रविवार को बिहार के सासाराम में कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने अपनी ‘वोटर अधिकार यात्रा’ की शुरुआत करते हुए निर्वाचन आयोग और बीजेपी पर एक बार फिर से ‘वोट चोरी’ का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने दावा किया कि मतदाता सूची में हेरफेर कर लोकतंत्र को कमजोर किया जा रहा है. इस यात्रा का मकसद बिहार में विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया के जरिए कथित तौर पर मतदाताओं के अधिकारों पर हो रहे हमले को उजागर करना था. लेकिन चुनाव आयोग ने राहुल की सभा के कुछ ही देर बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके आरोपों का ‘कट टू कट’ जवाब दे दिया, जिसने अब सियासी हलकों में हंगामा मचा दिया है.
राहुल गांधी के हर सवाल का ईसी ने दिया जवाब
बता दें कि राहुल गांधी ने 7 अगस्त 2025 को दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कर्नाटक के बेंगलुरु सेंट्रल लोकसभा क्षेत्र के महादेवपुरा विधानसभा का उदाहरण देते हुए दावा किया था कि वहां 1,00,250 फर्जी वोट डाले गए. उन्होंने आंकड़े पेश कर कहा कि डुप्लीकेट वोटर, गलत पते और फर्जी फोटो के जरिए वोटर लिस्ट में हेरफेर हुआ. लेकिन चुनाव आयोग ने इन दावों को बेबुनियाद करार दिया. यूपी के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने 7 अगस्त को एक एक्स पोस्ट में खुलासा किया कि राहुल द्वारा उल्लेखित दो वोटर, आदित्य श्रीवास्तव और विशाल सिंह, केवल कर्नाटक में ही पंजीकृत हैं, न कि लखनऊ या वाराणसी में, जैसा कि दावा किया गया था.
क्या फिर भी वोट चोरी का मामला गर्माएगा?
राहुल के आरोपों और आयोग के जवाब ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले सियासी माहौल को गरमा दिया है. जहां कांग्रेस और विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ इसे जनता के बीच ले जाने की कोशिश में हैं, वहीं बीजेपी ने इसे ‘मीडिया स्टंट’ करार दिया. अब सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी कोर्ट में अपने दावों को साबित करेंगे या यह विवाद महज सियासी शोर बनकर रह जाएगा? अगर चुनाव आयोग पर इस तरह के आरोप लगते रहेंगे तो हो सकता है चुनाव आयोग एफआईआर दर्जा कर राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं पर यह साबित करने का दवाब बनाए. बहरहाल, लोकतंत्र में बहस ज़रूरी है, लेकिन तथ्यों के साथ और इस बार चुनाव आयोग ने अपने जवाब से यही संदेश देने की कोशिश की है कि ‘अब हो गया है दूध का दूध और पानी का पानी’





