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Supreme Court News: 18 साल से चली आ रही थी कानूनी खामी, सुप्रीम कोर्ट ने अब किया सुधार, लाखों लोगों को बड़ी राहत

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Agency:एजेंसियां

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Supreme Court News: सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता फोरम के सभी आदेशों को सिविल कोर्ट डिक्री जैसा लागू करने का ऐतिहासिक फैसला सुनाया, जिससे लाखों उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिलेगी.

सुप्रीम कोर्ट ने सुधार ली 18 साल से जारी खामी, लाखों लोगों को मिल गई बड़ी राहतसुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 18 साल से जारी खामी दूर हो गई
सुप्रीम कोर्ट ने उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा एक अहम फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि उपभोक्ता फोरम केवल अंतरिम आदेश ही नहीं, बल्कि अपने सभी आदेशों को लागू करा सकते हैं. अदालत ने कहा कि उपभोक्ता फोरम के आदेशों को अब सिविल कोर्ट के डिक्री की तरह लागू माना जाएगा. सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से 18 साल से जारी खामी दूर हो गई. इसके साथ ही उन लाखों उपभोक्ताओं को राहत मिलेगी, जिन्हें अब तक केवल कागज़ पर ही न्याय मिलता था, व्यावहारिक रूप से नहीं.

जस्टिस जेके माहेश्वरी और जस्टिस राजेश बिंदल की बेंच ने शुक्रवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि 2002 में उपभोक्ता संरक्षण कानून में किए गए संशोधन ने उपभोक्ता फोरम की ताकत को गलत तरीके से सीमित कर दिया था. दरअसल, उस संशोधन में ‘हर आदेश’ शब्द की जगह ‘अंतरिम आदेश’ लिख दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने माना कि यह बदलाव उपभोक्ताओं के लिए भारी नुकसानदेह साबित हुआ और 2019 में संसद की तरफ से सुधार किए जाने तक यह स्थिति बनी रही.

अदालत ने साफ किया कि 1986 के कानून की धारा 25 को इस तरह पढ़ा जाना चाहिए कि उपभोक्ता फोरम किसी भी आदेश को लागू करा सके. सुप्रीम कोर्ट बेंच ने कहा, ‘न्याय पाने वाले उपभोक्ता को यह महसूस होना चाहिए कि उसे वास्तव में न्याय मिला है, केवल कागजों पर नहीं.’

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद पुणे की पाम ग्रोव्स कोऑपरेटिव हाउसिंग सोसायटी से जुड़ा था. 2007 में जिला उपभोक्ता फोरम ने बिल्डर को सोसायटी के पक्ष में डीड ऑफ कंवेंस निष्पादित करने का आदेश दिया था. लेकिन 2002 संशोधन का हवाला देते हुए ऊपरी फोरम्स ने इस आदेश को खारिज कर दिया. अब सुप्रीम कोर्ट ने उन फैसलों को पलटते हुए साफ कर दिया कि ऐसे आदेश लागू करने योग्य हैं.

आंकड़े बताते हैं उपभोक्ताओं की परेशानी

अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणि ने अदालत को बताया कि 2002 संशोधन के बाद उपभोक्ताओं की स्थिति बेहद खराब हो गई. 1992 से 2002 के बीच जिला फोरम्स में 1,470 याचिकाएं लंबित थीं. 2003 से 2019 के बीच यह बढ़कर 42,118 हो गईं, और 2020 से 2024 के बीच यह और बढ़कर 56,578 तक पहुंच गईं. इसी तरह राज्य फोरम्स में 6,104 और राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में 1,945 मामले लंबित पाए गए.

बढ़ती लंबित याचिकाओं पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने NCDRC के चेयरमैन को जल्द से जल्द इन मामलों का निपटारा करने के निर्देश दिए. साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता को न्याय मित्र (Amicus Curiae) नियुक्त किया गया है ताकि प्रवर्तन व्यवस्था को और मजबूत करने पर सुझाव दिए जा सकें.

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Saad Omar

An accomplished digital Journalist with more than 13 years of experience in Journalism. Done Post Graduate in Journalism from Indian Institute of Mass Comunication, Delhi. After Working with PTI, NDTV and Aaj T…और पढ़ें

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