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सोनाक्षी सिन्हा को बॉलीवुड में नहीं मिल रही काबिलियत के अनुसार फिल्में

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सोनाक्षी सिन्हा की लेटेस्ट फिल्म ‘निकिता रॉय’ में उनके अभिनय को काफी सराहा गया, लेकिन कमाई के मामले फिल्म कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई. फिल्म निकिता रॉय का निर्देशन सोनाक्षी सिन्हा के भाई कुश सिन्हा ने किया है. लेटेस्ट इंटरव्यू में कुश सिन्हा ने बहन सोनाक्षी के करियर के बारे में खुलकर बात की. वो कहते हैं कि उनकी बहन को अच्छी फिल्में नहीं मिल पाती हैं और निकिता रॉय पहली ऐसी फिल्म है जिसमें एक्ट्रेस का हुनर निखर कर सामने आया है. डायरेक्टर कुश सिन्हा के मुताबिक उन्होंने अपनी बहन को मौका दिया कि वो अपने टैलेंट को पूर्ण रूप से पर्दे पर दिखा पाएं.

द फ्री प्रेस जर्नल के साथ बात करते हुए सोनाक्षी सिन्हा के भाई कुश कहते हैं कि उन्हें हमेशा से ऐसा लगता है कि बॉलीवुड ने सोनाक्षी सिन्हा को अभी तक वो फिल्में ऑफर नहीं की हैं, जिनकी वो हकदार हैं. डायरेक्टर के मुताबिक मेकर्स एक्ट्रेस के हुनर को निखार नहीं पा रहे हैं और उन्हें पूर्ण रूप से खुद को व्यक्त करने का मौका नहीं दे रहे हैं.

वो कहते हैं, निकिता रॉय में, उन्होंने अपनी रेंज को खूबसूरती से प्रदर्शित किया, अपने किरदार को इतनी भावनात्मक गहराई के साथ पर्दे पर दर्शाया. इस फिल्म में वो हर तरह के इमोशन को पर्दे पर व्यक्त करती हैं. निकिता रॉय के रूप में किरदार बहुत परतदार है – वह टूटी हुई, जिद्दी, अति आत्मविश्वासी है और आपको एक ऐसी एक्ट्रेस की जरूरत होती है जो किरदार के हर तरह के भाव को पर्दे पर बखूबी अदा कर सके. ऐसे अभिनेता की जरूरत होती है जो इन सभी बारीकियों को जीवन में ला सके. मुझे यकीन था कि वह कर सकती हैं.

कुश कहते हैं कि क्रिटिक्स ने निकिता रॉय को सोनाक्षी सिन्हा के करियर की अबतक की सबसे अच्छी फिल्म बताया है. वो बताते हैं कि वो सोनाक्षी के टैलेंट को निखार सके और इस भाव को पर्दे पर व्यक्त कर सके.

एक्ट्रेस के करियर के बारे में अपनी राय रखते हुए कुश कहते हैं कि उन्हें लगता है कि मेकर्स एक्ट्रेस के हुनर को निखार नहीं पाए. कुश बताते हैं, “यह मेरे मन में बहुत स्पष्ट था क्योंकि मैंने उन्हें केवल एक भाई के रूप में नहीं बल्कि एक दर्शक के रूप में भी सोनाक्षी को जाना है. मैंने हमेशा महसूस किया कि उनकी पूरी क्षमता का उपयोग नहीं किया जा रहा था.

इसके बारे में आगे अपनी राय रखते हुए कुश सिन्हा ने कहा, ‘इसके कई कारण होते हैं – कभी-कभी डायरेक्टर्स एक तय सीमा के आगे एक्टर्स को नहीं बढ़ाना चाहते हैं. उन्हें फिल्म के सेट पर गड़बड़ी होने का डर लगता है जिसकी वजह से वो स्टार्स को आगे नहीं बढ़ा पाते हैं.

वो कहते हैं कि उन्होंने सोनाक्षी सिन्हा की दबंग, अकीरा और लुटेरा जैसी फिल्में देखी थीं जिन्में वो एक नौसिखिया थी. एक्ट्रेस को अच्छी फिल्में न मिलने के बारे में आगे बात करते हुए कुश कहते हैं कि उन्हें लगता है कि ये चयन पर निर्भर करता है. एक एक्टर कैसी फिल्में कर रहा है ये उसके चयन पर निर्भर करता है.

कुश सिन्हा कहते हैं कि कभी -कभी जो स्क्रिप्ट बहुत अच्छी लगती है, वो पर्दे पर कुछ खास नहीं लगती. सुनते वक्त स्क्रिप्ट बहुत अच्छी लगती है, लेकिन सेट पर वो वैसी नहीं होती. डायरेक्टर के मुताबिक कभी-कभी आखिरी समय पर जो निकल कर आता है वो स्क्रिप्ट से अच्छा होता है, लेकिन कभी-कभी ऐसा नहीं हो पाता है.

निर्देशक के रूप में, कुश महसूस करते हैं कि उनकी जिम्मेदारी है कि वे अभिनेताओं को उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन देने के लिए प्रेरित करें. इस बारे में वो आगे कहते हैं, ‘अगर प्रदर्शन ईमानदार होता है, तो दर्शक जुड़े रहते हैं. लेकिन मुझे नहीं लगता कि जब चीजें काम नहीं करतीं तो हमेशा अभिनेता की गलती होती है. एक फिल्म बनाने में कई प्रकार के तत्व शामिल होते हैं. कागज से स्क्रीन पर कहानी को अनुवाद करना अप्रत्याशित होता है. यह जितना प्रतिभा का मामला है उतना ही किस्मत का भी.’

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