विदेश » सूरज की आग में भी नहीं जला ATLAS धूमकेतु, उल्टा ‘सुनहरा’ बनकर चमक उठा आसमान में!

सूरज की आग में भी नहीं जला ATLAS धूमकेतु, उल्टा ‘सुनहरा’ बनकर चमक उठा आसमान में!

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आसमान में एक नया नजारा दिखा है. एक धूमकेतु जो पहले हरे रंग में नजर आता था, अब सूरज के पास पहुंचते ही सुनहरे रंग में बदल गया. वैज्ञानिकों को पहले लगा था कि यह सूरज के पास जाकर खत्म हो जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बजाय इसने अपनी चमक और रंग दोनों से सबको चौंका दिया है. इस धूमकेतु का नाम है C/2025 K1 (ATLAS).

कहां से आया यह धूमकेतु
यह धूमकेतु किसी दूसरे तारे या अंतरिक्ष के बाहर से नहीं आया है. यह हमारे अपने सौरमंडल के किनारे मौजूद ‘ओर्ट क्लाउड’ नाम की जगह से निकला है. यह इलाका बेहद दूर है, जहां करोड़ों बर्फीले पिंड माने जाते हैं. इन्हीं में से कुछ पिंड अपनी कक्षा से निकलकर सूरज की तरफ बढ़ते हैं और फिर धूमकेतु के रूप में दिखाई देते हैं.

ATLAS सिस्टम ने इस साल तीन ऐसे धूमकेतु खोजे थे, C/2025 A6, जो इस साल सबसे ज्यादा चमकदार था, C/2025 R2 Swan, जो सूरज के बहुत करीब पहुंचा, और अब ये तीसरा, C/2025 K1 (ATLAS), जो अपनी सुनहरी चमक से चर्चा में है.

सूरज के पास पहुंचकर रंग बदल गया
8 अक्टूबर को यह धूमकेतु सूरज से सिर्फ 3.1 करोड़ किलोमीटर की दूरी पर पहुंचा. वैज्ञानिकों को लगा था कि इतनी गर्मी में यह पिघल जाएगा या टूट जाएगा. लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बजाय यह और भी चमकने लगा और इसका हरा रंग सुनहरे में बदल गया.

धूमकेतु की लंबी पूंछ भी नजर आई, जो सूरज की हवा (solar wind) से झूलती हुई लग रही थी. अंतरिक्ष पर्यवेक्षक डैन बार्टलेट ने कहा, “यह धूमकेतु 9 अक्टूबर के बाद बचने वाला नहीं था, लेकिन यह न सिर्फ बच गया बल्कि अब यह लाल-भूरे-सुनहरे रंग में चमक रहा है, जो बहुत दुर्लभ होता है.”

आखिर रंग क्यों बदला?
आमतौर पर धूमकेतु सफेद या नीले रंग में दिखते हैं क्योंकि उनकी सतह पर बर्फ होती है, जो सूरज की रोशनी को परावर्तित करती है. लेकिन इस धूमकेतु के सुनहरे रंग ने वैज्ञानिकों को सोच में डाल दिया है.

लोवेल ऑब्जर्वेटरी (एरिजोना) के खगोलशास्त्री डेविड श्लाइकर का मानना है कि यह रंग शायद इसलिए दिख रहा है क्योंकि इसमें कार्बन वाले अणु, जैसे डाइकार्बन और कार्बन मोनोऑक्साइड, की मात्रा बहुत कम है. वहीं कुछ वैज्ञानिकों का कहना है कि इस धूमकेतु में गैस से ज्यादा धूल है, इसी वजह से सूरज के पास जाने पर भी यह पूरी तरह टूट नहीं पाया.

कैसे देखें यह धूमकेतु
दुर्भाग्य से C/2025 K1 (ATLAS) को नंगी आंखों से नहीं देखा जा सकता. इसकी चमक (magnitude) करीब 9 है, यानी यह सिर्फ दूरबीन या अच्छे बाइनाक्युलर से ही दिखेगा.

यह 25 नवंबर को पृथ्वी के सबसे करीब होगा. अगर आप इसे देखना चाहते हैं तो सूर्योदय से ठीक पहले आसमान में नजर डालें. यह विर्गो (Virgo) और लियो (Leo) तारामंडल के बीच दिखाई देगा.

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