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व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण: शताब्दी का यह पड़ाव नए युग का आह्वान है.
RSS प्रमुख मोहन भागवत. समाज ही व्यक्ति को दिशा देता है और व्यक्ति के संस्कार ही समाज का स्वरूप तय करते हैं. जब व्यक्ति संयम, अनुशासन और सेवा की भावना से सशक्त होता है, तो समाज संगठित होता है और राष्ट्र सामर्थ्यवान बनता है. यही दर्शन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ने सौ वर्षों में जीवंत किया है. संघ ने यह दिखाया कि एकात्मता और मानवता के आधार पर यदि समाज जुड़ता है तो किसी भी प्रकार का विघटन स्थायी नहीं रह सकता.

CNN News18 में सीनियर एडिटर (पॉलिटिक्स) अमन शर्मा News18.com के ब्यूरो चीफ है. इन्हें PMO समेत देश की बड़ी राजनीतिक गतिविधियों की कवरेज का दो दशक से ज्यादा का अनुभव है. राजनीतिक घटनाक्रमों पर पैनी पकड़ रखते हैं…और पढ़ें
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October 02, 2025, 10:51 IST
संघ की इस यात्रा का एक गौरवपूर्ण अध्याय 1963 में लिखा गया, जब गणतंत्र दिवस परेड में स्वयंसेवकों ने भाग लिया. भारत की शान के रूप में हर चुनौती पर खरे उतरते हैं, निस्वार्थ भाव से राष्ट्र की सेवा करते हुए.
सेवा की यह परंपरा केवल आपदा राहत तक सीमित नहीं रही. भूकंप हो या बाढ़, महामारी हो या कोई अन्य संकट संघ के स्वयंसेवक हमेशा समाज के बीच पहुँचे, लेकिन उनका कार्य यहीं नहीं रुका. विद्यालयों, ग्रामोन्नति योजनाओं, स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से संघ ने आत्मनिर्भर और सशक्त समाज गढ़ने का कार्य किया. यह सेवा माँ भारती के प्रति निष्ठा और भविष्य से प्रेरित रही है.
“शून्य से एक शतक बने, अंक की मन भावना
भारती की जय विजय हो, ले हृदय में प्रेरणा
कर रहे हम साधना, मातृभू आराधना”
– आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी
युवा पीढ़ी भारत के भविष्य की सबसे बड़ी शक्ति है. उनकी ऊर्जा और उत्साह को सही दिशा मिल जाए तो वह पूरे राष्ट्र की गति बदल सकते हैं. संघ इसी ऊर्जा को सेवाभाव, अनुशासन और संगठन से जोड़ने का कार्य करता है. शाखाओं और विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से युवाओं में समाज के प्रति उत्तरदायित्व और एकात्मता की भावना विकसित होती है. जब युवा मानवता के भाव से प्रेरित होकर कार्य करते हैं, तो वे समाज और राष्ट्र दोनों को नई ऊँचाइयों तक ले जाते हैं. आने वाले समय में यही युवा भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र के लक्ष्य की ओर अग्रसर करने वाले सबसे बड़े वाहक बनेंगे.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी के यशस्वी नेतृत्व में हम उसी पथ पर आगे बढ़ रहे हैं. उनके मार्गदर्शन में संगठन ने समाज जीवन के हर क्षेत्र — शिक्षा, सेवा, पर्यावरण, ग्रामीण उत्थान और सांस्कृतिक जागरण में अपनी उपस्थिति और भी व्यापक की है.
शताब्दी का यह पड़ाव नए युग का आह्वान है. सौ वर्षों में संघ ने जो तप, त्याग और संगठन खड़ा किया है, वह भारत को आत्मनिर्भरता और सांस्कृतिक सामर्थ्य के साथ 2047 तक विकसित भारत की ओर ले जाएगा.
– कर्नल राज्यवर्धन राठौड़
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