भारत » राइफल से खुद को कोई गोली मार सकता है क्या? मध्य प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट क्यों पूछ रही ये सवाल

राइफल से खुद को कोई गोली मार सकता है क्या? मध्य प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट क्यों पूछ रही ये सवाल

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Supreme Court: भोपाल की शूटिंग अकादमी में 17 साल के छात्र की संदिग्ध मौत पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं. कोर्ट ने कहा कि क्या राइफल से खुद सीने में गोली मारना संभव है? सरकार से हलफनामा मांगा गया है.

राइफल से खुद को कोई गोली मार सकता है क्या? एमपी सरकार से SC क्यों पूछ रही सवालमध्य प्रदेश सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने ये सवाल किया है.

सुप्रीम कोर्ट के सामने एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया, क्या कोई इंसान खुद राइफल से अपने सीने में गोली मार सकता है? कोर्ट ने इस सवाल को गंभीर माना और अब मध्य प्रदेश सरकार से इस पर हलफनामा देने को कहा है. सोमवार को जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस उज्जल भुइयां की बेंच ने साफ कहा कि यह जांच होना जरूरी है.

जज ने कहा क्योंकि आम समझ से देखो तो राइफल से खुद को सीने में गोली मारना आसान नहीं लगता. इसी वजह से कोर्ट ने राज्य सरकार से डिटेल रिपोर्ट मांगी है. इसमें पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जांच एजेंसी द्वारा जुटाए गए सबूत और राइफल की जब्ती से लेकर उसकी लंबाई तक की जानकारी शामिल करनी होगी.

क्या है पूरा मामला?
असल कहानी भोपाल की एक शूटिंग अकादमी से जुड़ी है. यहां 17 साल के एक लड़के ने सुसाइड कर लिया. आरोप है कि अकादमी के ही कुछ छात्रों और एक आरोपी ने उस पर 40 हजार रुपये चोरी करने का इल्जाम लगाया. फिर उस पर दबाव बनाया गया कि वह चोरी कबूल करे. लड़के की पिटाई भी हुई, उसका
फोन छीना गया और उससे जबरन मैसेज भिजवाए गए.

इस दबाव को झेल न पाने पर उसने अपनी जान दे दी. मरने से पहले उसने अपने दोस्त और बहन को बताया भी था कि वह आत्महत्या कर रहा है. यहां तक कि उसने दोस्त के पास एक सुसाइड नोट भी छोड़ा, जिसमें साफ-साफ अकादमी के छात्रों को जिम्मेदार ठहराया गया.

जमानत देने से इनकार
लगभग एक महीने बाद
FIR दर्ज हुई. पहले सेशन कोर्ट ने आरोपी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया. लेकिन हाईकोर्ट ने उसे राहत दे दी. हाईकोर्ट ने यह भी मान लिया कि मृतक की उम्र 18 साल थी, जबकि असल में वह 17 का था. याचिकाकर्ता यानी लड़के के पिता का आरोप है कि हाईकोर्ट ने पूरे मामले को हल्के में लिया और आरोपियों के कृत्यों को नजरअंदाज कर दिया.

पिता का कहना है कि आरोपी प्रभावशाली परिवार से है और FIR दर्ज होने के बाद भी वह जांच में शामिल नहीं हुआ. ऐसे में उससे हिरासत में पूछताछ जरूरी है. अब सुप्रीम कोर्ट इस पूरे मामले की बारीकी से जांच चाहता है और इसी वजह से मध्य प्रदेश सरकार से हलफनामा मांग लिया गया है.

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