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संजय लीला भंसाली की फिल्मों की भव्यता और कला का सफर

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भारतीय सिनेमा में कई फिल्मकार आए हैं, लेकिन कुछ ही ऐसे हैं जो अपनी फिल्मों में ऐसा जादुई माहौल रचते हैं कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं. इन्हीं में से एक हैं निर्देशक संजय लीला भंसाली, जिनकी फिल्मों का नाम आते ही भव्य सेट, बारीक निर्देशन और शानदार कहानी याद आ जाती है.

संजय लीला भंसाली की फिल्मों में कभी भव्य महल तो कभी खूबसूरती से कोरियोग्राफ किए गए गाने देखने को मिलते हैं. उनकी कहानी में कला और भव्यता का अनोखा मेल देखने को मिलता है. उनके फैंस सिर्फ उनकी फिल्में नहीं देखते, बल्कि उस भव्यता को महसूस भी करते हैं.

जब हम भव्य, शानदार और बड़े सेट्स की बात करते हैं, तो फिल्ममेकर संजय लीला भंसाली का नाम खुद-ब-खुद जहन में आ जाता है. ‘देवदास’ से लेकर ‘बाजीराव मस्तानी’ तक, इस फिल्मकार ने अपनी शानदार सिनेमैटोग्राफी, दिलचस्प कहानियों, आकर्षक सेट डिजाइन से बॉलीवुड में एक अलग पहचान बनाई है.

संजय लीला भंसाली का जन्म साउथ बॉम्बे के भुलेश्वर में एक गुजराती जैन परिवार में हुआ था. डायरेक्टर ने अपने पिता के नक्शे कदम पर चलते हुए फिल्मों में कदम रखा था. संजय लीला भंसाली के पिता को फिल्मों की दुनिया में काफी नुक्सान सहना पड़ा जिसके चलते उनका परिवार सड़क पर आ गया था.

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वे एक छोटे से कमरे में रहते थे और बचपन से ही संघर्ष देखा. उनकी मां की हिम्मत ही उनकी सबसे बड़ी प्रेरणा बनी. डायरेक्टर का बचपन चॉल में गुजरा था. भुलेश्वर की भीड़-भाड़ में बड़े होते हुए भंसाली को पता था कि उन्हें दर्शकों को क्या दिखाना है और वहां तक कैसे पहुंचना है.

उन्होंने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII) से पढ़ाई की और अपनी कला को निखारा. इसके बाद उन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर करियर की शुरुआत की और फिर स्वतंत्र फिल्म निर्माण में कदम रखा. उनके शुरुआती साल महत्वाकांक्षा, अनुशासन और साफ विजन से भरे थे.

1996 में भंसाली ने ‘खामोशी: द म्यूजिकल’ से निर्देशन की शुरुआत की. फिल्म भले ही बॉक्स ऑफिस पर बड़ी हिट नहीं रही, लेकिन इसकी भावनात्मक गहराई और दमदार अभिनय के लिए खूब सराही गई. इस फिल्म ने भंसाली की इमोशनल स्टोरीटेलिंग, म्यूजिक-ड्रिवन नैरेटिव और विजुअली स्ट्राइकिंग फ्रेम्स को दिखाया.

उनकी फिल्म ‘देवदास’ (2002) कान्स फिल्म फेस्टिवल में प्रीमियर हुई और भारतीय सिनेमा की भव्यता को दुनिया के सामने रखा. इसके शानदार सेट और खूबसूरत कॉस्ट्यूम्स ने बॉलीवुड में भव्यता की नई परिभाषा गढ़ी. यह फिल्म बाफ्टा अवॉर्ड्स में बेस्ट फिल्म नॉट इन इंग्लिश के लिए भी नॉमिनेट हुई, जिससे भंसाली की अंतरराष्ट्रीय पहचान और मजबूत हुई.

इसके बाद भंसाली ने ‘बाजीराव मस्तानी’ और ‘पद्मावत’ जैसी ऐतिहासिक फिल्मों में महारत हासिल की. इन फिल्मों को उनके शानदार विजन, दमदार अभिनय और जबरदस्त युद्ध दृश्यों के लिए याद किया जाता है. ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में भंसाली ने शाही महलों से निकलकर कमाठीपुरा की गलियों तक कहानी को पहुंचाया और दिखाया कि उनकी स्टोरीटेलिंग मजबूत किरदारों पर भी आधारित हो सकती है.

संजय लीला भंसाली ने खुद को एक म्यूजिक कंपोजर के रूप में भी स्थापित किया और अपनी फिल्मों के लिए दिल छू लेने वाले गाने बनाए. 2015 में उन्हें भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया. वो अपने पूरे करियर में 38 से ज्यादा बड़े अवॉर्ड्स जीत चुके हैं जिनमें नेशनल फिल्म अवॉर्ड, फिल्मफेयर अवॉर्ड, मिर्ची म्यूजिक अवॉर्ड, स्क्रीन अवॉर्ड, आईफा अवॉर्ड आदि शामिल हैं.

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