India Singapore relations: कब और कैसे शुरू हुआ रिश्ता?
भारत और सिंगापुर का रिश्ता 24 अगस्त 1965 को शुरू हुआ जब सिंगापुर को आजादी मिली और भारत उन पहले देशों में था जिसने इसे मान्यता दी. उस समय सिंगापुर को चीन समर्थित कम्युनिस्ट खतरों और पड़ोसी देशों के दबाव का डर था.उस समय भारत को एक मजबूत साझेदार के रूप में देखा गया, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और व्यापार में मदद कर सकता था.1819 में जब ब्रिटिश अधिकारी सर स्टैमफोर्ड रैफल्स ने सिंगापुर में व्यापारिक केंद्र बनाया तब से भारत के साथ व्यापारिक और सांस्कृतिक रिश्ते शुरू हो गए थे. उस समय सिंगापुर कोलकाता से शासित होता था और ये रिश्ता ब्रिटिश काल तक चला. 1943 में सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर से आजाद हिंद फौज का गठन किया जो भारत की आजादी की लड़ाई में अहम कदम था.
60 साल में क्या-क्या हुआ?
रक्षा और सुरक्षा में भी साथ-साथ
दोनों देश SIMBEX (नौसेना) और अग्नि वॉरियर (सेना) जैसे संयुक्त सैन्य अभ्यास करते हैं.2017 में नौसेना सहयोग समझौता हुआ जिसके तहत दोनों देशों की नौसेनाएं एक-दूसरे के बेस पर रिफ्यूलिंग और सप्लाई ले सकती हैं.दोनों देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और शांति के लिए मिलकर काम करते हैं.
9% आबादी भारतीय
लॉरेंस वोंग की भारत यात्रा: क्या है खास?
सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग 2-4 सितंबर 2025 तक भारत में हैं. ये उनकी पहली भारत यात्रा है और वो अपनी पत्नी और एक हाई-लेवल डेलिगेशन के साथ आए हैं. इस दौरान कई बड़े कदम उठाए जा रहे हैं. इसके तहत नौवहन,नागरिक उड्डयन,अंतरिक्ष,डिजिटल टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर जैसे क्षेत्रों में नए समझौते होंगे.4 सितंबर को सिंगापुर के पीएम वोंग और पीएम नरेंद्र मोदी महाराष्ट्र में एक कंटेनर टर्मिनल का वर्चुअल उद्घाटन करेंगे. इस प्रोजेक्ट में सिंगापुर की पोर्ट अथॉरिटी ने 1 अरब डॉलर से ज्यादा का निवेश किया है.वोंग राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू,विदेश मंत्री एस जयशंकर और अन्य मंत्रियों से मिलेंगे. क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा होगी.
60 साल का जश्न
क्यों खास है ये रिश्ता?
सिंगापुर भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी का अहम हिस्सा है.ये भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में मजबूत बनाता है.सिंगापुर भारत के लिए ASEAN में एक गेटवे की तरह है. दोनों देश G20, कॉमनवेल्थ और इंडियन ओशन रिम एसोसिएशन जैसे मंचों पर साथ काम करते हैं.
अब आगे क्या होगा?
वोंग की इस यात्रा से दोनों देशों के बीच नई तकनीक, हरित ऊर्जा, और स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स में सहयोग बढ़ेगा.सिंगापुर की कंपनियां भारत में और निवेश करेंगी और भारत की कंपनियां सिंगापुर को अपने ग्लोबल ऑपरेशंस का हब बनाएंगी.ये रिश्ता न सिर्फ आर्थिक,बल्कि सांस्कृतिक और रणनीतिक रूप से भी और मजबूत होगा.





