यह घटना एक दुर्लभ ‘कैनिबल CME’ (कोरोनल मास इजेक्शन) के कारण हुई, जिसमें सूरज से निकला एक CME दूसरे को ओवरटेक कर एक शक्तिशाली विस्फोट में तब्दील हो गया. इससे दुनिया भर की पावर ग्रिड, सैटेलाइट्स और संचार प्रणालियों पर भी खतरा मंडरा रहा है.
कैसे शुरू हुआ यह सौर तूफान?
इस तूफान से कैसा खतरा?
इस टक्कर ने सौर हवाओं की गति को अचानक बढ़ा दिया और पृथ्वी के मैग्नेटोस्फीयर को संकुचित कर दिया. नतीजतन, G1 (मामूली) से G3 (मजबूत) स्तर के जियोमैग्नेटिक तूफान शुरू हो गए. इन तूफानों के कारण उत्तरी अमेरिका, यूरोप और एशिया में सामान्य से बहुत नीचे के अक्षांशों पर ऑरोरा का शानदार नजारा देखने को मिल सकता है. लेकिन इसके साथ ही कई तकनीकी जोखिम भी सामने आए हैं:
सैटेलाइट्स: बढ़ा हुआ ड्रैग सैटेलाइट्स की कक्षा को प्रभावित कर सकता है.
संचार प्रणाली: हाई-फ्रीक्वेंसी रेडियो और GPS सिग्नल्स में व्यवधान की आशंका.
Kp इंडेक्स: जियोमैग्नेटिक गड़बड़ी का मापक Kp इंडेक्स 6 से ऊपर जाने की उम्मीद, जो तूफान की तीव्रता को दर्शाता है.
कैनिबल CME क्यों इतना खतरनाक?
कैनिबल CME को वैज्ञानिक बेहद खतरनाक बताते हैं. इसमें मजबूत चुंबकीय क्षेत्र और घना प्लाज्मा होता है, जो पृथ्वी के अंतरिक्ष पर्यावरण पर गहरा असर डालता है. यह लंबे समय तक चलने वाले और जियोमैग्नेटिक तूफानों को जन्म दे सकता है. विशेषज्ञों का कहना है कि सौर चक्र 25 अपने चरम की ओर बढ़ रहा है, जिसके चलते आने वाले महीनों में ऐसी घटनाएं और आम हो सकती हैं.
अंतरिक्ष मौसम वैज्ञानिक और तकनीकी ऑपरेटर इस तूफान के प्रभावों पर नजर रखे हुए हैं. NASA और NOAA की टीमें लगातार मॉनिटरिंग कर रही हैं, जबकि सैटेलाइट ऑपरेटर संभावित रुकावटों से निपटने के लिए तैयार हैं.





