खेल » वो रूप की रानी, जिसके चक्कर में देव आनंद ने छोड़ दी HIT फिल्म, डायरेक्टर को पटाकर शम्मी कपूर ने मारा मौके पर चौका

वो रूप की रानी, जिसके चक्कर में देव आनंद ने छोड़ दी HIT फिल्म, डायरेक्टर को पटाकर शम्मी कपूर ने मारा मौके पर चौका

Facebook
Twitter
WhatsApp

नई दिल्ली. पुराने जमाने का बॉलीवुड सिर्फ शानदार फिल्मों और हिट गानों के लिए ही मशहूर नहीं था, बल्कि इसके सेट पर घटने वाली कहानियां भी उतनी ही दिलचस्प होती थीं. ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है ‘रूप की रानी’ से, जिसके लिए देव आनंद ने एक हिट फिल्म को छोड़ दिया और फिर शम्मी कपूर ने मौके का फायदा उठाते हुए डायरेक्टर को अपने पाले में कर लिया. ये मजेदार किस्सा उस फिल्म का है, जिसने शम्मी कपूर के किस्मत को चमका दिया था.

शम्मी कपूर हिन्दी सिनेमा के उन चंद सितारों में से थे, जिन्होंने अपने अनोखे अंदाज, मस्तीभरे स्वभाव और जोशीले डांस से 50 और 60 के दशक के दर्शकों का दिल जीत लिया. उनका डांस, उनका स्टाइल और उनका बेबाकपन उस दौर के दूसरे एक्टर्स से काफी अलग था और यही वजह है कि वे भीड़ से अलग खड़े नजर आते थे.

देव आनंद ने किया रिजेक्ट और चमकी शम्मी की किस्मत

शम्मी कपूर को 1957 में रिलीज हुई फिल्म ‘तुमसा नहीं देखा’ से लोकप्रियता हासिल हुई, लेकिन बहुत ही कम लोग जानते होंगे कि यह फिल्म पहले देव आनंद की झोली में थी, लेकिन उस वक्त देव आनंद ने नई नवेली खूबसूत एक्ट्रेस अमीता के साथ काम करने से मना कर दिया और जब निर्देशक नासिर हुसैन को किसी विकल्प की तलाश हुई, तो उनके सामने शम्मी कपूर आ खड़े हुए. हालांकि, उस वक्त नासिर हुसैन को उन पर कुछ खास भरोसा नहीं था पर एक शाम डिनर टेबल पर जब बातचीत हुई तो सब कुछ बदल गया और यही डिनर करियर का अहम मोड़ बनकर आया.

shammi kapoor raj kapoor
कपूर खानदान में ऐसे कई स्टार्स हुए जिन्होंने एक से एक फिल्में दीं. 

50 रुपये में शुरू किया करियर

शम्मी कपूर का जन्म 21 अक्टूबर 1931 को मुंबई में हुआ था. उनका असली नाम शमशेर राज कपूर था. पिता पृथ्वीराज कपूर पहले से थिएटर और फिल्मों की दुनिया में नाम बना चुके थे और भाई राज कपूर उस दौर में इंडस्ट्री का उभरता चेहरा थे. शम्मी कपूर की शुरुआती पढ़ाई कोलकाता में हुई, जहां पृथ्वीराज कपूर थिएटर किया करते थे. जब परिवार मुंबई लौटा, तो शम्मी भी पृथ्वी थिएटर से जुड़ गए. यहीं से उन्होंने एक्टिंग की शुरुआत की. यहां वह जूनियर आर्टिस्ट के तौर पर काम करते थे और उन्हें मासिक तनख्वाह महज 50 रुपए मिलती थी.

जब डायरेक्टर को पटाने डिनर पर ले गए शम्मी

बचपन में ही उन्होंने क्लासिकल म्यूजिक सीखा, लेकिन उनकी रुचि वेस्टर्न म्यूजिक की तरफ थी, जिसका असर बाद में उनके डांसिंग स्टाइल में भी खूब देखने को मिला. उनका फिल्मी करियर 1953 में ‘जीवन ज्योति’ से शुरू हुआ, लेकिन लगातार 18 फिल्मों की असफलता ने उन्हें निराश कर दिया था. लेकिन फिर आई 1957 में ‘तुमसा नहीं देखा’ फिल्म. शम्मी कपूर की बायोग्राफी ‘शम्मी कपूर: द गेम चेंजर’ लिखने वाले पत्रकार रऊफ अहमद के मुताबिक, इस फिल्म के लिए पहले देव आनंद को साइन किया गया था. लेकिन उन्होंने अमीता के साथ काम करने से इनकार कर दिया. निर्देशक नासिर हुसैन शम्मी कपूर को लीड रोल में लेना नहीं चाहते थे. लेकिन शम्मी उन्हें डिनर पर लेकर गए और वहीं पर हुई बातचीत ने निर्देशक की सोच बदल दी. फिल्म बनी, रिलीज हुई और शम्मी कपूर की किस्मत पलट गई.

