व्यापार » 10th pass man first salary was Rs 4200 with this one trick he saved 1 crore rupees 1 crore rupaye kaise kamaye – 10वीं पास इस आदमी की पहली सैलरी थी 4,200 रुपये, इस एक जुगाड़ से बचा ल‍िए 1 करोड़ रुपये

10th pass man first salary was Rs 4200 with this one trick he saved 1 crore rupees 1 crore rupaye kaise kamaye – 10वीं पास इस आदमी की पहली सैलरी थी 4,200 रुपये, इस एक जुगाड़ से बचा ल‍िए 1 करोड़ रुपये

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How to make 1 crore : एक प्रसिद्ध कहावत है कि धैर्य कड़वा होता है, लेकिन इसका फल मीठा होता है. यह सच है, लेकिन आज के दौर में लोग किसी भी चीज का इंतजार नहीं करना चाहते और इसी वजह से क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स तेजी से बढ़ रहे हैं, जो 10 मिनट के अंदर प्रोडक्ट्स डिलीवर कर रहे हैं. लेकिन बेंगलुरु के एक व्यक्ति ने धैर्य और दृढ़ता का असली उदाहरण पेश किया है और इस 53 वर्षीय व्यक्ति की कहानी इस कहावत को सच साबित करती है.

यह व्यक्ति केवल 10वीं पास है और उसकी पहली सैलरी Rs 4,200 थी. हालांकि, बहुत कम कमाई के बावजूद उसने Rs 1 करोड़ बचाने में सफलता प्राप्त की. उसने दिखाया है कि अगर आप जीवन में धैर्य रख सकते हैं और सही निर्णय ले सकते हैं, तो आप जीवन में सफल हो सकते हैं.

जान‍िये क्‍या है पूरी कहानी?
53 साल व्यक्ति की कहानी Reddit पर वायरल हो गई है, जहां लोग उसकी भारी बचत के पीछे का राज जानना चाहते हैं. इस व्यक्ति ने Reddit पर एक पोस्ट शेयर की, जिसमें बताया कि कम वेतन के बावजूद वह 1 करोड़ रुपये बचाने में सफल रहा. पोस्ट के अनुसार, उसके पास न तो कोई कर्ज है और न ही वह क्रेडिट कार्ड का उपयोग करता है. वह बस एक साधारण जीवन जीना पसंद करता है.

यह व्यक्ति 2000 में बेंगलुरु आया था, जब उसकी जेब में केवल 5,000 रुपये थे. वह केवल 10वीं पास था, इसलिए एक अच्छी नौकरी पाना बहुत मुश्किल था. हालांकि, कई दिनों की मेहनत के बाद उसे एक नौकरी मिली और उसकी पहली सैलरी 4,200 रुपये थी.

बेंगलुरु के इस व्यक्ति ने अपनी पोस्ट में बताया कि स्मार्ट बचत की वजह से आज उसके बैंक में 1.01 करोड़ रुपये जमा हैं और 65 हजार रुपये इक्विटी में हैं.

बेंगलुरु में कैसे जिया?
इस व्यक्ति ने बताया कि वह एक बहुत ही गरीब परिवार से है और एक छोटे से गांव से आता है. जब वह बेंगलुरु शहर आया था, तब उसकी उम्र केवल 27 साल थी.

बेंगलुरु में, उन्होंने Rs 4,200 की सैलरी वाली छोटी नौकरी से शुरुआत की थी और उनकी आखिरी सैलरी Rs 63,000 थी. उन्होंने कभी कार नहीं खरीदी और हमेशा पैदल ही अपने गंतव्य तक पहुंचते थे.

कोविड के दौरान अपनी नौकरी छोड़ी
53 वर्षीय व्यक्ति ने बताया कि वह शहर में प्रूफरीडर के रूप में काम करते थे, लेकिन कोविड के दौरान उन्होंने उच्च मायोपिया के कारण अपनी नौकरी छोड़ दी. नौकरी छोड़ने के बाद भी, उन्हें अपने फिक्स्ड डिपॉजिट से Rs 60,000 प्रति माह की निष्क्रिय आय मिलती रही.

तीन लोगों का परिवार अपने अतिरिक्त खर्चों को सीमित करता है और Rs 25,000 प्रति माह में अपना जीवन यापन करता है. परिवार बेंगलुरु के बाहरी इलाके में स्थित 1 BHK अपार्टमेंट में रहता है. घर का किराया केवल Rs 6,500 है.

(नोट: यह खबर सोशल मीडिया पर एक यूजर द्वारा किए गए दावों के आधार पर लिखी गई है और नूयूज18 ह‍िन्‍दी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

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