‘शोले’ को टक्कर देने वाली इस फिल्म में न एक्शन-ड्रामा था, न थ्रिलर और न ही सुपरस्टार्स का जमावड़ा. फिर भी इस फिल्म ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक अनोखा अध्याय लिखा, जो 50 साल बाद भी चर्चा में है.
लागत से 10 गुना की कमाई

फिल्म रिलीज़ होने के बाद संतोषी मां की पूजा और व्रत रखने की परंपरा पूरे देश में फैली थी.
धार्मिक आयोजन जैसा हो गया था थिएटर्स का माहौल
उस दौर में सिनेमा को बहुच अच्छी नजरों से नहीं देखा जाता था. सिनेमाघरों में महिलाओं का संख्या कम होती थी. लेकिन ‘जय संतोषी मां’ ने इस ट्रेंड को बदल दिया. देवी संतोषी माता की भक्त महिलाएं, अपने बच्चों के साथ फिल्म देखने सिनेमा हॉल पहुंचने लगीं. कई थिएटर्स तो ऐसे होते थे, जहां माहौल किसी धार्मिक आयोजन जैसा हो जाता था. इस फिल्म का माहौल ऐसा था कि लोग सिनेमा हॉल में एंट्री करने से पहले अपने जूते-चप्पल बाहर उतार देते थे. फिल्म देखना सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि एक तरह की धार्मिक गतिविधि बन गया था. लोग आरती की थाली लेकर सिनेमाघरों में पहुंचते थे, आरती करते और दक्षिणा चढ़ाते थे.
क्यों ‘संतोषी मां’ ने रखा व्रत

अनीता गुहा ने देवी मां संतोषी का रोल निभाया था.
शोले

जय संतोषी मां
जब शोले धीरे-धीरे बॉक्स ऑफिस पर रफ्तार पकड़ रही थी, उसी दौरान जय संतोषी मां ने भी अपनी जगह मजबूत बनाई. शोले की लोकप्रियता के बीच, यही एक फिल्म थी जिसने लगातार दर्शकों को खींचा. धार्मिक आस्था और भक्ति-भाव ने इसे दर्शकों के दिल में जगह दिलाई. फिल्म लगातार 50 हफ्ते तक सिनेमाघरों में चली और कई जगह तो ‘शोले’ के बराबर भीड़ जुटी. दर्शकों का मानना था कि फिल्म देखने से उनके जीवन में सुख-समृद्धि आएगी. यही वजह थी कि लोग परिवार समेत, यहां तक कि गांवों से बैल गाड़ियों में बैठकर भी सिनेमाघरों तक पहुंचते थे. ‘जय संतोषी मां’ ने 5 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाए थे.
शोले के बाद कमाई के मामले में रही नंबर 2
‘जय संतोषी मां’ को अब ज्यादातर लोग सिर्फ इस वजह से याद करते हैं कि यह एक समय में भारत की सबसे बड़ी फिल्म ‘शोले’ के ठीक बाद दूसरे नंबर पर रही थी. कम बजट, साधारण तकनीक और बिना किसी बड़े प्रचार के भी ‘जय संतोषी मां’ ने यह साबित किया कि अगर कहानी और भावनाएं दर्शकों से जुड़ जाएं, तो फिल्म किसी भी बड़ी स्टारकास्ट और भव्य सेट को चुनौती दे सकती है.