Shammi Kapoor Geeta
शम्मी कपूर और गीता बाली ने 1955 में शादी कर ली. शादी के एक साल बाद गीता ने आदित्य राज कपूर और 5 साल बाद कंचन कपूर को जन्म दिया. 21 जनवरी 1965 में गीता बाली का चेचक के चलते निधन हो गया. गीता ने मरने से पहले तक काम किया. फिल्में करना नहीं छोड़ी.

सिनेमा को दिए सबसे यादगार गाने

1959 की ‘दिल देके देखो’ और फिर 1961 की ‘जंगली’ के साथ शम्मी कपूर का स्टारडम ऊंचाइयों पर पहुंच गया. ‘जंगली’ फिल्म का गाना ‘याहू!’ आज भी भारतीय सिनेमा का सबसे यादगार गाना है और ‘याहू’ लोग जोश के साथ बोलते हैं. इसके बाद ‘प्रोफेसर’ (1962), ‘कश्मीर की कली’ (1964), ‘जानवर’ (1965), ‘तीसरी मंजिल’ (1966), और ‘ब्रह्मचारी’ (1968) जैसी फिल्मों ने शम्मी कपूर को 60 के दशक का स्टाइलिश और एनर्जेटिक हीरो बना दिया.

उम्र-चोट और सेहत से जब हारे शम्मी कपूर

‘ब्रह्मचारी’ (1968) में शानदार अभिनय के लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार मिला. मगर जैसे-जैसे उम्र बढ़ी, चोटों और स्वास्थ्य समस्याओं ने उन्हें धीमा कर दिया. फिल्म ‘राजकुमार’ की शूटिंग में हाथी की टक्कर से पैर टूट गया, जिसके चलते उन्हें लंबे समय तक आराम करना पड़ा. 1970 के दशक में शम्मी ने सहायक भूमिकाएं निभानी शुरू कर दीं. ‘विधाता’ (1982) में उनके रोल को खूब सराहा गया और इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का पुरस्कार मिला.

shammi kapoor raj kapoor
मालूम हो, शम्मी कपूर अ इस दुनिया में नहीं हैं. साल 2011 में 79 साल की उम्र में उनका निधन हो गया था.

फिल्मी रही शम्मी कपूर की शादी

पर्सनल लाइफ की बात करें तो 1955 में शम्मी कपूर ने एक्ट्रेस गीता बाली से बेहद फिल्मी अंदाज में शादी की. रऊफ अहमद के मुताबिक, शम्मी और गीता बाली की उम्र में अंतर था. गीता उनसे बड़ी थीं और उन्हें डर था कि माता-पिता इस शादी के लिए राजी नहीं होंगे. इसलिए उन्होंने जॉनी वॉकर की मदद ली. बता दें कि जॉनी ने भी खुद नूरजहां से गुपचुप शादी की थी. शम्मी गीता से शादी के लिए इतने उत्साहित थे कि वे मंदिर में जल्दबाजी के चक्कर में सिंदूर साथ ले जाना भूल गए थे, ऐसे में उन्होंने गीता की मांग लिपस्टिक से भरी थी.

शम्मी कपूर के निधन का क्या था कारण

शम्मी कपूर की आखिरी फिल्म ‘रॉकस्टार’ थी, जो 2011 में रिलीज हुई थी. इसमें रणबीर कपूर नजर आए थे. इस फिल्म में उन्होंने उस्ताद जमील खान का किरदार निभाया. 11 नवंबर को फिल्म रिलीज हुई, लेकिन उससे तीन महीने पहले, 14 अगस्त 2011 को किडनी फेल होने से शम्मी कपूर का निधन हो गया.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Share Market

Share Market

Gold & Silver Price

Should NEET exam be conducted again?

टॉप स्टोरी