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क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि किसी फिल्म के हीरो और डायरेक्टर ने एक रुपया भी फीस न ली हो? साल 2014 में एक ऐसी फिल्म आई, जिसने बॉलीवुड के सारे समीकरण बदल दिए. बजट की कमी और कहानी के प्रति जुनून ऐसा था कि लीड हीरो और निर्देशक ने मुफ्त में काम करने का फैसला किया, ताकि सारा पैसा पर्दे पर कहानी उतारने में लगे. कश्मीर की वादियों में रची गई इस दर्दनाक दास्तां ने बॉक्स ऑफिस पर ही नहीं, बल्कि अवॉर्ड्स की दुनिया में भी तहलका मचा दिया और कुल 35 से ज्यादा अवॉर्ड्स अपने नाम किए. आज भी इस फिल्म की गिनती भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े मास्टरपीस में होती है.

नई दिल्ली. बॉलीवुड में जब भी किसी कल्ट फिल्म या मास्टरपीस की बात होती है, तो विशाल भारद्वाज की ‘हैदर’ का नाम सबसे ऊपर आता है. साल 2014 में आई इस फिल्म ने ना सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर अपनी जगह बनाई, बल्कि सिनेमा की परिभाषा ही बदल दी. शाहिद कपूर ने अपनी दमदार परफॉर्मेंस से ऑडियंस के दिलों को जीत लिया था.

लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म को बनाने के लिए इसके लीड हीरो शाहिद कपूर और डायरेक्टर विशाल भारद्वाज ने एक रुपया भी फीस नहीं ली थी? जी हां, यह बिल्कुल सच है. विशाल भारद्वाज कश्मीर की वादियों में शेक्सपियर के ‘हैमलेट’ को उतारना चाहते थे, लेकिन बजट की कमी आड़े आ रही थी. (फोटो साभार: IMDb)

आईएमडीबी के मुताबिक, फिल्म का विजन इतना बड़ा था कि अगर शाहिद और विशाल अपनी रेगुलर फीस लेते, तो फिल्म शायद कभी बन ही नहीं पाती. दोनों ने तय किया कि वे फिल्म में पैसा लगाने के बजाय अपनी मेहनत इन्वेस्ट करेंगे. नतीजा यह हुआ कि फिल्म बनी और ऐसी बनी कि इसने अवार्ड्स जीतने में भी रिकॉर्ड खड़े कर दिए. (फोटो साभार: IMDb)
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‘हैदर’ की कहानी 90 के दशक के अशांत कश्मीर की पृष्ठभूमि पर आधारित है. हैदर (शाहिद कपूर) एक नौजवान है, जो अपनी पढ़ाई पूरी कर अपने घर श्रीनगर लौटता है. उसे पता चलता है कि उसके पिता डॉक्टर हिलाल मीर गायब हो चुका है और उनके घर को सेना ने उड़ा दिया है. (फोटो साभार: IMDb)

घर लौटने पर हैदर को सबसे बड़ा झटका तब लगता है, जब वह अपनी मां गजाला (तब्बू) को अपने चाचा खुर्रम (के के मेनन) के साथ खुश देखता है. जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, हैदर को पता चलता है कि उसके पिता की गिरफ्तारी और मौत के पीछे किसी और का नहीं बल्कि उसके सगे चाचा का हाथ है. यहीं से शुरू होता है बदले, पागलपन और अंतर्द्वंद्व का एक खूनी खेल. (फोटो साभार: IMDb)

हैदर अपने पिता की मौत का बदला लेना चाहता है, लेकिन वह अपनी मां के प्रति प्यार और नफरत के बीच फंसा हुआ है. यह कहानी सिर्फ बदले की नहीं है, बल्कि कश्मीर के आम लोगों के दर्द, राजनीति और रिश्तों के टूटने की एक दर्दनाक दास्तां है. इस फिल्म में श्रद्धा कपूर, कुलभूषण खरबंदा, आमिर बशीर और नरेंद्र झा जैसे सितारे नजर आए थे. इरफान खान का हैदर में जबरदस्त कैमियो था. (फोटो साभार: IMDb)

‘हैदर’ सिर्फ एक फिल्म नहीं बल्कि एक अनुभव है. फिल्म का संगीत, इसके डायलॉग्स जैसे- ‘हम हैं कि हम नहीं’ और शाहिद कपूर का वो सिर मुंडवाने वाला सीन आज भी लोगों के रोंगटे खड़े कर देता है. विशाल भारद्वाज ने कश्मीर के उस दौर को बिना किसी लाग-लपेट के पर्दे पर दिखाया, जिसे अक्सर बॉलीवुड फिल्मों में खूबसूरती के पीछे छिपा दिया जाता था. (फोटो साभार: IMDb)

इस फिल्म ने शाहिद कपूर को एक ‘चॉकलेट बॉय’ की इमेज से निकालकर एक ‘मेथड एक्टर’ के रूप में स्थापित कर दिया. खास बात है इस फिल्म ने टोटल 35 अवॉर्ड झटक लिए थे जिसमें 5 नेशनल अवॉर्ड भी शामिल हैं. आईएमडीबी पर शाहिद कपूर की फिल्म को 10 में से 8 रेटिंग मिली है. (फोटो साभार: IMDb)
February 17, 2026, 11:45 IST





