विदेश » वो मुस्लिम देश, जहां की लड़कियां कर रहीं ‘प्लेजर मैरिज’, क्यों बना रहीं 15 दिनों का शौहर

वो मुस्लिम देश, जहां की लड़कियां कर रहीं ‘प्लेजर मैरिज’, क्यों बना रहीं 15 दिनों का शौहर

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सुनने में अजीब लगेगा लेकिन है सच. एक मुस्लिम देश ऐसा है जहां लड़कियां प्लेजर मैरिज कर रही हैं. वो भी केवल 10-15 या बीस दिनों के लिए. यानि वो अनजानों को कुछ दिनों का शौहर बनाती हैं, उनके साथ बीवी की तरह रहती हैं. फिर बीवी के रास्ते अलग और शौहर के अलग. दोनों इस तरह अलग होते हैं कि एक दूसरे को जानते ही नहीं. हां इसके बदले वो लड़की बड़ी रकम जरूर कमाती है.

एक जमाने में ये देश हिंदू राजाओं का देश था. वो वहां राज करते थे. इस देश की आबादी भी हिंदुओं की थी. लेकिन इसके बाद यहां समय बदला. राजाओं ने अपना धर्म क्या बदला, पूरा देश की देखते ही देखते ही मुस्लिम देश बन गया. प्रजा ने भी तेजी से हिंदू से खुद मुस्लिम धर्म में कन्वर्ट कर लिया. अब यहां की महिलाएं आने वाले टूरिस्टों के साथ प्लेजर मैरिज करती हैं. पैसे लेती हैं. 15-20 दिनों के बाद शादी खत्म हो जाती है और वो नया हसबेंड बना लेती हैं.

तो अब हम आपको बता देते हैं कि ये देश है कौन सा. ये दुनिया का सबसे बड़ा मुस्लिम देश है. नाम है इंडोनेशिया. ये दुनिया का सबसे बड़ा टूरिज्म डेस्टिनेशन भी है. यहां घूमने आने वाले टूरिस्टों को यहां की लड़कियों से प्लेजर मैरिज करने का भी मौका मिलता है.

इंडोनेशिया के पुंकाक में कम आय वाले परिवारों की युवतियां पैसे के बदले में पुरुष पर्यटकों के साथ शार्ट मैरिज कर रही हैं. इसका उद्देश्य पर्यटकों को प्लेजर देकर पैसा बनाना है.  मुताह निकाह के रूप में जानी जाने वाली ये प्रथा यहां आकर्षक उद्योग के रूप में उभरी है. ये पर्यटन और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे रही है.

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सवाल – इंडोनेशिया की महिलाएं पर्यटकों के साथ ‘आनंद विवाह’ क्यों कर रही हैं?
– कम आय वाले परिवारों की युवतियां पैसे के बदले में पुरुष पर्यटकों के साथ मुतह विवाह कर रही हैं. ये इस्लाम में अस्थायी विवाह माना जाता है. हालांकि, इस प्रथा की तीखी आलोचना की गई है क्योंकि कई पर्यटक स्थानीय महिलाओं का फ़ायदा उठा रहे हैं.

सवाल – क्या होता है आनंद विवाह?
– आनंद विवाह गरीब महिलाओं और मुख्य रूप से मध्य पूर्व से आए पुरुष पर्यटकों के बीच पैसे के बदले में  शार्ट टर्म विवाह होते हैं.

सवाल – कैसे ये विवाह इंडोनेशिया में एक उद्योग बन गया है?
– लॉस एंजिल्स टाइम्स के अनुसार इस्लाम में मुतह निकाह की ये प्रथा एक आकर्षक उद्योग के रूप में उभरी है, जो पश्चिमी इंडोनेशिया के एक लोकप्रिय जगह पुंकाक में पर्यटन और लोकल इकोनॉमी को बढ़ावा दे रही है, जो अरब पर्यटकों को आकर्षित करता है. अब ये काम कुछ कंपनियों ने संभाल लिया है. एक हाइलैंड रिसॉर्ट में एजेंसियों द्वारा पर्यटकों को स्थानीय महिलाओं से मिलवाया जाता है. दोनों पक्षों की सहमति से आयोजित एक छोटे और अनफॉर्मल मैरिज के बाद पुरुष महिला को दुल्हन की कीमत देता है. जब तक पर्यटक वहां रहता है तब तक महिला उसे घरेलू और यौन सेवाएं देती है. पर्यटक के जाने के साथ ही विवाह भंग हो जाता है.

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सवाल – एक महिला यहां ऐसे कितने मुताह निकाह कर लेती है?
–  लास एंजिल्स टाइम्स से 28 वर्षीय इंडोनेशियाई महिला काहाया ने अस्थायी पत्नी होने के कष्टदायक अनुभव के बारे में बात की. उसने LA टाइम्स को बताया कि उसने 15 से ज़्यादा बार पश्चिम एशियाई पर्यटकों से शादी की है. इस काम में अधिकारियों और एजेंट का भी हिस्सा होता है. इसे काटने के बाद महिला को आधी राशि मिलती है.

