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100 वर्षों की यात्रा : संघ का मार्ग एकात्मता, ध्येय मानवता

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व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण: शताब्दी का यह पड़ाव नए युग का आह्वान है.

100 वर्षों की यात्रा : संघ का मार्ग एकात्मता, ध्येय मानवताRSS प्रमुख मोहन भागवत.

समाज ही व्यक्ति को दिशा देता है और व्यक्ति के संस्कार ही समाज का स्वरूप तय करते हैं. जब व्यक्ति संयम, अनुशासन और सेवा की भावना से सशक्त होता है, तो समाज संगठित होता है और राष्ट्र सामर्थ्यवान बनता है. यही दर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सौ वर्षों में जीवंत किया है. संघ ने यह दिखाया कि एकात्मता और मानवता के आधार पर यदि समाज जुड़ता है तो किसी भी प्रकार का विघटन स्थायी नहीं रह सकता.

1925 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार जी ने जिस लक्ष्य के साथ संघ की स्थापना की थी, उसका मूल सूत्र था – व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण. शाखाएँ इस सूत्र की प्रयोगशाला बनीं, जहाँ स्वयंसेवकों ने अनुशासन, संगठन, सेवा और संस्कार का जीवन सीखा. संघ ने सिद्ध किया कि संगठन की शक्ति उस भाव में है जो व्यक्ति को समाज से और समाज को राष्ट्र से जोड़ती है.

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अमन शर्मासीनियर एडिटर (पॉलिटिक्स)

CNN News18 में सीनियर एडिटर (पॉलिटिक्स) अमन शर्मा News18.com के ब्यूरो चीफ है. इन्हें PMO समेत देश की बड़ी राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है. राजनीतिक घटनाक्रमों पर पैनी पकड़ रखते हैं…और पढ़ें

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