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बांग्लादेश ने हिलसा मछली बचाने के लिए मदर इलिश कंजर्वेशन ऑपरेशन 2025 शुरू किया, जिसमें नौसेना, युद्धपोत और ड्रोन तैनात हैं. जानिए भारत से भी इस मछली का क्या खास कनेक्शन है.

बांग्लादेश ने इन दिनों अपनी सारी ताकत, अपनी सबसे प्यारी मछली को बचाने के लिए झोंक दी है. पूरी नौसेना और हेलीकॉप्टर इस समय इस मछली की सुरक्षा में लगे हैं. ये है बांग्लादेश की राष्ट्रीय मछली हिलसा (इलिश), जिसे बचाने के लिए बांग्लादेश की सरकार हर प्रयास कर रही है. दरअसल इस मछली का भारत से भी खास रिश्ता है. अक्टूबर 2025 में शुरू हुए ‘मदर इलिश कंजर्वेशन ऑपरेशन’ के तहत 17 जंगी जहाज, गश्ती नौकाएं और आधुनिक समुद्री विमान तैनात किए गए हैं. यह सिर्फ मछली पकड़ने पर रोक लगाने का अभियान नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय मिशन है, जो हिलसा की सांस्कृतिक विरासत और आर्थिक महत्व को बचाने की जद्दोजहद बयां करता है. चलिए बताते हैं आपको कि हिलसा का भारत और बांग्लादेश से क्या कनेक्शन है और आखिर इस मछली को बचाने के लिए इतने प्रयास क्यों किए जा रहे हैं.
हिलसा मछली बांग्लादेश की राष्ट्रीय पहचान है – एक चांदी जैसी चमकदार मछली, जिसका स्वाद इतना लजीज है कि लोग इसे ‘समुद्र की रानी’ कहते हैं. बंगाल की खाड़ी से हर साल अंडे देने के लिए नदियों में लौटने वाली यह मछली भारत के पश्चिम बंगाल में भी बेहद लोकप्रिय है. लेकिन जलवायु परिवर्तन, बढ़ते समुद्र स्तर और अत्यधिक मछली पकड़ने से इसकी संख्या तेजी से घट रही है. 2025 के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक हिलसा उत्पादन का 70% से ज्यादा बांग्लादेश से आता है, लेकिन अवैध शिकार ने इसके स्टॉक को 30% तक कम कर दिया है (फिशरीज डिपार्टमेंट के हालिया रिपोर्ट्स से).
दीपिका शर्मा पिछले 5 सालों से News18 Hindi में काम कर रही हैं. News Editor के पद पर रहते हुए Entertainment सेक्शन को 4 सालों तक लीड करने के साथ अब Lifestyle, Astrology और Dharma की टीम को लीड कर रही हैं. पत्र…और पढ़ें
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October 06, 2025, 12:16 IST
बेहद जरूरी है हिलसा को बचाना
सांस्कृतिक रूप से, हिलसा बांग्लादेशी उत्सवों का हिस्सा है – जैसे पोहेला बोइशाख (नया साल) में इलिश भात खाना. आर्थिक रूप से, लाखों मछुआरों की रोजी-रोटी इससे जुड़ी है. ढाका में इसका दाम प्रति किलोग्राम 2,200 टका (करीब 1,600 रुपये) तक पहुंच जाता है, और 2025 में निर्यात से देश को 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा की कमाई हुई है. लेकिन अंडे देने के मौसम में (अक्टूबर) यह सबसे कमजोर होती है, इसलिए सरकार ने इसे बचाने का बीड़ा उठाया. पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ऐसा नहीं किया गया, तो अगले 10 सालों में हिलसा की आबादी आधी रह सकती है, जो पारिस्थितिकी और अर्थव्यवस्था दोनों को झटका देगा.
‘मदर इलिश कंजर्वेशन ऑपरेशन 2025’: सेना का अनोखा अभियान
अक्टूबर 2025 में शुरू हुए इस अभियान में बांग्लादेश की नौसेना ने पूरे जोर से कमर कस ली है. 4 अक्टूबर से 25 अक्टूबर तक तीन हफ्तों के लिए मछली पकड़ने पर पूरी तरह पाबंदी है. नौसेना ने 17 युद्धपोत, गश्ती नौकाएं और अत्याधुनिक समुद्री गश्ती विमानों को तैनात किया है – खासकर नौ तटीय और नदी इलाकों जैसे चांदपुर, बरिशाल और खुलना में. ये जहाज और हेलीकॉप्टर 24 घंटे निगरानी कर रहे हैं, ताकि घरेलू या विदेशी मछुआरे घुसपैठ न कर सकें.
मछुआरों को दिया जाएगा 25 किलो चावल
यूरेशियन टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक बांग्लादेशी सेना के इंटर-सर्विस पब्लिक रिलेशंस ने कहा, “गहरे समुद्र में घरेलू और विदेशी मछुआरों की घुसपैठ को रोकने के लिए युद्धपोत और अत्याधुनिक समुद्री गश्ती विमान चौबीसों घंटे निगरानी कर रहे हैं.” 60 साल के मछुआरे सत्तार माझी की आवाज में दर्द झलकता है: “ये तीन सप्ताह मछुआरों के लिए बहुत कठिन हैं, क्योंकि हमारे पास जीवित रहने का कोई अन्य साधन नहीं है.” सरकार ने इसकी भरपाई के लिए हर मछुआरे परिवार को 25 किलोग्राम चावल दिया है, लेकिन कई को यह नाकाफी लगता है. ताजा अपडेट्स के मुताबिक, अभियान के पहले हफ्ते में ही दर्जनों अवैध नावों को पकड़ा गया है, और नौसेना ने ड्रोन का भी इस्तेमाल शुरू किया है (2025 के फिशरीज मिनिस्ट्री अपडेट से).
दुनिया में ऐसा अनोखा अभियान क्यों?
सुनने में भले ही ये अजीब लगे कि कोई देश अपनी मछली बचाने के लिए युद्धपोत उतारे. लेकिन बांग्लादेश ने यह करके दिखाया! यह अभियान सिर्फ हिलसा की रक्षा नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक है. विशेषज्ञों को चिंता है कि सैन्य जहाजों की मौजूदगी से अंडे देने वाली हिलसा परेशान हो सकती है, लेकिन सरकार का तर्क है कि अवैध शिकार रोकना जरूरी है. 2025 में जलवायु सम्मेलन में बांग्लादेश ने हिलसा को ‘जलवायु प्रभावित प्रजाति’ बताकर अंतरराष्ट्रीय मदद मांगी है, और अब यह अभियान उस दिशा में एक बड़ा कदम है. आंकड़ों की मानें तो अभियान के सफल होने पर 2026 में हिलसा उत्पादन 20% बढ़ सकता है.
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