ही हुई. नेपाल के मेघावी छात्र काफी संख्या में बनारस के बनारस हिंदू विश्व विद्यालय (बीएचयू) में पढ़ने आते हैं. इसी वजह इस यूनिवर्सिटी ने नेपाल को कई प्रधानमंत्री और आला नेता दिए हैं. सुशीला यहां राजनीति विज्ञान से एमए करने आयीं. यहां उन्होंने दो साल तक पढाई की. बनारस हर लिहाज से उनकी जिंदगी का अहम पड़ाव था.

मीटिंग के दौरान ही मिले थे दोनों
बनारस में प्रेम हुआ और फिर शादी
जब दोनों का मिलना जुलना बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के कैंपस में होने लगा. ये मुलाकातें प्रेम में बदल गईं. दोनों साथ दिखने लगे. माना जाता है कि बीएचयू के दिनों में ही उन्होंंने शादी कर ली. ये शादी बनारस में हुए दोनों के प्रेम की परिणति थी. दोनों की जोड़ी को नेपाल में सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. बीएचयू से राजनीति शास्त्र की पढ़ाई पूरी करने के बाद सुशीला काठमांडु के त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में कानून की पढ़ाई करने गईं. तो दुर्गा नेपाल में पूरी तरह से राजनीति में कूद गए.

नेपाल की रिटायर्ड चीफ जस्टिस सुशीला कार्की 73 वर्ष की हैं. उन्होंने कहा है कि वह नेपाल की अंतरिम सरकार का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं
पति ने विमान का अपहरण कर सनसनी मचाई
हाईजैक करके विमान भारत में उतारा गया
दुर्गा प्रसाद सुबेदी और उनके साथियों ने नेपाल में लोकतंत्र की बहाली के लिए नेपाल सरकार के एक विमान को अपहरण कर भारत के फारबिसगंज हवाई अड्डे पर उतारा. इस विमान में 30 लाख भारतीय रुपये थे, जो नेपाल सरकार के थेयह कदम नेपाल में लोकतंत्र बहाली की लड़ाई में साहसिक मील का पत्थर माना गया. लेकिन भारत सरकार ने दुर्गा प्रसाद को गिरफ्तार करके दमदम केंद्रीय कारागार में बंद कर दिया.
40 सालों तक भारत की जेल में रहे
2013 में दुर्गा प्रसाद सुबेदी को नेपाल वापस बुलाया गया. नेपाल सरकार ने उनके इलाज और जीवन के देखभाल की जिम्मेदारी ली. उनका संघर्ष नेपाल में लोकतंत्र संघर्ष का प्रतीक बन गया. हालांकि ये भी कहना चाहिए कि जस्टिस सुशीला और दुर्गा प्रसाद का प्रेम और शादी लोकतंत्र संघर्ष की भेंट ज्यादा चढ़ गई. दोनों शादी के जल्द बाद ही बिछुड़ गए. फिर लंबे समय तक अकेले ही रहे. दोनों की एक बेटी है लेकिन वह सार्वजनिक जीवन से दूर रहती है.
रिटायर्ड चीफ जस्टिस सुशीला कुमारी का नाम अब नेपाल के अंतरिम प्रमुख के तौर पर लिया जा रहा है तो केवल इसीलिए क्योंकि उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस रहने के दौरान अपने फैसलों से भ्रष्टाचार और अवसरवादी राजनीति के खिलाफ देश में एक उम्मीद जगाई थी.





