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यह कहानी है बॉलीवुड के ऐसे मुस्लिम संगीतकार की जिसने सिर्फ 5वीं तक पढ़ाई की. राजस्थान की धरती सुजानगढ़ में मुस्लिम परिवार में पैदा हुए. इनके पूर्वज तानसेन के शिष्य रह चुके हैं. मुहब्ब्त की चाह में संगीतकार बने. …और पढ़ें
90 के दशक की म्यूजिक डायरेक्टर दिलीप सेन और समीर सेन ने कई फिल्मों में संगीत दिया.दिलीप ने बताया, ‘हमारे नाम के साथ सेन जुड़ा हुआ है तो लोग समझते हैं कि हम तानसेन के परिवार से हैं. हालांकि ऐसा नहीं है. सच्चाई यह है कि हमारे परिवार के पूर्वजों का तानसेन के परिवार के साथ उठना-बैठना जरूर था. पिता जयमाल सिंह सेन जलतरंग पखावज बजाते थे. रवींद्रनाथ टैगोर के यहां संगीत की शिक्षा दिया करते थे. 70 के दशक में मैं मुंबई आया. दिल में तमन्ना लेकर आया था फिल्म लाइन में काम करूंगा. घर में संगीत का माहौल था. घर में संगीत का स्कूल था सो स्टूडेंट के लिए शिवपुराण से लेकर कई धार्मिक कहानियों का मंचन करवाया. कहानी लिखी, गाने लिखे. कई धुन बनाईं.’
दिलीप सेन की जिंदगी से जुड़ा एक किस्से के बारे में लोग बहुत कम जानते हैं. फिल्मों में आने से पहले वह संन्यासी बन गए थे. 40 दिन तक साधुओं के बीच रहकर तपस्या की थी. दिलीप सेन ने बताया, ‘वर्सोवा के अंदर मलाड आइलैंड के पास एक किले का है. किले में किलेशवर मंदिर है. मैंने 40 दिन वहीं पर साधुओं के बीच निकाले. वहां से भगवान भोले का ऐसा आशीर्वाद मिला कि फिल्मों के लिए कॉल आने लगे. फिर तो पीछे मुड़कर नहीं देखा.’
ऐसे मिला फिल्मों में मौका
दिलीप सेन को पहला ब्रेक’सूरमा भोपाली’ फिल्म में मिला था. इस फिल्म को जगदीप ने बनाया था. फिर साजिद नाडियावाला की फिल्म ‘जुर्म की हुकूमत’ में काम मिला. इस फिल्म के मुहुर्त के लिए डायरेक्टर यश चोपड़ा को बुलाया गया. यश चोपड़ा ने ‘आईना; फिल्म का ऑफर दिया. आईना फिल्म के कई गाने पॉप्युलर हुए तो फिल्मी करियर चल पड़ा. फिर म्यूजिक किंग गुलशन कुमार का साथ मिला. दिलीप और समीर सेन की जोड़ी ने लगभग 1800 से ज्यादा गाने इंडस्ट्री को दिए.
गले में बिल्ला नंबर 786 और माला पहनने वाले समीर सेन ने बताया, ‘मैं सभी धर्मों में यकीन रखता हूं. भगवान भोले का बहुत बड़ा उपासक हूं. जितना अल्लाह को मानता हूं, उतना ही भोले को मानता हूं. हम एक फिल्म ‘कोहराम’ कर रहे थे. इस फिल्म के सभी गाने रिकॉर्ड हो चुके थे. एक गुरुवाणी थी. गीतकार आनंद बख्शी ने जब ट्यून सुनी तो उसे मुजरा करार दिया था. उन्होंने डायरेक्टर मेहुल कुमार को सिचुएशन बदलने की सलाह दी थी. मैंने जब इसकी वजह पूछी तो उन्होंने कहा था कि ‘एक तो मेहुल कुमार मुसलमान है, तुम भी मुसलमान हो. ऐसे में गुरुवाणी का म्यूजिक अच्छे से बनाओ. फिर हमने बहुत मेहनत की. मुंबई के कई गुरुद्वारों के बाहर घंटों बैठे. तब जाकर म्यूजिक तैयार हुआ.’

An accomplished digital content creator and Planner. Creating enhanced news content for online and social media. Having more than 10 years experience in the field of Journalism. Done Master of Journalism from M…और पढ़ें
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Mumbai,Maharashtra
August 18, 2025, 13:20 IST