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि काहाया ने 13 साल की उम्र में पहली बार इस तरह की शादी की थी. उसे उसके दादा-दादी ने इसके लिए मजबूर किया था. बाद में जब उसका निकाह टूट गया तो उसे अपनी बेटी को खुद पालना पड़ रहा है. उसने जनरल स्टोर या जूते बनाने वाली फैक्टरियों में काम करने के बारे में सोचा, लेकिन वहां वेतन बहुत कम था.

अब वह हर विवाह से 300 से 500 डॉलर कमाती है, जिससे उसका किराया और बीमार दादा-दादी का खर्च चल पाता है. हालांकि उसके परिवार को नहीं मालूम कि वो ये काम करती है. हालांकि कुछ महिलाएं इसको करने के बाद इससे निकलकर मुकम्मल गृहस्थी भी बसा लेती हैं.

सवाल – ये उद्योग कैसे चलता है?
– इसमें हाल के बरसों में एक बिजनेस के तौर पर काफी विस्तार हुआ है. बीच में एजेंट होते हैं. जिनमें से कुछ एक महीने में 25 शादियां तय करते हैं.  हालांकि इसे लेकर अब काफी सवाल उठने लगे हैं, क्योंकि इससे महिलाओं का शोषण भी हो रहा है और सुरक्षा भी अक्सर खतरे में पड़ती है.

सवाल –  क्या आनंद विवाह या मुताह निकाह इस्लाम में मान्य है?
– इस प्रथा की उत्पत्ति शिया इस्लाम में हुई. भारत में मुगलों के दौर में भी ऐसा विवाह होता था. खासकर मुगल व्यापारी जब लंबी लंबी यात्राएं करते थे, तो वो ऐसे विवाह करते थे. हालांकि बहुत से इस्लाम विद्वानों ने इन विवाहों को “अस्वीकार्य” माना. जिस तरह के कांट्रैक्ट के साथ ये विवाह इंडोनेशिया में हो रहे हैं, वो वहां के कानून में स्वीकार नहीं किये जाते. वे विवाह के मूल विचार के विरुद्ध हैं. इंडोनेशियाई विवाह कानूनों को तोड़ने पर दंड, जेल की सजा और सामाजिक या धार्मिक परिणाम होते हैं.

सवाल – क्या होता है इस्लाम में मुताह निकाह?
– मुताह निकाह, इस्लाम में अस्थायी विवाह का एक रूप है. इसे निकाह मुताह भी कहा जाता है. मुताह शब्द अरबी भाषा से लिया गया है. इसका मतलब है, ‘आनंद’. मुताह निकाह को आनंद विवाह भी कहा जाता है.
– यह एक निजी अनुबंध है, जो मौखिक या लिखित हो सकता है.
– इसमें शादी करने के इरादे से शर्तों की स्वीकृति के बाद निकाह किया जाता है.
– मुताह निकाह की अवधि अलग-अलग हो सकती है, यह एक घंटे जितनी छोटी हो सकती है या 99 साल तक भी हो सकती है.
– मुताह निकाह में, पुरुष को महिला को सहमति राशि का भुगतान करना होता है.
– मुताह निकाह को लेकर अलग-अलग मत हैं. कुछ संप्रदायों का मानना है कि यह प्रथा अब जायज़ नहीं है, जबकि कुछ का मानना है कि यह जायज़ है.
– मुताह निकाह को लेकर आलोचकों के अलग-अलग मत हैं. कुछ आलोचकों का कहना है कि यह प्रथा शादी से पहले किसी के साथ सोने का एक तरीका है. कुछ इसे ‘वेश्यावृत्ति’ भी कहते हैं.
– भारत में मुताह निकाह बहुत कम देखने को मिलता है.

सवाल – किन देशों में मुताह निकाह अब भी होता है

– “मुताह निकाह” यानी अस्थायी विवाह इस्लाम की एक ऐसी प्रथा है जिसे शिया संप्रदाय (खासकर इमामीया शिया या जाफ़री फ़िक़ह) मान्यता देता है, जबकि सुन्नी इस्लाम इसे हराम मानता है.
– ईरान में मुताह निकाह कानूनी रूप से मान्य है. इसे फारसी में “सिग़ेह” कहा जाता है.
– इराक में भी शिया बहुल क्षेत्रों ख़ासकर नजफ़, कर्बला और बसरा में मुताह विवाह प्रचलित है.
– लेबनान में शिया आबादी मुताह को धार्मिक रूप से वैध मानती है. जाफ़री शरीअत कोर्ट इसे मान्यता देती है.
– सीरिया में शिया और अलवी समुदायों के बीच मुताह निकाह सीमित स्तर पर प्रचलित है.
– अफगानिस्तान में हज़ारा शिया में ये निकाह होता है, ख़ासकर बामियान, हेरात और काबुल के कुछ हिस्सों में.
– पाकिस्तान में भी कराची, लाहौर, पराचिनार और गिलगित-बाल्टिस्तान के शिया समुदायों में मुतह अब भी धार्मिक प्रथा के रूप में मौजूद है.

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