साहित्य » शुभकामनाएं जन्मदिन की पाँच लिंक्स

शुभकामनाएं जन्मदिन की पाँच लिंक्स

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चिट्ठियाँ ना जाने कब का सो गयीं

या शायद रास्ते में कहीं खो गयीं

लेकर के झोले डाकिए दिखते तो हैं 

कुछ सामान शायद अभी भी बिकते तो हैं

चिट्ठे होश खो रहे हों जैसे

चिट्ठाकार कुछ बेहोश हो रहे हों जैसे

कलम हाथ में रहती है जैसे

जुबां तक फिसल कर बात बस बहती है जैसे

कहीं कुछ नशा है कहीं कुछ जहर है

पर है कुछ कहीं मीठी सुबह मीठा दोपहर है

अपने में मगन है अपने ही शगुन हैं

सिमटते गाँव घर सड़क नदी सिमटते हुए शहर हैं

बैचेन जानवर हैं पंछी नदारत हैं

हवा बहक रही हो जैसे उदास सी कुछ इमारत है

फिर भी उठाता है कोई कभी किसी को

जगाता है नींद से यूं ही कोई कहीं किसी को

लिखने लिखाने की बातें इधर से उधर से

उठा कर जमा कर एक चौपाल पर कब से

लाता बताता जागते रहो कि आवाज सुनाता किसी को

शुभकामनाएं ‘उलूक’ की इसको उसको सभी को

जन्मदिन मनाता “पाँच लिंकों का आनंद”

साथ में रथयात्रा का निमंत्रण दे जाता है सबको

चित्र साभार: https://www.shutterstock.com/

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